जोखिम भरे सफर को मजबूर लोग

Update: 2026-07-26 09:50 GMT

हिमाचल प्रदेश: लाहुल-स्पीति जिले में मौसम की मार ने एक बार फिर ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। मयाड़ घाटी के धोन्धल नाले में बादल फटने से वहां बना अस्थायी पुल बह गया, जिसके कारण स्थानीय लोगों को आवागमन में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। नाले में लगातार बढ़ रहे पानी के बहाव और बाढ़ जैसी स्थिति के बीच ग्रामीणों को मजबूरी में जान जोखिम में डालकर सफर करना पड़ रहा है।

जानकारी के अनुसार, धोन्धल नाले में रात के समय बादल फटने की घटना हुई, जिसके बाद तेज बहाव के कारण अस्थायी पुल पानी में बह गया। यह पुल ग्रामीणों के लिए मुख्य संपर्क मार्ग का हिस्सा था। पुल टूटने के बाद कुछ समय के लिए सड़क संपर्क भी प्रभावित हुआ, हालांकि लोक निर्माण विभाग ने मौके पर मशीनें लगाकर रास्ते को बहाल करने का प्रयास किया।

फिलहाल हालात पूरी तरह सामान्य नहीं हुए हैं। वाहन चालक और ग्रामीण नाले के बीच से होकर जोखिम उठाते हुए आवाजाही कर रहे हैं। प्रशासन ने समस्या को देखते हुए मौके पर मशीनें तैनात की हैं, ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत रास्ता खोला जा सके। इसके साथ ही लोगों की सुविधा के लिए एक झूला भी स्थापित किया गया है, जिससे पैदल आवाजाही में कुछ राहत मिल सके।

मयाड़ घाटी में यह समस्या नई नहीं है। स्थानीय लोगों के अनुसार, धोन्धल नाले में पिछले कई वर्षों के दौरान कई छोटे-बड़े पुल बाढ़ की भेंट चढ़ चुके हैं। लाहुल-स्पीति की विधायक अनुराधा राणा ने बताया कि इस नाले पर अब तक करीब आठ से दस बार पुल बह चुके हैं। हर बार अस्थायी व्यवस्था करके लोगों की आवाजाही शुरू की जाती है, लेकिन स्थायी समाधान नहीं हो पाया है।

विधायक अनुराधा राणा ने बताया कि इस साल जून महीने से ही घाटी के कई नालों में लगातार बाढ़ जैसी स्थिति बनी हुई है। भारी बारिश और बादल फटने की घटनाओं के कारण क्षेत्र में रहने वाले लोगों की परेशानी लगातार बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि वह खुद मौके पर जाकर स्थिति का जायजा ले रही हैं और प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्यों की निगरानी की जा रही है।

उन्होंने कहा कि धोन्धल नाले की समस्या के स्थायी समाधान के लिए सरकार ने बड़ा पुल बनाने की मंजूरी दे दी है। पुल निर्माण से जुड़ी कागजी प्रक्रिया पूरी की जा रही है और इसी साल इसके निर्माण कार्य को शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है। बड़े पुल के बनने के बाद हर साल बरसात के दौरान आने वाली समस्या से ग्रामीणों को काफी राहत मिलने की उम्मीद है।

लोक निर्माण विभाग भी लगातार क्षेत्र में काम कर रहा है, लेकिन बार-बार हो रही बादल फटने और बाढ़ की घटनाओं के कारण मरम्मत कार्य प्रभावित हो रहे हैं। विभाग के कर्मचारी दिन-रात मेहनत कर रास्तों को बहाल करने में जुटे हैं, लेकिन प्राकृतिक आपदाओं के कारण उनकी मेहनत कई बार फिर से प्रभावित हो जाती है।

मयाड़ घाटी के ग्रामीणों का कहना है कि लंबे समय से वह स्थायी पुल की मांग कर रहे हैं। बरसात के मौसम में नाले उफान पर आ जाते हैं और लोगों की जान खतरे में पड़ जाती है। खासकर मरीजों, बुजुर्गों और बच्चों को आवाजाही में सबसे ज्यादा परेशानी होती है।

प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि खराब मौसम के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचें और नालों को पार करते समय सावधानी बरतें। वहीं, स्थानीय लोग अब जल्द से जल्द स्थायी पुल निर्माण शुरू होने का इंतजार कर रहे हैं, ताकि हर साल आने वाली इस समस्या से उन्हें छुटकारा मिल सके।

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