मंडी में सड़क संकट, सब्जियां फेंकने को मजबूर किसान

Update: 2026-07-30 08:19 GMT

मंडी। हिमाचल प्रदेश में लगातार हो रही भारी बारिश ने जनजीवन को प्रभावित कर दिया है। जगह-जगह भूस्खलन और मलबा आने से सड़कें बाधित हैं, जिसका सीधा असर किसानों पर पड़ रहा है। जिला मंडी में सड़क संपर्क टूटने से परेशान किसानों ने अपनी तैयार सब्जियां बाजार तक नहीं पहुंच पाने के कारण कई क्विंटल सब्जियां नाले में फेंक दीं।

मामला लोक निर्माण विभाग उपमंडल झटिंगरी के अंतर्गत आने वाले थलटूखोड़-मढ़ सड़क मार्ग का है। भूस्खलन के कारण यह मार्ग बीते सोमवार से बंद पड़ा है। सड़क बंद होने के चलते क्षेत्र के किसानों की नगदी फसलें खेतों में ही खराब होने लगी हैं। मेहनत से तैयार की गई सब्जियों को मंडियों तक पहुंचाने का रास्ता बंद होने से किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।

क्षेत्र के किसान मुख्य रूप से सब्जी उत्पादन पर निर्भर हैं। मौसम की अनुकूल परिस्थितियों के कारण इस समय खेतों में सब्जियों की अच्छी पैदावार हुई है, लेकिन सड़क बंद होने से किसान अपनी उपज को समय पर बाजार तक नहीं पहुंचा पा रहे हैं। सब्जियां अधिक समय तक खेतों या घरों में रखने योग्य नहीं होतीं, जिसके कारण किसानों के सामने उन्हें फेंकने के अलावा कोई विकल्प नहीं बच रहा है।

किसानों का कहना है कि उन्होंने फसल तैयार करने में बीज, खाद, दवाइयों और मेहनत पर काफी खर्च किया था। उन्हें उम्मीद थी कि तैयार फसल को बाजार में बेचकर अच्छी आमदनी होगी, लेकिन सड़क बंद होने से उनकी पूरी मेहनत पर पानी फिरता नजर आ रहा है।

स्थानीय किसानों के अनुसार, थलटूखोड़-मढ़ सड़क मार्ग क्षेत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। इसी रास्ते से किसान अपनी सब्जियां और अन्य कृषि उत्पाद बाजार तक पहुंचाते हैं। सड़क बंद होने के कारण न केवल परिवहन व्यवस्था प्रभावित हुई है, बल्कि रोजमर्रा की जरूरतों को लेकर भी लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

किसानों ने प्रशासन और लोक निर्माण विभाग से जल्द से जल्द सड़क बहाल करने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि सड़क जल्द नहीं खुली तो आने वाले दिनों में और अधिक फसल बर्बाद हो सकती है। उन्होंने विभाग से युद्धस्तर पर काम कर मार्ग को खोलने की अपील की है।

भारी बारिश के कारण हिमाचल प्रदेश के कई जिलों में ऐसी स्थिति बनी हुई है। पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन के कारण कई सड़क मार्ग बंद हो गए हैं। प्रशासन और संबंधित विभाग प्रभावित क्षेत्रों में सड़क बहाली का काम कर रहे हैं, लेकिन लगातार हो रही बारिश के कारण राहत कार्यों में भी बाधाएं आ रही हैं।

लोक निर्माण विभाग की ओर से बंद सड़कों को खोलने के लिए मशीनरी तैनात की गई है। हालांकि, पहाड़ी इलाकों में बार-बार हो रहे भूस्खलन के कारण सड़कें खोलने के बाद भी दोबारा बंद हो जा रही हैं।

किसानों का कहना है कि सड़कें बंद होने का असर केवल परिवहन तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे उनकी आजीविका प्रभावित हो रही है। सब्जी जैसी जल्दी खराब होने वाली फसलों के लिए समय पर बाजार तक पहुंचना बेहद जरूरी होता है। देरी होने पर फसल की गुणवत्ता खराब हो जाती है और उचित कीमत भी नहीं मिल पाती।

स्थानीय लोगों ने सरकार से मांग की है कि आपदा प्रभावित क्षेत्रों में सड़कों की स्थिति सुधारने के साथ-साथ किसानों को हुए नुकसान का आकलन कर उन्हें राहत प्रदान की जाए।

फिलहाल थलटूखोड़-मढ़ सड़क मार्ग बंद होने से क्षेत्र के किसान सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। खेतों में तैयार फसलें बाजार तक नहीं पहुंच पा रही हैं और किसानों की आंखों के सामने उनकी मेहनत बर्बाद हो रही है। अब उनकी उम्मीदें प्रशासन की त्वरित कार्रवाई और जल्द सड़क बहाली पर टिकी हैं।

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