Himachal : बागवानी विभाग में 450 नए पदों को मंजूरी, किसानों को मिलेगा तकनीकी सहयोग

Update: 2026-06-23 05:51 GMT

Himachal हिमाचल : हिमाचल प्रदेश में बागवानी क्षेत्र को मजबूत करने के लिए राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने बागवानी विभाग में कुल 450 पदों के सृजन और भर्ती को मंजूरी प्रदान कर दी है। इन पदों के जरिए राज्य के बागवानों को जमीनी स्तर पर बेहतर तकनीकी सहायता उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है।

स्वीकृत पदों में 50 बागवानी विकास अधिकारी, 100 बागवानी विस्तार अधिकारी और 300 मल्टी टास्क वर्कर शामिल हैं। इन पदों को अंतिम मंजूरी के लिए आगामी मंत्रिमंडल बैठक में रखा जाएगा, जिसके बाद भर्ती प्रक्रिया शुरू होने की संभावना है।

मुख्यमंत्री ने सोमवार शाम को बागवानी विभाग, एचपी शिवा परियोजना और जनजातीय विकास विभाग की विस्तृत समीक्षा बैठक की। यह बैठक पहले सुबह आयोजित की जानी थी, लेकिन बाद में इसे शाम 5:30 बजे आयोजित किया गया।

बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने विभागीय योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की और एचपी शिवा परियोजना के तहत चल रहे कार्यों की स्थिति का आकलन किया। इसके साथ ही उन्होंने जनजातीय क्षेत्रों में चल रही विकास गतिविधियों की भी समीक्षा की।

सरकार का मानना है कि नए पदों के सृजन से बागवानी क्षेत्र में तकनीकी सेवाओं की पहुंच और प्रभावशीलता बढ़ेगी। इससे बागवानों को आधुनिक तकनीक, रोग नियंत्रण, पौध प्रबंधन और फसल विविधीकरण जैसी सुविधाएं समय पर उपलब्ध हो सकेंगी।

पिछले कुछ समय से विभाग में फील्ड स्टाफ की कमी के कारण बागवानों तक जरूरी तकनीकी जानकारी और सहायता समय पर नहीं पहुंच पा रही थी, जिससे उत्पादन और गुणवत्ता पर भी असर पड़ रहा था। अब इन पदों की भर्ती से इस समस्या के समाधान की उम्मीद जताई जा रही है।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि योजनाओं के क्रियान्वयन में किसी भी तरह की देरी न हो और बागवानी क्षेत्र को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं।

एचपी शिवा परियोजना को राज्य में बागवानी विकास की एक महत्वपूर्ण योजना माना जा रहा है, जिसके तहत किसानों की आय बढ़ाने और उत्पादन क्षमता में सुधार पर जोर दिया जा रहा है। समीक्षा बैठक में इस परियोजना की प्रगति पर विशेष चर्चा हुई।

सरकार का लक्ष्य है कि हिमाचल प्रदेश को बागवानी क्षेत्र में और अधिक आत्मनिर्भर बनाया जाए और किसानों को तकनीकी रूप से सशक्त किया जाए।

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