शिमला/चंबा। हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले के बैरागढ़ में चालुंज मोड़ के पास हुए दर्दनाक बस हादसे में सात लोगों की मौत और 11 लोगों के घायल होने की घटना पर राज्यपाल कविंदर गुप्ता और मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने गहरा शोक व्यक्त किया है। शनिवार को हुए इस हादसे ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया। हादसे की सूचना मिलने के बाद प्रशासन और राहत एजेंसियां सक्रिय हुईं और घायलों को आवश्यक चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने की प्रक्रिया शुरू की गई।
राज्यपाल कविंदर गुप्ता ने दुर्घटना में जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त की। उन्होंने दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना की और शोक संतप्त परिवारों को इस अपूरणीय क्षति को सहन करने की शक्ति देने की कामना की।
राज्यपाल ने हादसे में घायल हुए लोगों के स्वास्थ्य को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करते हुए संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि घायलों को हर संभव सहायता उपलब्ध कराई जाए और उनके इलाज में किसी तरह की कमी न रहने दी जाए।
मुख्यमंत्री ने भी जताया शोक
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने भी चंबा बस हादसे में हुई जनहानि पर दुख व्यक्त किया। उन्होंने हादसे में जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों के प्रति संवेदना जताई और घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना की।
मुख्यमंत्री ने प्रशासन को निर्देश दिया कि दुर्घटना में घायल सभी लोगों को तत्काल और बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने राहत और बचाव कार्य में तेजी बनाए रखने तथा प्रभावित परिवारों को आवश्यक सहयोग प्रदान करने पर भी जोर दिया।
सरकार की ओर से हादसे के बाद स्थानीय प्रशासन को स्थिति पर लगातार नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं। घायलों के उपचार और परिजनों को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने के लिए संबंधित विभागों को सक्रिय किया गया है।
बैरागढ़-तिस्सा रोड पर हुआ हादसा
जानकारी के अनुसार, शनिवार सुबह चुराह सब-डिविजन के बैरागढ़ क्षेत्र में चालुंज मोड़ के पास एक निजी बस सड़क से फिसलकर करीब 100 फीट नीचे दूसरी सड़क पर जा गिरी। बस बैरागढ़ से चंबा की ओर जा रही थी। हादसा सुबह करीब 7.15 बजे बैरागढ़-तिस्सा रोड पर हुआ।
हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। आसपास के लोगों ने तत्काल घटनास्थल पर पहुंचकर राहत और बचाव कार्य शुरू किया। बाद में प्रशासन और संबंधित राहत दल भी मौके पर पहुंचे और घायलों को अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था की गई।
दुर्घटना में बस के चालक और परिचालक सहित सात लोगों की मौत हुई है। 11 अन्य लोग घायल हुए हैं। घायलों को उपचार के लिए स्वास्थ्य संस्थानों में भेजा गया है।
दुर्गम पहाड़ी इलाके में राहत कार्य चुनौतीपूर्ण
चंबा जिले का चुराह क्षेत्र भौगोलिक रूप से दुर्गम और पहाड़ी इलाका है। बैरागढ़-तिस्सा रोड का संबंधित हिस्सा करीब 27 किलोमीटर लंबा पहाड़ी मार्ग है, जहां कई स्थानों पर सड़क संकरी है और खड़ी ढलानें हैं। ऐसे इलाके में सड़क दुर्घटना होने के बाद राहत एवं बचाव कार्य भी चुनौतीपूर्ण हो जाता है।
हादसे के बाद स्थानीय लोगों की तत्परता से घायलों को बस से बाहर निकालने और उन्हें सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने में मदद मिली। प्रशासन ने भी मौके पर पहुंचकर बचाव कार्य को आगे बढ़ाया।
घायलों के उपचार पर सरकार का फोकस
राज्यपाल कविंदर गुप्ता ने अधिकारियों को विशेष रूप से निर्देश दिया है कि हादसे में घायल यात्रियों को हर संभव चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए। सरकार की प्राथमिकता फिलहाल घायलों की जान बचाना और उन्हें बेहतर इलाज उपलब्ध कराना है।
अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि घायलों को इलाज के दौरान किसी तरह की परेशानी न हो। जरूरत पड़ने पर उन्हें बेहतर चिकित्सा संस्थानों में भेजने की व्यवस्था भी की जा सकती है।
मुख्यमंत्री की ओर से भी घायलों की स्थिति पर नजर रखने और आवश्यक सहायता देने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन द्वारा घायलों और उनके परिवारों के संपर्क में रहने की कोशिश की जा रही है।
हादसे के कारणों की जांच
दुर्घटना के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए जांच की जा रही है। प्रारंभिक जानकारी में बस के सड़क से फिसलने की बात सामने आई है, लेकिन हादसा किन परिस्थितियों में हुआ, इसका स्पष्ट पता विस्तृत जांच के बाद ही चल सकेगा।
जांच के दौरान सड़क की स्थिति, वाहन की तकनीकी हालत, चालक की स्थिति और हादसे के समय अन्य परिस्थितियों को देखा जा सकता है। पहाड़ी मार्ग होने के कारण सड़क की चौड़ाई और मोड़ भी जांच का हिस्सा हो सकते हैं।
सड़क सुरक्षा पर फिर उठे सवाल
चंबा जैसे पहाड़ी जिलों में सड़क दुर्घटनाओं का जोखिम अधिक रहता है। संकरी सड़कें, खड़ी ढलानें और कई स्थानों पर गहरी खाइयां वाहन चालकों के लिए चुनौती पेश करती हैं। ऐसे में सड़क सुरक्षा से जुड़े उपायों को मजबूत करने की जरूरत लगातार महसूस की जाती है।
चालुंज मोड़ पर हुआ हादसा भी इसी चुनौती की ओर ध्यान आकर्षित करता है। प्रशासन के लिए ऐसे संवेदनशील स्थानों की पहचान कर सुरक्षा इंतजाम मजबूत करना महत्वपूर्ण होगा।
फिलहाल राज्यपाल और मुख्यमंत्री ने हादसे में जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की है और घायलों के बेहतर इलाज के निर्देश दिए हैं। सात लोगों की मौत से प्रभावित परिवारों के बीच शोक का माहौल है, जबकि प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग घायल यात्रियों के उपचार और आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने में जुटा हुआ है।