Mandi: डेयरी किसानों की चिंताओं को लेकर जोरदार प्रदर्शन

Update: 2026-04-06 07:15 GMT
Himachal Pradesh.हिमाचल प्रदेश: Mandi में डेयरी किसानों ने प्रशासन और संबंधित विभागों से पेमेंट पक्के करने और डेयरी पॉलिसी को स्पष्ट करने की मांग की है। किसानों का कहना है कि दूध और डेयरी उत्पादों की बिक्री के बाद समय पर भुगतान न मिलने और नीति के अस्पष्ट पहलुओं के कारण उन्हें आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। किसानों ने बताया कि पिछले कई महीनों से उनके उत्पादों का भुगतान लंबित है, जिससे छोटे और मझोले डेयरी फार्मर आर्थिक संकट में हैं। उन्होंने प्रशासन से आग्रह किया कि भुगतान प्रक्रिया को पारदर्शी और समयबद्ध बनाया जाए। इसके साथ ही, वे चाहते हैं कि डेयरी पॉलिसी में सभी नियम स्पष्ट रूप से तय किए जाएं ताकि किसी भी तरह का विवाद या असमंजस उत्पन्न न हो।
इस मौके पर किसानों ने कहा कि राज्य में डेयरी उद्योग ग्रामीण अर्थव्यवस्था का अहम हिस्सा है और इसे सुचारू रूप से चलाने के लिए नीति और पेमेंट दोनों पारदर्शी होने चाहिए। उनका कहना है कि यदि समय पर भुगतान और स्पष्ट नीति नहीं होगी, तो इससे न केवल डेयरी फार्मिंग प्रभावित होगी, बल्कि ग्रामीण युवाओं की आय और रोजगार पर भी असर पड़ेगा। स्थानीय अधिकारियों के अनुसार, प्रशासन किसानों की मांगों पर गंभीरता से विचार कर रहा है। विभाग ने कहा कि जल्द ही पेमेंट के लिए त्वरित व्यवस्था की जाएगी और डेयरी पॉलिसी को सभी हितधारकों के लिए स्पष्ट करने के प्रयास किए जा रहे हैं। अधिकारी यह भी बता रहे हैं कि किसानों की समस्याओं को सुनने और उनका समाधान करने के लिए विशेष बैठकें आयोजित की जाएंगी। विशेषज्ञों का मानना है कि छोटे डेयरी फार्मर्स की आर्थिक सुरक्षा के लिए समय पर भुगतान और नीति में पारदर्शिता बेहद जरूरी है।
इससे किसानों का मनोबल बढ़ता है और उत्पादन में सुधार होता है। हिमाचल प्रदेश में डेयरी उद्योग न केवल स्थानीय दूध की आपूर्ति को सुनिश्चित करता है, बल्कि राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था में भी महत्वपूर्ण योगदान देता है। किसानों ने प्रशासन से आग्रह किया कि केवल घोषणाओं और बैठकों तक सीमित न रहें, बल्कि त्वरित कार्रवाई करके उनकी वास्तविक समस्याओं का समाधान किया जाए। उनका कहना है कि यदि तुरंत समाधान नहीं हुआ, तो बड़े पैमाने पर आंदोलन की संभावना बन सकती है। मंडी में डेयरी किसानों की यह मांग प्रशासन और नीति निर्धारकों के लिए एक चेतावनी भी है कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था और किसान हितों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। आगामी समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन उनकी मांगों पर कितनी तेजी से और प्रभावी रूप से कार्रवाई करता है, ताकि डेयरी उद्योग सुचारू रूप से चलता रहे और किसान आर्थिक रूप से सुरक्षित महसूस करें।
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