शिमला सचिवालय में CM कार्यालय का पुनर्निर्माण, वैकल्पिक दफ्तर में बैठेंगे मुख्यमंत्री
Himachal Pradesh हिमाचल प्रदेश : हिमाचल प्रदेश के शिमला स्थित सचिवालय परिसर में मुख्यमंत्री कार्यालय के पुनर्निर्माण और विस्तार कार्य के चलते प्रशासनिक व्यवस्था में अस्थायी बदलाव किया गया है। निर्माणाधीन भवन को नया आकार देने के लिए पुराने मुख्यमंत्री कार्यालय और मुख्य सचिव कार्यालय के कुछ हिस्सों को ध्वस्त कर नए ढांचे का निर्माण किया जा रहा है। इस कारण मुख्यमंत्री को अस्थायी रूप से वैकल्पिक कार्यालय में स्थानांतरित किया गया है।
नई व्यवस्था के तहत मुख्यमंत्री अब इलर्जली भवन के दूसरे छोर पर स्थित लिफ्ट के पास बने खाली कार्यालय में बैठेंगे, जिसे पहले सीपीएस कार्यालय के रूप में उपयोग किया जाता था। यह कार्यालय फिलहाल अस्थायी रूप से मुख्यमंत्री के कार्य संचालन के लिए तैयार किया गया है।
Shimla स्थित सचिवालय में इस बदलाव के साथ सुरक्षा और प्रशासनिक तैयारियों को भी मजबूत किया गया है। मुख्यमंत्री कार्यालय के आसपास सुरक्षा व्यवस्था को पहले से अधिक सख्त कर दिया गया है।
मुख्यमंत्री की सुरक्षा टीम के जवान पहले ही नए अस्थायी कार्यालय में तैनात कर दिए गए हैं। प्रवेश द्वार पर आगंतुकों की जांच के लिए मेटल डिटेक्टर लगाए गए हैं, ताकि सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जा सके। इसके साथ ही आने वाले आगंतुकों के लिए अलग से वेटिंग रूम की व्यवस्था भी की गई है, जहां उन्हें आवश्यक जांच के बाद ही आगे जाने की अनुमति दी जाएगी।
नई व्यवस्था के अनुसार मुख्यमंत्री के अतिरिक्त प्रधान निजी सचिव और अन्य वरिष्ठ स्टाफ भी इसी परिसर में बैठकर काम करेंगे, ताकि प्रशासनिक कार्यों में किसी तरह की बाधा न आए और फाइलों के निपटान की प्रक्रिया सुचारू बनी रहे।
सचिवालय प्रशासन के अनुसार निर्माण कार्य पूरा होने के बाद मुख्यमंत्री कार्यालय को आधुनिक सुविधाओं से लैस नए भवन में शिफ्ट किया जाएगा। इस परियोजना का उद्देश्य प्रशासनिक कार्यप्रणाली को और अधिक प्रभावी और व्यवस्थित बनाना है।
फिलहाल निर्माण कार्य के दौरान सुरक्षा और कार्य संचालन को संतुलित रखने के लिए यह अस्थायी व्यवस्था की गई है। अधिकारियों का कहना है कि इस बदलाव से कामकाज पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ेगा और सभी जरूरी प्रशासनिक गतिविधियां सामान्य रूप से चलती रहेंगी।
इस पूरे बदलाव को सचिवालय के आधुनिकीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिससे भविष्य में मुख्यमंत्री कार्यालय को बेहतर संरचना और सुविधाएं मिल सकेंगी।