Himachal : नगर पार्षदों की अयोग्यता मामलों की जांच का अधिकार अब डिविजनल कमिश्नरों को
Himachal हिमाचल : हिमाचल प्रदेश सरकार ने नगर निगमों में सरपंचों की अयोग्यता से जुड़े मामलों की जांच और फैसला लेने की प्रक्रिया में बड़ा एडमिनिस्ट्रेशन बदलाव किया है। अब शिमला, कांगड़ा और मंडी के डिविजनल कमिश्नर इन मामलों की सुनवाई और फैसला करेंगे।
हिमाचल प्रदेश सरकार के शहरी विकास विभाग द्वारा जारी अधिसूचना में यह बदलाव हिमाचल प्रदेश नगर निगम अधिनियम, 1994 की धारा 8(5) के तहत किया गया है। इसके तहत अब तक यह अधिकार शहरी विकास विभाग के डायरेक्टर के पास था, जो ऐसे मामलों में आदेश जारी करते थे।
नए आदेश के बाद डिविजनल कमिश्नर अयोग्यता मामलों की जांच, सुनवाई और अंतिम फैसला लेने के लिए अधिकृत होंगे। यह व्यवस्था शिमला, कांगड़ा और मंडी डिविजन में लागू होगी।
यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब हाल ही में सोलन, पालमपुर, मंडी और धर्मशाला नगर निगमों में मेयर चुनाव संपन्न हुए हैं। सोलन नगर निगम को लेकर यह फैसला विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जहां राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं।
17 सदस्यों वाले सोलन नगर निगम सदन में भारतीय जनता पार्टी ने 10 सीटें, कांग्रेस ने 6 सीटें और एक सीट वैलेंटाइन उम्मीदवार ने जीती है। अब कांग्रेस मेयर और डिप्टी मेयर पद पर अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश में लगी हुई है।
सूत्रों के अनुसार, दो भाजपा महापौरों के खिलाफ अयोग्यता से जुड़े मामलों की जांच की संभावना पहुंच रही है। यदि इन मामलों में कार्रवाई होती है तो नगर निगम के भीतर शक्ति संतुलन बदल सकता है।
शहरी विकास विभाग के इस फैसले को प्रशासनिक दृष्टि से अधिकारों के विकेंद्रीकरण के रूप में देखा जा रहा है, लेकिन राजनीतिक स्तर पर इसके कई नतीजे भी निकाले जा रहे हैं।