Himachal Pradesh.हिमाचल प्रदेश: Pangi की फॉरेस्ट नर्सरी में काम करने वाले मज़दूरों ने अपनी मेहनत के बावजूद वेतन न मिलने पर मलाल और नाराजगी जताई है। कर्मचारियों का कहना है कि कई महीनों से उन्हें मजदूरी नहीं मिली है, जिससे उनकी जीविका और पारिवारिक जरूरतें प्रभावित हो रही हैं।
मज़दूरों ने बताया कि नर्सरी में पौधारोपण, देखभाल और अन्य वन कार्य नियमित रूप से करते हैं। इसके बावजूद प्रशासन की ओर से मजदूरी का भुगतान समय पर नहीं हो रहा है। कई कर्मचारियों ने कहा कि वेतन की अनुपलब्धता के कारण उन्हें अपने रोज़मर्रा के खर्चों को पूरा करने में मुश्किल हो रही है।
कर्मचारियों ने स्थानीय प्रशासन और वन विभाग से अपील की है कि उन्हें उनकी मेहनत के अनुसार भुगतान तुरंत किया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि लंबे समय से वेतन न मिलने से उनके परिवार और जीवन स्तर पर नकारात्मक असर पड़ा है।
वन विभाग के सूत्रों का कहना है कि वेतन भुगतान प्रक्रिया में कुछ प्रशासनिक और वित्तीय अड़चनें थीं, जिन्हें जल्द ही दूर किया जा रहा है। उन्होंने आश्वासन दिया कि जल्द ही सभी कर्मचारियों को बकाया मजदूरी का भुगतान किया जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में कर्मचारियों की शिकायतों को गंभीरता से लेना और समय पर समाधान करना जरूरी है। लंबे समय तक वेतन न मिलने से कर्मचारियों का मनोबल गिरता है और काम की गुणवत्ता पर भी असर पड़ता है।
स्थानीय लोग भी मज़दूरों के पक्ष में हैं और उन्होंने प्रशासन से आग्रह किया है कि वेतन भुगतान की प्रक्रिया में तेजी लाए जाए। वन नर्सरी के कामकाज और विकास के लिए कर्मचारियों की मेहनत महत्वपूर्ण है, इसलिए उनकी संतुष्टि और सुरक्षा सुनिश्चित करना अनिवार्य है।
मज़दूरों ने कहा कि यदि जल्द भुगतान नहीं किया गया तो वे और भी गंभीर कदम उठाने पर विचार कर सकते हैं। उनका उद्देश्य केवल अपनी मेहनत का उचित भुगतान पाना है और काम की गुणवत्ता बनाए रखना है।
कुल मिलाकर, पांगी फॉरेस्ट नर्सरी के मज़दूरों का वेतन न मिलने का मामला स्थानीय प्रशासन और वन विभाग के लिए चुनौती बन गया है। कर्मचारियों की नाराजगी और मलाल यह दर्शाता है कि समय पर मजदूरी का भुगतान न केवल कर्मचारियों के जीवन स्तर के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि संस्थान के कामकाज और उत्पादन पर भी असर डालता है। उम्मीद की जा रही है कि प्रशासन इस मामले को जल्द हल करके मज़दूरों को उनका हक दिलाएगा।