शिमला। हिमाचल प्रदेश के स्कूल शिक्षा विभाग में बड़ा प्रशासनिक बदलाव किया गया है। राज्य सरकार ने शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के उद्देश्य से 14 प्रधानाचार्यों (स्कूल संवर्ग) को उपनिदेशक शिक्षा (डीडीई) के पद पर प्लेसमेंट प्रदान की है। शिक्षा विभाग की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार सभी अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से नई जिम्मेदारियां सौंप दी गई हैं।
सरकार के इस फैसले को शिक्षा प्रशासन में लंबे समय से खाली चल रहे उपनिदेशक स्तर के पदों को भरने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे जिला स्तर पर शिक्षा विभाग के कामकाज, स्कूलों की निगरानी और शैक्षणिक योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन में मदद मिलने की उम्मीद है।
शिक्षा विभाग द्वारा जारी आदेशों के अनुसार सभी चयनित अधिकारियों को वर्तमान में अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे अधिकारियों से कार्यभार लेकर अपनी नई तैनाती वाली जगह पर तुरंत ज्वाइन करने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि कोई अधिकारी तय समय सीमा के भीतर कार्यभार ग्रहण नहीं करता है तो उसकी प्लेसमेंट स्वत: समाप्त मानी जाएगी और वरिष्ठता सूची में अगले योग्य अधिकारी को अवसर दिया जाएगा।
शिक्षा सचिव राकेश कंवर की ओर से जारी अधिसूचना के मुताबिक उपमा शर्मा को उपनिदेशक शिक्षा क्वालिटी चंबा की जिम्मेदारी दी गई है। वहीं विजय कुमार और अनिल कुमार धंगोटा को उपनिदेशक शिक्षा मुख्यालय शिमला में तैनाती मिली है। ओंकार सिंह को उपनिदेशक प्रारंभिक शिक्षा किन्नौर नियुक्त किया गया है।
इसके अलावा कृष्ण देव को उपनिदेशक उच्च शिक्षा कुल्लू, सुरेश कुमार को उपनिदेशक क्वालिटी लाहौल-स्पीति और नीरज गर्ग को उपनिदेशक क्वालिटी ऊना की जिम्मेदारी सौंपी गई है। मनोहर लाल को उपनिदेशक प्रारंभिक शिक्षा चंबा नियुक्त किया गया है।
सरकार ने सीमा धीमान को परिवहन विभाग के रोड सेफ्टी सेल में तैनाती दी है। वहीं ज्ञान चंद को उपनिदेशक क्वालिटी कुल्लू, नवनीत ठाकुर को उपनिदेशक सेकेंडरी लाहौल-स्पीति, अनीता शर्मा को उपनिदेशक क्वालिटी सिरमौर, मदन लाल को उपनिदेशक सेकेंडरी सिरमौर और अनिल कुमार जसूर को उपनिदेशक क्वालिटी शिमला की जिम्मेदारी दी गई है।
शिक्षा विभाग ने आदेशों में यह भी कहा है कि सभी नियुक्तियां निर्धारित नियमों और प्रक्रिया के तहत की गई हैं। अधिकारियों को नई जिम्मेदारियों के अनुसार शिक्षा व्यवस्था में सुधार, स्कूलों की निगरानी और विभागीय योजनाओं को प्रभावी तरीके से लागू करने का काम करना होगा।
सरकार ने इन प्लेसमेंट आदेशों को सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामले के अंतिम फैसले के अधीन रखा है। अधिसूचना में बताया गया है कि यह नियुक्तियां सुप्रीम कोर्ट में लंबित एसएलपी (सिविल) संख्या 26276/2024, लेखराज एवं अन्य बनाम हिमाचल प्रदेश सरकार एवं अन्य मामले के निर्णय के अधीन रहेंगी। न्यायालय के अंतिम फैसले के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
शिक्षा विभाग में उपनिदेशक स्तर के पदों पर लंबे समय से रिक्तियां बनी हुई थीं। इन पदों पर नियुक्तियां होने से विभागीय कामकाज में तेजी आने की संभावना है। उपनिदेशक स्तर के अधिकारी स्कूलों की शैक्षणिक गुणवत्ता, प्रशासनिक व्यवस्था और सरकारी योजनाओं की निगरानी में अहम भूमिका निभाते हैं।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि अनुभवी प्रधानाचार्यों को उपनिदेशक पद की जिम्मेदारी मिलने से स्कूल शिक्षा व्यवस्था को लाभ मिलेगा। जिला और राज्य स्तर पर अधिकारियों की संख्या बढ़ने से स्कूलों की समस्याओं का समाधान तेजी से हो सकेगा और शिक्षकों व विद्यार्थियों से जुड़े मामलों पर भी बेहतर निगरानी रखी जा सकेगी।
राज्य सरकार ने अधिकारियों को बिना देरी किए नई जिम्मेदारियां संभालने के निर्देश दिए हैं। माना जा रहा है कि इन नियुक्तियों के बाद शिक्षा विभाग की प्रशासनिक संरचना और अधिक मजबूत होगी तथा प्रदेश में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के प्रयासों को गति मिलेगी।