पंडोह (मंडी)। मनाली फोरलेन पर दयोड़ से हणेगी टनल के माध्यम से यातायात शुरू होने के बाद हणोगी बाजार की रौनक कम होने लगी है। पहले इस मार्ग से गुजरने वाले अधिकतर वाहन हणोगी बाजार से होकर आगे बढ़ते थे। इस कारण बाजार में यात्रियों और पर्यटकों की लगातार आवाजाही बनी रहती थी। अब अधिकांश गाड़ियां नई सुरंगों से होकर निकल रही हैं, जिससे पुराने मार्ग पर वाहनों की संख्या घट गई है। इसका सीधा असर बाजार की दुकानों और स्थानीय कारोबार पर दिखाई देने लगा है।

हणोगी बाजार वर्षों से इस मार्ग पर आने-जाने वाले यात्रियों के लिए एक महत्वपूर्ण पड़ाव रहा है। यहां वाहन चालक और यात्री कुछ समय रुककर भोजन, चाय-पानी तथा दैनिक जरूरत का सामान खरीदते थे। प्रसिद्ध माता हणोगी मंदिर में दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं के कारण भी बाजार में चहल-पहल बनी रहती थी। सड़क मार्ग से गुजरने वाले लोगों पर निर्भर स्थानीय दुकानदारों और छोटे कारोबारियों को अब ग्राहक घटने की चिंता सताने लगी है।

फोरलेन और सुरंगों के निर्माण से यात्रियों का सफर पहले की तुलना में अधिक सुगम और तेज हुआ है। वाहन चालकों को पुराने मार्ग के कई घुमावदार हिस्सों से राहत मिली है। हालांकि, यातायात के नए मार्ग पर स्थानांतरित होने से पुराने रास्ते के किनारे बसे बाजारों और छोटे व्यापारिक केंद्रों के सामने आजीविका से जुड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। हणोगी बाजार भी इसी बदलाव से प्रभावित होता दिखाई दे रहा है।

स्थानीय लोगों के अनुसार, अभी केवल एक तरफ की व्यवस्था के माध्यम से यातायात शुरू हुआ है। आने वाले समय में जब दोनों ओर की सुरंगों से गाड़ियों की आवाजाही पूरी तरह प्रारंभ हो जाएगी, तब पुराने मार्ग पर वाहनों की संख्या और कम हो सकती है। ऐसी स्थिति में हणोगी बाजार की दुकानों, ढाबों और अन्य छोटे प्रतिष्ठानों का कारोबार प्रभावित होने की आशंका है। कई परिवारों की आजीविका प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से इसी बाजार से जुड़ी हुई है।

लोगों की सबसे बड़ी चिंता प्रसिद्ध माता हणोगी मंदिर तक पहुंच को लेकर है। यह मंदिर स्थानीय निवासियों के साथ बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। पहले मुख्य मार्ग से गुजरने वाले यात्री आसानी से मंदिर तक पहुंच जाते थे। अब वाहनों के सुरंगों से गुजरने के कारण लोगों को पुराने मार्ग की ओर अलग से जाना पड़ सकता है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि यदि स्पष्ट दिशा-सूचक बोर्ड और सुविधाजनक संपर्क मार्ग की व्यवस्था नहीं हुई तो बाहर से आने वाले यात्रियों को मंदिर तक पहुंचने में कठिनाई हो सकती है।

स्थानीय कारोबारियों का मानना है कि नई यातायात व्यवस्था के साथ हणोगी बाजार और मंदिर को जोड़ने के लिए ठोस योजना बनाई जानी चाहिए। फोरलेन पर उचित स्थानों पर बड़े और स्पष्ट संकेतक लगाए जाने चाहिए, ताकि यात्रियों को मंदिर और बाजार की जानकारी समय रहते मिल सके। इसके अलावा पुराने मार्ग की नियमित देखरेख, मरम्मत और सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखना भी आवश्यक होगा। यदि पुरानी सड़क की हालत खराब होती है तो श्रद्धालुओं के साथ स्थानीय लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ेगा।

कारोबारियों को आशंका है कि सड़क से गुजरने वाले यात्रियों की संख्या घटने के बाद उनकी आय में बड़ी कमी आ सकती है। बाजार में कई छोटे दुकानदार सीमित संसाधनों के साथ अपना व्यवसाय चला रहे हैं। उनकी बिक्री मुख्य रूप से मार्ग से गुजरने वाले वाहनों और मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं पर निर्भर है। ग्राहक कम होने की स्थिति में दुकान का किराया, बिजली बिल तथा अन्य खर्च निकालना भी मुश्किल हो सकता है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि विकास परियोजनाएं क्षेत्र की जरूरत हैं और बेहतर सड़क सुविधा से पूरे इलाके को लाभ मिलेगा। इसके बावजूद परियोजनाओं से प्रभावित होने वाले पुराने बाजारों और स्थानीय व्यवसायों के हितों की अनदेखी नहीं होनी चाहिए। प्रशासन और संबंधित विभागों को व्यापारियों, मंदिर प्रबंधन और स्थानीय पंचायत प्रतिनिधियों के साथ बातचीत करके व्यावहारिक समाधान निकालना चाहिए।

हणोगी बाजार को धार्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करना भी एक विकल्प हो सकता है। माता हणोगी मंदिर के बारे में जानकारी देने वाले बोर्ड, वाहन पार्किंग, स्वच्छ पेयजल, शौचालय और यात्रियों के बैठने जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं तो श्रद्धालुओं को पुराने मार्ग की ओर आकर्षित किया जा सकता है। बाजार में स्थानीय उत्पादों और पारंपरिक वस्तुओं की बिक्री को प्रोत्साहन देकर कारोबारियों को आय के नए अवसर भी दिए जा सकते हैं।

स्थानीय निवासियों ने मांग की है कि दोनों तरफ की सुरंगों से यातायात पूरी तरह शुरू करने से पहले हणोगी बाजार और मंदिर की संपर्क व्यवस्था का विस्तृत आकलन किया जाए। आपातकालीन सेवाओं, सार्वजनिक परिवहन और स्थानीय वाहनों के आवागमन को ध्यान में रखते हुए पुराने मार्ग को चालू एवं सुरक्षित रखा जाना चाहिए। लोगों का कहना है कि फोरलेन परियोजना से यात्रा आसान हुई है, लेकिन विकास का वास्तविक लाभ तभी होगा जब इसके साथ स्थानीय आस्था, व्यापार और रोजगार भी सुरक्षित रहें।

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