मंडी। कीरतपुर-मनाली फोरलेन पर सड़क हादसों को कम करने और यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने की दिशा में भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। झीड़ी के बाद अब डडौर और नागचला में भी फ्लाईओवर-कम-अंडरपास के निर्माण का रास्ता साफ हो गया है। दोनों परियोजनाओं के निर्माण के लिए NHAI ने करीब 27 करोड़ रुपये का टेंडर जारी किया है।
इन दोनों स्थानों पर फ्लाईओवर और अंडरपास बनने से फोरलेन पर सीधे आने वाले स्थानीय वाहनों की आवाजाही को व्यवस्थित करने में मदद मिलने की उम्मीद है। साथ ही मुख्य मार्ग पर चलने वाले तेज रफ्तार वाहनों और स्थानीय यातायात के बीच टकराव की संभावना को कम करने का प्रयास किया जाएगा।
NHAI की योजना के मुताबिक डडौर और नागचला में प्रस्तावित दोनों परियोजनाओं का निर्माण एक ही निजी कंपनी करेगी। टेंडर प्रक्रिया पूरी होने और अनुबंध के बाद संबंधित कंपनी को निर्धारित समयसीमा के भीतर काम शुरू करना होगा।
तीन महीने में शुरू करना होगा काम
परियोजना के लिए समयसीमा भी तय कर दी गई है। अनुबंध के अनुसार निर्माण एजेंसी को अगले तीन महीने के भीतर काम शुरू करना होगा। इसके बाद डेढ़ वर्ष के भीतर दोनों परियोजनाओं का निर्माण पूरा कर NHAI को सौंपना होगा।
समयसीमा निर्धारित होने से परियोजनाओं को तेजी से पूरा करने पर जोर रहेगा। निर्माण के दौरान यातायात प्रभावित न हो, इसके लिए चरणबद्ध तरीके से काम किए जाने की आवश्यकता होगी।
कीरतपुर-मनाली फोरलेन हिमाचल प्रदेश के महत्वपूर्ण सड़क मार्गों में शामिल है। इस मार्ग पर स्थानीय यातायात के साथ बड़ी संख्या में पर्यटक वाहन और मालवाहक वाहन भी चलते हैं। ऐसे में प्रमुख जंक्शनों पर यातायात का दबाव बढ़ने से दुर्घटना का खतरा बना रहता है।
डडौर में यातायात का अधिक दबाव
डडौर क्षेत्र में स्थानीय सड़कों से आने वाले वाहनों और फोरलेन पर चलने वाले ट्रैफिक के बीच आवाजाही अधिक रहती है। यहां विभिन्न दिशाओं से आने वाले वाहनों के कारण जंक्शन पर यातायात प्रबंधन चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
फ्लाईओवर-कम-अंडरपास बनने के बाद मुख्य फोरलेन यातायात और स्थानीय वाहनों की आवाजाही को अलग-अलग स्तर पर व्यवस्थित किया जा सकेगा। इससे वाहन चालकों को सीधे तेज रफ्तार ट्रैफिक के बीच प्रवेश करने की जरूरत कम हो सकती है।
इस व्यवस्था से दुर्घटनाओं की आशंका कम करने के साथ जाम की समस्या से भी राहत मिलने की उम्मीद है। खासकर व्यस्त समय में जंक्शन पर वाहनों की आवाजाही अधिक होने पर इसका फायदा मिल सकता है।
नागचला में भी बनेगा फ्लाईओवर
नागचला में भी इसी तरह फ्लाईओवर-कम-अंडरपास तैयार किया जाएगा। यहां आसपास के इलाकों से आने वाले स्थानीय वाहनों की आवाजाही को ध्यान में रखते हुए परियोजना प्रस्तावित की गई है।
अंडरपास के जरिए स्थानीय लोगों और वाहनों को मुख्य फोरलेन ट्रैफिक से सीधे टकराव के बिना सड़क पार करने की सुविधा मिल सकेगी। वहीं फ्लाईओवर के जरिए मुख्य मार्ग पर वाहनों की आवाजाही लगातार जारी रखने में मदद मिलेगी।
दोनों परियोजनाओं का मुख्य उद्देश्य फोरलेन पर यातायात को सुचारू बनाना और दुर्घटना की आशंका वाले जंक्शनों को सुरक्षित करना है।
हादसों को रोकने पर NHAI का फोकस
फोरलेन बनने के बाद वाहनों की औसत गति पुराने मार्ग की तुलना में बढ़ जाती है। ऐसे में जहां स्थानीय सड़कें सीधे मुख्य मार्ग से जुड़ती हैं, वहां दुर्घटना का जोखिम भी बढ़ सकता है।
ऐसे जंक्शनों पर फ्लाईओवर और अंडरपास को सड़क सुरक्षा के महत्वपूर्ण उपाय के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। इससे मुख्य मार्ग पर चलने वाले वाहन बिना बार-बार रुके आगे बढ़ सकते हैं, जबकि स्थानीय वाहन अंडरपास या अलग संपर्क मार्ग के जरिए आवाजाही कर सकते हैं।
डडौर और नागचला में प्रस्तावित निर्माण भी इसी रणनीति का हिस्सा है। NHAI ने सड़क सुरक्षा और यातायात की जरूरतों को देखते हुए दोनों स्थानों के लिए लगभग 27 करोड़ रुपये का टेंडर जारी किया है।
झीड़ी के बाद दो और स्थानों पर काम
