शिमला। सेब सीजन के बीच खरीददार कंपनियों में बढ़ती प्रतिस्पर्धा का फायदा अब सीधे बागवानों को मिलता दिखाई दे रहा है। कंपनियों ने एक ही दिन में सेब के खरीद रेट में करीब पांच रुपये प्रति किलो तक की बढ़ोतरी कर दी है। अचानक कीमतों में आए इस उछाल से सेब उत्पादकों में उत्साह है और उन्हें उम्मीद है कि आने वाले दिनों में कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा और बढ़ने पर खरीद रेट में और सुधार देखने को मिल सकता है।

ताजा खरीद दरों के अनुसार अडानी ने सेब के लिए 108 रुपये प्रति किलो का रेट जारी किया है। वहीं देवभूमि ने 113 रुपये प्रति किलो और नीचे चेस्ट ने 110 रुपये प्रति किलो की दर घोषित की है। इसके अलावा दो अन्य छोटी कंपनियों ने भी करीब 112 रुपये प्रति किलो के आसपास सेब खरीदने की पेशकश की है।

अलग-अलग कंपनियों की ओर से खरीद रेट बढ़ाए जाने के बाद सेब बाजार में प्रतिस्पर्धा तेज हो गई है। सीजन के दौरान कंपनियों को अच्छी गुणवत्ता वाले सेब की जरूरत होती है और खरीद सुनिश्चित करने के लिए वे समय-समय पर अपनी दरों में बदलाव करती हैं। एक ही दिन में करीब पांच रुपये प्रति किलो तक की बढ़ोतरी को बागवानों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

सेब उत्पादकों के लिए प्रति किलो कुछ रुपये की बढ़ोतरी भी कुल आमदनी में बड़ा अंतर पैदा कर सकती है। बड़े बागवानों के पास हजारों किलो सेब की फसल होती है। ऐसे में पांच रुपये प्रति किलो की अतिरिक्त कीमत मिलने पर कुल बिक्री से होने वाली आय में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है। यही वजह है कि खरीद रेट में हुए ताजा बदलाव पर बागवानों की नजर बनी हुई है।

बागवानों को उम्मीद है कि कंपनियों के बीच खरीद को लेकर प्रतिस्पर्धा जारी रहने से उन्हें अपनी फसल के लिए बेहतर विकल्प मिलेंगे। यदि एक कंपनी अधिक कीमत घोषित करती है तो दूसरी कंपनियों पर भी अपने खरीद रेट में संशोधन करने का दबाव बढ़ सकता है। इससे बाजार में किसानों की सौदेबाजी की स्थिति मजबूत होने की संभावना है।

सीजन के शुरुआती और मध्य चरण में सेब की गुणवत्ता, उपलब्धता और बाजार की मांग के आधार पर कीमतों में बदलाव होता रहता है। इस बार खरीददार कंपनियों की सक्रियता के कारण बागवानों को बेहतर कीमत मिलने की उम्मीद बढ़ी है। खास तौर पर अच्छी गुणवत्ता और निर्धारित मानकों पर खरे उतरने वाले सेब के लिए कंपनियां अधिक रेट देने को तैयार दिखाई दे रही हैं।

देवभूमि की ओर से 113 रुपये प्रति किलो का रेट घोषित किए जाने के बाद यह प्रमुख कंपनियों में ऊंची खरीद दरों में शामिल हो गया है। वहीं अडानी ने 108 रुपये और नीचे चेस्ट ने 110 रुपये प्रति किलो का भाव जारी किया है। छोटी कंपनियों की ओर से करीब 112 रुपये प्रति किलो का रेट घोषित करना भी बाजार में बढ़ती प्रतिस्पर्धा का संकेत माना जा रहा है।

बागवानों के लिए यह स्थिति इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि सेब उत्पादन में लागत लगातार एक प्रमुख मुद्दा बनी रहती है। बगीचों की देखभाल, खाद, दवाइयां, मजदूरी, पैकिंग और परिवहन सहित कई मदों पर उत्पादकों को खर्च करना पड़ता है। ऐसे में बेहतर खरीद मूल्य मिलने से बढ़ी हुई उत्पादन लागत की भरपाई में मदद मिल सकती है।

सेब की फसल को बाजार तक पहुंचाने में भी बागवानों को कई तरह के खर्च उठाने पड़ते हैं। यदि कंपनियां सीधे खरीद के दौरान प्रतिस्पर्धी कीमत देती हैं तो किसानों के पास अपनी उपज बेचने के ज्यादा विकल्प उपलब्ध होते हैं। इससे उन्हें यह तय करने में आसानी होती है कि किस खरीददार को फसल बेचने पर बेहतर लाभ मिलेगा।

कंपनियों के बीच यह प्रतिस्पर्धा आने वाले दिनों में किस दिशा में जाती है, इस पर सेब उत्पादकों की निगाहें टिकी हुई हैं। यदि बाजार में सेब की मांग मजबूत बनी रहती है और कंपनियों को खरीद लक्ष्य पूरा करने के लिए अधिक माल की जरूरत पड़ती है तो रेट में आगे भी बदलाव संभव है।

फिलहाल बागवान जल्दबाजी में फैसला लेने के बजाय अलग-अलग कंपनियों की खरीद दरों की तुलना कर सकते हैं। गुणवत्ता और श्रेणी के आधार पर वास्तविक खरीद मूल्य में अंतर हो सकता है। इसलिए घोषित दर के साथ कंपनियों की खरीद शर्तें भी किसानों के लिए महत्वपूर्ण रहेंगी।

सेब उत्पादकों के लिए सीजन का यह दौर आमदनी के लिहाज से बेहद अहम होता है। पूरे वर्ष बगीचों में मेहनत करने के बाद फसल की बिक्री से ही उनकी आय तय होती है। ऐसे में बाजार में कीमतों का ऊपर जाना बागवानों के लिए राहत की खबर है।

कंपनियों द्वारा एक ही दिन में खरीद रेट में करीब पांच रुपये प्रति किलो तक की बढ़ोतरी से बाजार में सकारात्मक संकेत मिले हैं। अब बागवानों को उम्मीद है कि प्रतिस्पर्धा बढ़ने से कीमतों में और सुधार होगा। हालांकि आगे की दरें बाजार की मांग, फसल की उपलब्धता और गुणवत्ता जैसे कारकों पर निर्भर करेंगी।

फिलहाल देवभूमि के 113 रुपये, छोटी कंपनियों के करीब 112 रुपये, नीचे चेस्ट के 110 रुपये और अडानी के 108 रुपये प्रति किलो के घोषित रेट ने सेब खरीद बाजार को सक्रिय कर दिया है। आने वाले दिनों में यदि कंपनियां एक-दूसरे से बेहतर कीमत देने की कोशिश करती हैं तो इसका सबसे बड़ा फायदा बागवानों को मिल सकता है।

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