हिमाचल में प्राइवेट बस ऑपरेटर्स का आंदोलन का ऐलान

Update: 2026-08-02 11:16 GMT

शिमला। हिमाचल प्रदेश में निजी बस ऑपरेटरों और सरकार के बीच स्पेशल रोड टैक्स (एसआरटी) को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। हिमाचल प्रदेश निजी बस ऑपरेटर संघ ने एसआरटी वसूली में कथित दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाते हुए प्रदेशव्यापी आंदोलन की चेतावनी दी है। संघ का कहना है कि निजी बस संचालकों पर टैक्स को लेकर सख्ती बरती जाती है, लेकिन सरकारी परिवहन निगम पर लंबे समय से बकाया राशि होने के बावजूद कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की जा रही है।

निजी बस ऑपरेटर संघ के प्रदेश महासचिव रमेश कमल ने आरोप लगाया कि परिवहन विभाग निजी बस संचालकों के साथ समान व्यवहार नहीं कर रहा है। उन्होंने कहा कि निजी ऑपरेटरों से एसआरटी जमा करने में मामूली देरी होने पर परमिट रोकने, नोटिस जारी करने और अन्य प्रशासनिक कार्रवाई की जाती है। वहीं दूसरी ओर हिमाचल पथ परिवहन निगम (एचआरटीसी) पर वर्ष 2008 से एसआरटी बकाया होने के बावजूद कोई सख्त कदम नहीं उठाया गया है।

संघ ने सरकार से मांग की है कि एचआरटीसी पर लंबित एसआरटी की कुल राशि और उसकी वसूली के लिए अब तक की गई कार्रवाई की जानकारी सार्वजनिक की जाए। ऑपरेटरों का कहना है कि संविधान के समानता के सिद्धांत के अनुसार सरकारी और निजी दोनों परिवहन सेवाओं पर एक जैसे नियम लागू होने चाहिए।

निजी बस ऑपरेटरों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो वे लोकतांत्रिक तरीके से प्रदेशव्यापी आंदोलन शुरू करेंगे। संघ का कहना है कि निजी परिवहन क्षेत्र पहले से ही आर्थिक संकट से गुजर रहा है और लगातार बढ़ते खर्चों ने उनकी मुश्किलें बढ़ा दी हैं।

ऑपरेटरों के अनुसार डीजल की बढ़ती कीमत, बसों के रखरखाव का खर्च, स्पेयर पार्ट्स की महंगाई, बैंक ऋण और बीमा प्रीमियम जैसी लागत लगातार बढ़ रही है। इसके बावजूद निजी बस संचालक प्रदेश के दुर्गम और ग्रामीण इलाकों में लोगों को परिवहन सुविधा उपलब्ध करा रहे हैं।

संघ ने यह भी कहा कि सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं से उन्हें कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन ऐसी योजनाओं का आर्थिक भार केवल निजी ऑपरेटरों पर नहीं डाला जाना चाहिए। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि एचआरटीसी बसों में महिलाओं को 50 प्रतिशत किराया छूट देने जैसी योजनाओं से निजी बसों की आय प्रभावित हुई है। ऐसे में निजी क्षेत्र को भी आर्थिक सहायता या राहत पैकेज दिया जाना चाहिए।

निजी बस ऑपरेटर संघ ने सरकार के सामने कई मांगें रखी हैं। इनमें निजी बस संचालकों को जारी नोटिसों की समीक्षा करना, अनावश्यक प्रशासनिक कार्रवाई रोकना, परिवहन क्षेत्र के लिए वित्तीय राहत पैकेज उपलब्ध कराना और व्यावहारिक नीति लागू करना शामिल है।

संघ का कहना है कि निजी बस ऑपरेटर लंबे समय से अपनी समस्याओं को सरकार के सामने रखते आ रहे हैं, लेकिन अब तक ठोस समाधान नहीं निकला है। उनका दावा है कि यदि स्थिति ऐसी ही बनी रही तो कई छोटे ऑपरेटरों के लिए बस सेवा जारी रखना मुश्किल हो जाएगा।

हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्य में निजी बस सेवाएं ग्रामीण क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती हैं। हजारों लोग रोजाना शिक्षा, रोजगार और स्वास्थ्य सेवाओं के लिए इन बसों पर निर्भर रहते हैं। ऐसे में निजी बस ऑपरेटरों और सरकार के बीच बढ़ता विवाद आने वाले दिनों में परिवहन व्यवस्था को प्रभावित कर सकता है। संघ ने साफ किया है कि मांगें पूरी नहीं होने पर आंदोलन का रास्ता अपनाया जाएगा।

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