Himachal में फिर सक्रिय होगा मानसून, छह दिन तक बारिश का अलर्ट

Update: 2026-07-25 08:08 GMT

शिमला : हिमाचल प्रदेश में मानसून एक बार फिर अपना रौद्र रूप दिखाने की तैयारी में है। मौसम विज्ञान केंद्र शिमला ने राज्य के अधिकांश हिस्सों में अगले छह दिनों तक बारिश जारी रहने का पूर्वानुमान जारी किया है। मौसम विभाग के अनुसार, 28 और 29 जुलाई को प्रदेश के कई जिलों में भारी से बहुत भारी वर्षा होने की संभावना है।

लगातार बारिश के कारण पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन, अचानक बाढ़, सड़कें बाधित होने और अन्य प्राकृतिक आपदाओं का खतरा बढ़ सकता है। प्रशासन को सतर्क रहने की सलाह दी गई है, वहीं लोगों से भी मौसम को देखते हुए सावधानी बरतने की अपील की गई है।

कई जिलों में भारी बारिश की संभावना

मौसम विज्ञान केंद्र शिमला के अनुसार, मानसून की सक्रियता के चलते प्रदेश के अधिकांश क्षेत्रों में बारिश का दौर जारी रहेगा। आने वाले दिनों में कई स्थानों पर तेज बारिश हो सकती है।

विशेष रूप से 28 और 29 जुलाई को भारी से बहुत भारी वर्षा की संभावना जताई गई है। इस दौरान निचले और मध्य पर्वतीय क्षेत्रों के साथ-साथ कुछ ऊंचाई वाले इलाकों में भी मौसम खराब रहने का अनुमान है।

मौसम विभाग ने लोगों को नदी-नालों के आसपास जाने से बचने और अनावश्यक यात्रा से परहेज करने की सलाह दी है।

भूस्खलन और सड़क बाधित होने का खतरा

हिमाचल प्रदेश जैसे पहाड़ी राज्य में लगातार बारिश के दौरान भूस्खलन की घटनाएं बढ़ जाती हैं। बारिश के कारण पहाड़ों से मलबा गिरने और सड़कें बंद होने की संभावना बनी रहती है।

राज्य में कई बार भारी बारिश के कारण यातायात व्यवस्था प्रभावित होती है। सड़कों पर मलबा आने से कई मार्ग बंद हो जाते हैं, जिससे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।

प्रशासन और संबंधित विभागों को किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं।

अचानक बाढ़ का भी मंडराया खतरा

मौसम विभाग ने भारी बारिश के दौरान अचानक बाढ़ की स्थिति को लेकर भी चेतावनी जारी की है। पहाड़ी इलाकों में कम समय में अधिक बारिश होने पर छोटे नदी-नालों का जलस्तर तेजी से बढ़ सकता है।

ऐसी स्थिति में निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत होती है। प्रशासन की ओर से संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी बढ़ाने की तैयारी की जा रही है।

मानसून के कारण पहले भी बढ़ी थीं मुश्किलें

हिमाचल प्रदेश में मानसून के दौरान हर साल प्राकृतिक चुनौतियां सामने आती हैं। पिछले वर्षों में भारी बारिश के कारण कई इलाकों में भूस्खलन, बादल फटने और बाढ़ जैसी घटनाएं दर्ज की गई हैं।

इन घटनाओं से जान-माल के नुकसान के साथ-साथ सड़क, बिजली और पेयजल जैसी मूलभूत सेवाएं भी प्रभावित होती हैं। ऐसे में मौसम विभाग की चेतावनी के बाद प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं।

प्रशासन ने बढ़ाई सतर्कता

मौसम विभाग के पूर्वानुमान को देखते हुए जिला प्रशासन और आपदा प्रबंधन से जुड़े विभागों को अलर्ट पर रखा गया है। संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ाने और आपात स्थिति में तुरंत राहत कार्य शुरू करने की तैयारी की जा रही है।

अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि वे मौसम संबंधी चेतावनियों को गंभीरता से लें और जोखिम वाले क्षेत्रों में जाने से बचें।

पर्यटकों को भी सावधानी बरतने की सलाह

हिमाचल प्रदेश में मानसून के दौरान बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंचते हैं। ऐसे में प्रशासन ने पर्यटकों से भी अपील की है कि वे मौसम की स्थिति देखकर ही यात्रा की योजना बनाएं।

पहाड़ी रास्तों, झरनों, नदियों और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। तेज बारिश के दौरान पर्यटन स्थलों पर जाना खतरनाक साबित हो सकता है।

किसानों के लिए भी महत्वपूर्ण समय

बारिश जहां एक ओर किसानों के लिए राहत लेकर आती है, वहीं अत्यधिक वर्षा फसलों को नुकसान भी पहुंचा सकती है। कृषि विभाग ने किसानों को मौसम की स्थिति के अनुसार आवश्यक कदम उठाने की सलाह दी है।

मौसम विभाग के अनुसार, मानसून की सक्रियता आने वाले दिनों में बनी रह सकती है। ऐसे में लोगों को सतर्क रहने और प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की जरूरत है।

फिलहाल हिमाचल प्रदेश में बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है। 28 और 29 जुलाई को भारी वर्षा की चेतावनी के बीच प्रशासन ने किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयारियां तेज कर दी हैं।

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