इससे पहले झीड़ी क्षेत्र में भी यातायात व्यवस्था और सड़क सुरक्षा में सुधार के लिए इसी तरह की योजना पर काम आगे बढ़ाया गया था। अब डडौर और नागचला को भी इस व्यवस्था में शामिल किया गया है।
फोरलेन के अलग-अलग हिस्सों में यातायात की प्रकृति अलग होती है। कुछ स्थानों पर स्थानीय बाजार, गांव और संपर्क सड़कें होने के कारण मुख्य मार्ग को पार करने वाले वाहनों की संख्या अधिक रहती है। ऐसे स्थानों पर ग्रेड सेपरेशन यानी अलग स्तर पर यातायात व्यवस्था दुर्घटनाओं को कम करने में मदद कर सकती है।
स्थानीय लोगों को भी मिलेगा फायदा
फ्लाईओवर-कम-अंडरपास बनने से केवल लंबी दूरी के यात्रियों को ही नहीं बल्कि स्थानीय लोगों को भी फायदा मिलने की उम्मीद है। फोरलेन के आसपास रहने वाले लोगों को अक्सर मुख्य सड़क पार करने के लिए तेज रफ्तार ट्रैफिक के बीच से गुजरना पड़ता है।
अंडरपास बनने से स्थानीय वाहन अपेक्षाकृत सुरक्षित तरीके से सड़क के दूसरी तरफ जा सकेंगे। इससे आसपास के गांवों, बाजारों और अन्य क्षेत्रों के बीच संपर्क भी बेहतर हो सकता है।
इसके अलावा मुख्य सड़क पर बार-बार वाहनों के रुकने या धीमा होने की जरूरत कम होने से ट्रैफिक जाम की संभावना भी घट सकती है।
निर्माण के दौरान चुनौती रहेगा ट्रैफिक
दोनों फ्लाईओवर का निर्माण शुरू होने के बाद यातायात प्रबंधन बड़ी चुनौती रहेगा। निर्माण स्थल पर मशीनों, निर्माण सामग्री और श्रमिकों की मौजूदगी के कारण सड़क का कुछ हिस्सा प्रभावित हो सकता है।
ऐसे में NHAI और निर्माण एजेंसी को डायवर्जन, बैरिकेडिंग, चेतावनी संकेत और रात के समय पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था करनी होगी। निर्माण अवधि में वाहन चालकों को भी निर्धारित गति सीमा और संकेतों का पालन करना जरूरी होगा।
विशेष रूप से मानसून और पर्यटक सीजन के दौरान इस मार्ग पर यातायात का दबाव बढ़ सकता है। इसलिए निर्माण कार्यक्रम को ट्रैफिक की स्थिति को ध्यान में रखते हुए लागू करना महत्वपूर्ण होगा।
डेढ़ साल में पूरा करने का लक्ष्य
निर्माण एजेंसी को काम शुरू होने के बाद डेढ़ वर्ष में दोनों परियोजनाएं पूरी करनी होंगी। परियोजनाओं की वास्तविक प्रगति भूमि की उपलब्धता, मौसम, निर्माण सामग्री और अन्य तकनीकी परिस्थितियों पर भी निर्भर करेगी।
NHAI की ओर से निर्माण कार्य की गुणवत्ता और समयसीमा की निगरानी की जाएगी। निर्धारित समय पर परियोजना पूरी होने से स्थानीय लोगों और कीरतपुर-मनाली फोरलेन पर सफर करने वाले वाहन चालकों को जल्द सुविधा मिल सकेगी।
पर्यटन के लिहाज से भी अहम मार्ग
कीरतपुर-मनाली फोरलेन हिमाचल प्रदेश के पर्यटन के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है। यह मार्ग पंजाब और अन्य मैदानी क्षेत्रों से मंडी, कुल्लू और मनाली की ओर जाने वाले पर्यटकों के लिए प्रमुख संपर्क मार्ग है।
पर्यटन सीजन में इस सड़क पर वाहनों की संख्या काफी बढ़ जाती है। ऐसे में जंक्शनों पर यातायात का बेहतर प्रबंधन यात्रा समय और सड़क सुरक्षा दोनों के लिए महत्वपूर्ण है।
डडौर और नागचला में फ्लाईओवर-कम-अंडरपास बनने के बाद इन स्थानों पर मुख्य ट्रैफिक को बिना रुकावट आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
सड़क सुरक्षा होगी प्राथमिकता
करीब 27 करोड़ रुपये की इन दोनों परियोजनाओं के जरिए NHAI का मुख्य जोर सड़क सुरक्षा और यातायात प्रबंधन पर रहेगा। निर्माण पूरा होने के बाद स्थानीय और लंबी दूरी के यातायात को अलग करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
फिलहाल NHAI ने टेंडर जारी कर परियोजना को निर्माण चरण की ओर बढ़ा दिया है। अनुबंध के अनुसार चयनित कंपनी को तीन महीने के भीतर काम शुरू करना होगा और डेढ़ वर्ष में दोनों फ्लाईओवर-कम-अंडरपास तैयार कर सौंपने होंगे।
डडौर और नागचला में इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद कीरतपुर-मनाली फोरलेन पर दो महत्वपूर्ण जंक्शनों की यातायात व्यवस्था में बदलाव आएगा। इससे सड़क पर वाहनों की निर्बाध आवाजाही के साथ स्थानीय लोगों के लिए सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित करने में मदद मिलने की उम्मीद है।