श्रद्धालुओं के लिए 30 जुलाई से खुलेगा किन्नौर कैलाश मार्ग

Update: 2026-07-25 12:50 GMT

रिकांगपिओ। हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले में स्थित पवित्र किन्नौर कैलाश यात्रा 2026 की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। देवभूमि किन्नौर के पंच कैलाशों में शामिल किन्नौर कैलाश यात्रा का शुभारंभ 30 जुलाई से होगा। जिला प्रशासन ने यात्रा को लेकर तैयारियों की समीक्षा कर ली है और श्रद्धालुओं की सुविधा व सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कई महत्वपूर्ण व्यवस्थाएं तय की हैं।

प्रशासन के अनुसार, किन्नौर कैलाश यात्रा 30 जुलाई से 10 अगस्त 2026 तक आयोजित की जाएगी। हालांकि, यात्रा की अवधि पूरी तरह मौसम की स्थिति पर निर्भर करेगी। अगर खराब मौसम या किसी अन्य आपात स्थिति की वजह से जरूरत पड़ी तो यात्रा की अवधि में बदलाव किया जा सकता है।

किन्नौर कैलाश यात्रा धार्मिक आस्था के साथ-साथ रोमांच से भी जुड़ी हुई है। इस यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं को करीब 19 किलोमीटर लंबे पैदल मार्ग से होकर गुजरना पड़ता है। किन्नौर कैलाश में स्थित 72 फीट ऊंचे शिवलिंग के दर्शन के लिए हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। कठिन पहाड़ी रास्तों के बावजूद लोगों में इस यात्रा को लेकर काफी उत्साह रहता है।

यात्रा की तैयारियों को लेकर एसडीएम कल्पा और किन्नौर कैलाश यात्रा आयोजन समिति के अध्यक्ष पदम भारद्वाज की अध्यक्षता में बैठक आयोजित की गई। बैठक में वन विभाग, पुलिस, स्वास्थ्य विभाग, होमगार्ड, जल शक्ति विभाग, राजस्व विभाग सहित कई संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे। इस दौरान यात्रा मार्ग की सुरक्षा, श्रद्धालुओं की सुविधा और आपदा प्रबंधन को लेकर विस्तार से चर्चा की गई।

प्रशासन ने बताया कि यात्रा मार्ग की स्थिति की जांच के लिए पहले रैकी कराई गई थी। शुरुआती जांच के दौरान कुछ स्थानों पर भूस्खलन और पत्थर गिरने का खतरा सामने आया था। इसके बाद सुरक्षा कारणों को देखते हुए 28 जून को यात्रा को अस्थायी रूप से स्थगित कर दिया गया था।

इसके बाद 10 जुलाई को दोबारा रैकी टीम को भेजा गया। टीम ने 16 जुलाई को अपनी रिपोर्ट प्रशासन को सौंपी। रिपोर्ट के आधार पर संवेदनशील स्थानों पर सुरक्षा इंतजाम और जरूरी मरम्मत कार्य किए जा रहे हैं। इन तैयारियों के बाद प्रशासन ने यात्रा शुरू करने का निर्णय लिया है।

किन्नौर कैलाश यात्रा में शामिल होने वाले श्रद्धालुओं के लिए ऑनलाइन पंजीकरण की प्रक्रिया 28 जुलाई से शुरू होगी। वहीं, ऑफलाइन पंजीकरण 30 जुलाई से किया जाएगा। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि बिना पंजीकरण किसी भी श्रद्धालु को यात्रा की अनुमति नहीं दी जाएगी।

इस वर्ष यात्रा में प्रतिदिन अधिकतम 375 श्रद्धालुओं को जाने की अनुमति दी जाएगी। इसमें 175 श्रद्धालुओं के लिए ऑनलाइन स्लॉट, 125 श्रद्धालुओं के लिए ऑफलाइन स्लॉट और 75 स्लॉट एडवेंचर टूर ऑपरेटर्स एसोसिएशन किन्नौर के माध्यम से निर्धारित किए गए हैं।

प्रशासन ने यात्रा मार्ग को भी तय कर दिया है। इस बार यात्रा केवल तंगलिंग-मेलिंग खाता-गुफा मार्ग से संचालित होगी। श्रद्धालुओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए मार्ग पर पुलिस, होमगार्ड, वन कर्मियों और अन्य कर्मचारियों की तैनाती की जाएगी।

यात्रा के दौरान स्वास्थ्य सुविधाओं का भी विशेष ध्यान रखा जाएगा। विभिन्न पड़ावों पर डॉक्टर, फार्मासिस्ट और स्वास्थ्य कर्मियों की तैनाती की जाएगी। इसके अलावा पेयजल, यातायात व्यवस्था, कानून-व्यवस्था और आपदा प्रबंधन के लिए संबंधित विभागों को जिम्मेदारी सौंपी गई है।

प्रशासन का कहना है कि किन्नौर कैलाश यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता रहेगी। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए यात्रियों से भी अपील की गई है कि वे मौसम और प्रशासन के दिशा-निर्देशों का पालन करें।

किन्नौर कैलाश यात्रा हिमाचल प्रदेश की प्रमुख धार्मिक यात्राओं में से एक मानी जाती है। हर साल देशभर से श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शन और आस्था के लिए यहां पहुंचते हैं। इस बार भी प्रशासन ने बेहतर व्यवस्था के साथ यात्रा को सफल बनाने की तैयारी की है।

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