Himachal Pradesh.हिमाचल प्रदेश: शिमला की मेहली पंचायत को मॉडल सोलर विलेज के रूप में विकसित करने की योजना बनाई गई है। इस पहल के तहत पंचायत को सौर ऊर्जा आधारित परियोजनाओं के माध्यम से ऊर्जा आत्मनिर्भर और पर्यावरण के अनुकूल गांव के रूप में तैयार किया जाएगा। इस उपलब्धि के लिए पंचायत को 1 करोड़ रुपये का इनाम भी मिलेगा।
परियोजना के अनुसार, मेहली पंचायत में सौर पैनल लगाए जाएंगे, जिससे घरेलू और सार्वजनिक उपयोग के लिए बिजली उत्पादन किया जाएगा। इसके अलावा, पंचायत में सोलर स्ट्रीट लाइट्स, पानी पंपिंग और अन्य ऊर्जा-खपत वाले उपकरण स्थापित किए जाएंगे। इस पहल का उद्देश्य ग्रामीण इलाकों में सतत और स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देना है।
स्थानीय अधिकारियों ने बताया कि इस परियोजना से मेहली पंचायत न केवल ऊर्जा की बचत और पर्यावरण संरक्षण में अग्रणी बनेगी, बल्कि इससे ग्रामीण लोगों को नवीन तकनीक में प्रशिक्षण और रोजगार के अवसर भी मिलेंगे। उन्होंने कहा कि यह योजना राज्य सरकार और केंद्रीय योजनाओं के तहत लागू की जाएगी।
पंचायत के सदस्यों ने कहा कि यह पहल गांव को सौर ऊर्जा के क्षेत्र में मॉडल बनाकर अन्य पंचायतों के लिए प्रेरणा बनेगी। उन्होंने बताया कि पंचायत के सभी घरों और सार्वजनिक स्थलों को सौर ऊर्जा से सुसज्जित किया जाएगा, जिससे बिजली की आपूर्ति लगातार और स्वच्छ होगी।
विशेषज्ञों का कहना है कि सौर ऊर्जा आधारित मॉडल गांव ऊर्जा आत्मनिर्भरता, लागत बचत और पर्यावरण सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। इस पहल से कार्बन उत्सर्जन में कमी, बिजली बिल में बचत और ऊर्जा संकट से मुक्ति जैसी सुविधाएँ मिलेंगी।
स्थानीय लोगों ने भी इस योजना का स्वागत किया और कहा कि गांव को मॉडल सोलर विलेज बनाने से शिक्षा, रोजगार और जीवन स्तर में सुधार होगा। उन्होंने पंचायत और अधिकारियों से आग्रह किया कि परियोजना को जल्द से जल्द लागू किया जाए।
संक्षेप में, शिमला की मेहली पंचायत को मॉडल सोलर विलेज बनाने की योजना के तहत सौर ऊर्जा का व्यापक उपयोग किया जाएगा। इस पहल से पंचायत को 1 करोड़ रुपये का इनाम मिलेगा, और यह गांव ऊर्जा स्वावलंबी, पर्यावरण-सुरक्षित और तकनीकी रूप से सशक्त बन जाएगा। परियोजना से स्थानीय लोगों को प्रशिक्षण और रोजगार भी मिलेगा, जो ग्रामीण विकास और सतत ऊर्जा उपयोग की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।