हिमाचल प्रदेश

Tanda Medical College में डॉक्टर और नर्सों की कमी ने बढ़ाई चिंता

Payal
6 April 2026 1:45 PM IST
Tanda Medical College में डॉक्टर और नर्सों की कमी ने बढ़ाई चिंता
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Himachal Pradesh.हिमाचल प्रदेश: टांडा मेडिकल कॉलेज में स्टाफ की कमी को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है। अस्पताल और कॉलेज में डॉक्टर, नर्स और पैरामेडिकल स्टाफ की संख्या कम होने के कारण मरीजों को स्वास्थ्य सेवाओं में व्यवधान का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय अधिकारियों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यदि जल्द कदम नहीं उठाए गए तो मरीजों और शिक्षा दोनों ही क्षेत्र प्रभावित होंगे।
टांडा मेडिकल कॉलेज में भर्ती मरीजों की संख्या बढ़ रही है, लेकिन पर्याप्त डॉक्टर और नर्स की अनुपस्थिति के कारण समय पर इलाज सुनिश्चित करना मुश्किल हो रहा है। इसके अलावा, मेडिकल छात्रों को प्रशिक्षण देने वाले फैकल्टी की कमी से शिक्षा गुणवत्ता पर भी असर पड़ रहा है। छात्रों को क्लिनिकल अनुभव प्राप्त करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों के अनुसार, स्टाफ की कमी का मुख्य कारण नियुक्तियों में देरी और बजट आवंटन की बाधाएं हैं। कई पद लंबे समय से खाली हैं और भर्ती प्रक्रिया धीमी गति से चल रही है। नतीजतन, जो स्टाफ है उसे अतिरिक्त कार्यभार संभालना पड़ रहा है, जिससे थकान और मानसिक दबाव बढ़ गया है।
मरीजों और उनके परिजनों ने भी स्टाफ कमी को लेकर नाराजगी व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि कई बार डॉक्टरों और नर्सों की अनुपस्थिति के कारण इलाज में देरी होती है। आपातकालीन सेवाओं में भी स्टाफ की कमी का असर देखा जा रहा है, जिससे समय पर गंभीर मरीजों को सहायता मिलना मुश्किल हो जाता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में स्टाफ की कमी केवल भर्ती प्रक्रिया पूरी करवा कर ही दूर की जा सकती है। इसके अलावा, मौजूदा स्टाफ के लिए उचित प्रशिक्षण और प्रोत्साहन भी जरूरी है ताकि उनकी कार्य क्षमता और सेवा गुणवत्ता बनी रहे।
राज्य सरकार ने स्टाफ की कमी को लेकर आश्वासन दिया है कि जल्द ही खाली पदों पर भर्ती प्रक्रिया पूरी की जाएगी। उन्होंने कहा कि टांडा मेडिकल कॉलेज और अस्पताल की सेवाओं में सुधार के लिए विशेष पहल की जा रही है। भर्ती के साथ-साथ अतिरिक्त नर्स और तकनीकी स्टाफ की नियुक्ति भी की जाएगी।
कुल मिलाकर, टांडा मेडिकल कॉलेज में स्टाफ की कमी से मरीजों और छात्रों दोनों की परेशानियां बढ़ रही हैं। यदि जल्द कदम उठाए गए, तो स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और शिक्षा प्रणाली दोनों में सुधार संभव है। स्थानीय प्रशासन और राज्य सरकार की सक्रिय भूमिका ही इस समस्या का समाधान कर सकती है। इस दिशा में तेजी से कदम उठाने की उम्मीद है।
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