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संदेह के आधार पर महिलाओं की पिटाई, पुलिस कार्रवाई में जुटी

हिमाचल प्रदेश: कांगड़ा जिले के नूरपुर क्षेत्र में चोरी के संदेह में पकड़ी गई महिलाओं के साथ मारपीट का मामला सामने आया है। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस ने साफ किया है कि किसी भी व्यक्ति को कानून हाथ में लेने और किसी पर हमला करने का अधिकार नहीं है।
जानकारी के अनुसार, यह घटना नूरपुर क्षेत्र के नागनी माता मंदिर के पास की बताई जा रही है। शनिवार शाम सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से प्रसारित हुआ, जिसमें कुछ लोग चोरी के शक में पकड़ी गई महिलाओं के साथ मारपीट करते नजर आ रहे हैं। वीडियो में महिलाओं की जूतों से पिटाई किए जाने का दावा किया जा रहा है। घटना सामने आने के बाद पुलिस प्रशासन हरकत में आया।
नूरपुर पुलिस ने वायरल वीडियो का संज्ञान लेते हुए तत्काल जांच शुरू की। पुलिस अधिकारियों ने वीडियो की सत्यता, घटना के समय और स्थान समेत इसमें शामिल लोगों की भूमिका की जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर पुलिस थाना नूरपुर में मामला दर्ज किया गया है।
एएसपी नूरपुर धर्म चंद वर्मा ने बताया कि मामले की गहन जांच की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि घटना वास्तव में कब हुई, इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे और मारपीट करने वालों की क्या भूमिका रही। उन्होंने कहा कि जांच के दौरान जो भी व्यक्ति दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस ने स्पष्ट किया है कि चोरी का आरोप लगने मात्र से किसी व्यक्ति को सजा देने या उसके साथ मारपीट करने का अधिकार किसी को नहीं है। किसी भी अपराध या संदिग्ध गतिविधि की जानकारी मिलने पर लोगों को पुलिस को सूचना देनी चाहिए और कानूनी प्रक्रिया का पालन करना चाहिए।
नूरपुर पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि वे कानून व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग करें और किसी भी स्थिति में कानून को अपने हाथ में न लें। पुलिस ने लोगों से यह भी कहा है कि सोशल मीडिया पर किसी भी अपुष्ट या भ्रामक जानकारी को साझा करने से बचें, क्योंकि इससे स्थिति बिगड़ सकती है।
पुलिस के अनुसार, मामले की जांच में वायरल वीडियो की भी बारीकी से जांच की जा रही है। वीडियो की प्रमाणिकता, उसमें दिखाई दे रहे लोगों की पहचान और घटना से जुड़े अन्य तथ्यों को जुटाया जा रहा है। पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति सामने आएगी।
इस घटना ने एक बार फिर भीड़ द्वारा कानून हाथ में लेने की प्रवृत्ति को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी व्यक्ति पर आरोप लगने के बाद उसे कानूनी प्रक्रिया से गुजरना चाहिए, न कि भीड़ द्वारा खुद फैसला सुनाया जाना चाहिए।
स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर किसी पर चोरी का शक था तो इसकी सूचना पुलिस को दी जानी चाहिए थी। मारपीट जैसी घटनाएं समाज में डर और असुरक्षा का माहौल पैदा करती हैं। प्रशासन भी लगातार लोगों से अपील करता रहा है कि किसी भी विवाद की स्थिति में पुलिस की मदद ली जाए।
फिलहाल नूरपुर पुलिस मामले की जांच में जुटी हुई है। पुलिस ने भरोसा दिलाया है कि दोषियों के खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई की जाएगी और किसी भी व्यक्ति को कानून व्यवस्था बिगाड़ने की अनुमति नहीं दी जाएगी।





