Himachal Pradesh: चंद्रा नदी को ब्यास नदी में मिलाने की अटकलें तेज

Update: 2025-05-07 03:55 GMT
Himachal Pradesh : सिंधु जल संधि को स्थगित करने के बाद केंद्र सरकार ने पाकिस्तान जाने वाली नदियों का पानी रोकने की कवायद शुरू कर दी है। लाहौल से गुजरने वाली चंद्रभागा नदी भी सिंधु नदी में मिलकर पाकिस्तान जाती है। ऐसे में नदी का पानी पाकिस्तान न जाए, इसके लिए चंद्रा नदी को ब्यास नदी में मोड़ने की अटकलें तेज हो गई हैं। कुल्लू से लेकर लाहौल तक इसको लेकर चर्चाएं हैं। विशेषज्ञों का मानना ​​है कि आधुनिक तकनीक के दौर में नदी की धारा मोड़ना कोई बड़ी चुनौती नहीं है।
जनजातीय जिला लाहौल-स्पीति के कुंजम दर्रे से गुजरने वाले ट्रैक पर 14 हजार फीट ऊंची चंद्रताल झील से निकलने वाली चंद्रा नदी को मोड़कर ब्यास में लाने के कयास लगाए जा रहे हैं। इस योजना से चिनाब नदी का पानी 40 से 50 फीसदी तक कम हो जाएगा। इसे जम्मू-कश्मीर में स्थित बांधों में रोकना आसान होगा। जिला कुल्लू से लेकर लाहौल तक के लोगों का कहना है कि चंद्रा नदी को आसानी से ब्यास में मिलाकर पाकिस्तान को झटका दिया जा सकता है। टनल बोरिंग मशीन (टीबीएम) की मदद से इस योजना को धरातल पर उतारा जा सकता है।
60 के दशक में ब्यास नदी की धारा को मोड़कर सलापड़ में सतलुज नदी में मिला दिया गया था। आज टनल बोरिंग मशीन (टीबीएम) जैसी तकनीक है। इससे चंद्रा नदी की धारा को सुरंग के जरिए आसानी से मोड़ा जा सकता है। आधुनिकता के दौर में ऐसे काम आसानी से किए जा सकते हैं। - बीएस राणा, सेवानिवृत्त मुख्य वन अधिकारी, वन विभाग।
चंद्रा नदी का पानी ब्यास तक लाना कोई बड़ी चुनौती नहीं है। चंद्रा नदी का पानी ब्यास तक लाया जा सकता है। इस योजना से चिनाब का जलस्तर भी आधा रह जाएगा। आधुनिक तकनीक की दुनिया में यह मुश्किल नहीं है। - देवेश शर्मा, सेवानिवृत्त अधीक्षण अभियंता, जल शक्ति विभाग।सिंधु जल संधि स्थगित होने से पाकिस्तान को पानी नहीं भेजा जा सकेगा। चंद्रा नदी को ब्यास में मिलाने की इस योजना पर विचार किया जा सकता है।
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