Himachal Pradesh.हिमाचल प्रदेश: हिमालयी राष्ट्रीय उद्यान के संरक्षण और पर्यावरणीय सुरक्षा को मजबूत करने के लिए ‘ग्रीन शील्ड’ योजना प्रस्तावित की गई है। यह पहल वन विभाग और पर्यावरण संरक्षण एजेंसियों द्वारा तैयार की गई है, जिसका उद्देश्य पार्क के प्राकृतिक संसाधनों, जैव विविधता और वन्यजीवों की सुरक्षा को सुनिश्चित करना है।
वन और पर्यावरण अधिकारियों ने बताया कि ‘ग्रीन शील्ड’ का मतलब है राष्ट्रीय उद्यान के चारों ओर पर्यावरणीय सुरक्षा की एक मजबूत परत तैयार करना। इसमें वृक्षारोपण, जैविक बाड़, निगरानी उपकरण और सामुदायिक सहभागिता के माध्यम से पार्क के क्षेत्र को प्रदूषण, शिकार और अवैध गतिविधियों से सुरक्षित किया जाएगा। प्रस्तावित योजना के तहत आसपास के गाँवों और स्थानीय समुदायों को भी पर्यावरण संरक्षण में सक्रिय भागीदार बनाया जाएगा।
अधिकारियों ने कहा कि हिमालयी राष्ट्रीय उद्यान में कई दुर्लभ और संकटग्रस्त प्रजातियों के जीवन का संरक्षण करना प्राथमिकता है। ‘ग्रीन शील्ड’ से वन्यजीवों के आवास को सुरक्षित करने के साथ-साथ पर्यटकों और स्थानीय निवासियों के लिए भी सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित किया जाएगा। इसमें आधुनिक तकनीक जैसे सेंसर कैमरे, ड्रोन निगरानी और इलेक्ट्रॉनिक फेंसिंग का उपयोग शामिल है।
स्थानीय समुदाय के लिए भी यह योजना लाभकारी साबित होगी। योजना के अंतर्गत वृक्षारोपण, जैविक कृषि और संरक्षण से जुड़ी गतिविधियों में स्थानीय लोगों को रोजगार और प्रशिक्षण दिया जाएगा। अधिकारी उम्मीद कर रहे हैं कि इससे वन्यजीवों और मानव समुदाय के बीच संतुलन बनाए रखने में मदद मिलेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि हिमालयी राष्ट्रीय उद्यान जैसी संवेदनशील क्षेत्र में पर्यावरणीय सुरक्षा योजनाओं का कार्यान्वयन समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि ‘ग्रीन शील्ड’ जैसी पहल से जैव विविधता की रक्षा, प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण और जल संरक्षण में भी मदद मिलेगी।
वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि प्रस्तावित योजना पर जल्द ही मंत्रिमंडल की मंजूरी ली जाएगी और इसके बाद इसे चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। उन्होंने कहा, "हम चाहते हैं कि हिमालयी राष्ट्रीय उद्यान न केवल पर्यावरणीय दृष्टि से सुरक्षित रहे, बल्कि यह क्षेत्र पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए भी लाभकारी बने।"