शिमला: भाजपा ने कांग्रेस सरकार के “सरकार गांव के द्वार” कार्यक्रम पर सवाल उठाते हुए कहा है कि यह योजना पूर्व भाजपा सरकार के जनमंच मॉडल की नकल भर है, जिसमें न तो वही संवेदनशीलता है और न ही समस्याओं के समाधान की प्रतिबद्धता। भाजपा प्रवक्ता संदीपनी भारद्वाज ने शनिवार को कहा कि कांग्रेस ने नाम तो बदल दिया है। लेकिन जनता की समस्याओं को लेकर उसकी नीयत आज भी साफ नहीं है।

संदीपनी भारद्वाज ने कहा कि जयराम ठाकुर के नेतृत्व में 2017 से 2022 के बीच चला जनमंच कार्यक्रम केवल एक मंच नहीं था, बल्कि लोगों की समस्याओं का मौके पर समाधान करने का भरोसेमंद माध्यम था। उन्होंने कहा कि जनमंच के दौरान सरकार और प्रशासन सीधे गांवों और दूरदराज के इलाकों तक पहुंचा, जिससे लोगों को जिला मुख्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़े।

भाजपा प्रवक्ता ने बताया कि जनमंच कार्यक्रमों में कुल 45,726 शिकायतें प्राप्त हुई थीं, जिनमें से 43,821 का समाधान किया गया। यह करीब 95 प्रतिशत निवारण दर थी, जो उस समय की सरकार की जवाबदेही और इच्छाशक्ति को दिखाती है। उन्होंने कहा कि जनमंच पर लगभग 5.34 करोड़ रुपये खर्च किए गए, लेकिन इसके जरिए हजारों लोगों को समय और पैसे की बचत हुई।

संदीपनी भारद्वाज के अनुसार जनमंच के दौरान 34,875 से अधिक प्रमाण पत्र मौके पर ही जारी किए गए और 336 स्वास्थ्य शिविर भी लगाए गए। उन्होंने कहा कि यही सुशासन का असली उदाहरण था, जहां जनता को राहत मिली और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भरोसा बढ़ा।

इसके उलट भाजपा का आरोप है कि कांग्रेस सरकार का “सरकार गांव के द्वार” कार्यक्रम सिर्फ भाषणों, फोटो खिंचवाने और प्रचार तक सीमित है। संदीपनी भारद्वाज ने कहा कि इस कार्यक्रम से न तो लोगों को समय पर प्रमाण पत्र मिल रहे हैं और न ही उनकी शिकायतों का समाधान हो पा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार केवल दिखावे के जरिए अपनी विफलताओं को छिपाने की कोशिश कर रही है।

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