शिमला। हिमाचल प्रदेश की खूबसूरत वादियों और प्रमुख पर्यटन स्थलों तक पहुंचने के लिए पर्यटकों के पास सड़क मार्ग के अलावा हेली टैक्सी का विकल्प भी उपलब्ध है। हेली टैक्सी सेवा के माध्यम से चंडीगढ़, कुल्लू, मंडी और शिमला के बीच हवाई सफर किया जा सकता है। इससे लंबी सड़क यात्रा में लगने वाले समय को काफी कम किया जा सकता है।

चंडीगढ़ से कुल्लू के लिए भी हवाई सेवा उपलब्ध है। कुल्लू के भुंतर एयरपोर्ट पहुंचने के बाद पर्यटक करीब 50 किलोमीटर दूर स्थित मनाली जा सकते हैं। वहीं भुंतर से चंडीगढ़ के लिए हेली टैक्सी सेवा मंडी के कांगनी धार होकर संचालित होती है।

भुंतर से चंडीगढ़ तक हेली टैक्सी का किराया जीएसटी सहित 5,775 रुपये निर्धारित बताया गया है। इस सेवा से उन पर्यटकों को सुविधा मिल सकती है, जो कम समय में हिमाचल प्रदेश के विभिन्न पर्यटन स्थलों तक पहुंचना चाहते हैं।

कुल्लू से शिमला सिर्फ 30 मिनट में

कुल्लू के भुंतर से शिमला के संजौली के बीच भी हेलीकॉप्टर सेवा उपलब्ध है। इसके जरिए पर्यटक कुल्लू और शिमला के बीच हवाई यात्रा कर सकते हैं।

निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार मंगलवार और शुक्रवार को भुंतर से संजौली के लिए हेली टैक्सी सुबह 7 बजे उड़ान भरती है। यह करीब 30 मिनट की यात्रा के बाद सुबह 7:30 बजे संजौली पहुंचती है।

भुंतर से संजौली तक प्रति यात्री किराया 4,200 रुपये निर्धारित बताया गया है। सड़क मार्ग की तुलना में यह यात्रा काफी कम समय में पूरी होती है। सड़क से कुल्लू और शिमला के बीच यात्रा में कई घंटे लग सकते हैं, जबकि हेलीकॉप्टर से यह दूरी लगभग आधे घंटे में पूरी की जा सकती है।

चंडीगढ़ से भी कुल्लू के लिए उड़ान

हिमाचल घूमने आने वाले पर्यटकों के लिए चंडीगढ़ एक महत्वपूर्ण प्रवेश केंद्र है। दिल्ली, पंजाब, हरियाणा और आसपास के राज्यों से बड़ी संख्या में पर्यटक पहले चंडीगढ़ पहुंचते हैं और वहां से सड़क मार्ग से हिमाचल के विभिन्न पर्यटन स्थलों की ओर जाते हैं।

ऐसे यात्रियों के लिए चंडीगढ़ से कुल्लू की हवाई सेवा एक विकल्प है। कुल्लू के भुंतर पहुंचने के बाद मनाली जाने के लिए सड़क मार्ग से करीब 50 किलोमीटर की यात्रा करनी पड़ती है।

मनाली हिमाचल प्रदेश के सबसे लोकप्रिय पर्यटन स्थलों में शामिल है। यहां सालभर देश-विदेश से पर्यटक पहुंचते हैं। गर्मियों में मैदानी क्षेत्रों की गर्मी से राहत पाने और सर्दियों में बर्फबारी का आनंद लेने के लिए पर्यटकों की संख्या बढ़ जाती है।

मंडी के कांगनी धार होकर सेवा

भुंतर से चंडीगढ़ के बीच संचालित हेली टैक्सी सेवा में मंडी का कांगनी धार भी शामिल है। इससे मंडी क्षेत्र के यात्रियों और पर्यटकों को भी हवाई संपर्क का लाभ मिलता है।

पहाड़ी प्रदेश होने के कारण हिमाचल में सड़क यात्रा में समय अधिक लगता है। घुमावदार सड़कों और भौगोलिक परिस्थितियों के कारण कम दूरी तय करने में भी कई घंटे लग सकते हैं। हेली टैक्सी ऐसी परिस्थितियों में कम समय वाले यात्रियों के लिए उपयोगी विकल्प बन सकती है।

भुंतर से चंडीगढ़ का किराया जीएसटी सहित 5,775 रुपये बताया गया है। हालांकि यात्रा की योजना बनाने से पहले यात्रियों को संबंधित ऑपरेटर से उड़ान के समय, सीट उपलब्धता और मौजूदा किराये की पुष्टि कर लेनी चाहिए।

पर्यटकों के समय की होगी बचत

हेली टैक्सी सेवा का सबसे बड़ा फायदा यात्रा के समय में होने वाली बचत है। हिमाचल के पहाड़ी इलाकों में एक शहर से दूसरे शहर जाने में सड़क मार्ग से कई घंटे लग जाते हैं।

कुल्लू से शिमला के बीच भी यही स्थिति है। सड़क मार्ग से यात्रा लंबी होती है, जबकि भुंतर से संजौली के बीच हेलीकॉप्टर सेवा लगभग 30 मिनट में यात्रियों को गंतव्य तक पहुंचा देती है।

ऐसे पर्यटक जिनके पास घूमने के लिए सीमित समय है, वे हेली टैक्सी की मदद से एक ही यात्रा में हिमाचल के कई पर्यटन स्थलों को अपने कार्यक्रम में शामिल कर सकते हैं।

मंगलवार और शुक्रवार को कुल्लू-शिमला उड़ान

भुंतर से संजौली के लिए उपलब्ध कार्यक्रम के मुताबिक हेली टैक्सी मंगलवार और शुक्रवार को संचालित होती है। सुबह 7 बजे भुंतर से उड़ान भरने के बाद हेलीकॉप्टर करीब 7:30 बजे संजौली पहुंचता है।

सुबह की उड़ान होने के कारण यात्री शिमला पहुंचने के बाद पूरा दिन पर्यटन के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं। संजौली से शिमला शहर के प्रमुख पर्यटन स्थलों तक सड़क मार्ग से आसानी से पहुंचा जा सकता है।

शिमला में रिज मैदान, माल रोड, जाखू मंदिर और आसपास के कई पर्यटन स्थल हैं। इस कारण कुल्लू से आने वाले पर्यटक हेली टैक्सी के माध्यम से कम समय में शिमला पहुंचकर अपनी यात्रा आगे बढ़ा सकते हैं।

मौसम पर निर्भर रहती हैं हेलीकॉप्टर उड़ानें

हिमाचल प्रदेश में हेलीकॉप्टर सेवाओं का संचालन मौसम की स्थिति पर निर्भर रहता है। पहाड़ी इलाकों में अचानक बादल, बारिश, बर्फबारी, तेज हवा या कम दृश्यता के कारण उड़ान में बदलाव या देरी हो सकती है।

इसलिए यात्रियों को निर्धारित उड़ान से पहले सेवा की मौजूदा स्थिति की जानकारी लेना जरूरी है। खराब मौसम की स्थिति में सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए उड़ान को स्थगित या रद्द किया जा सकता है।

यात्रियों को अपनी आगे की यात्रा की योजना बनाते समय मौसम के कारण संभावित बदलाव को भी ध्यान में रखना चाहिए।

मनाली जाने वालों को भी फायदा

चंडीगढ़ से कुल्लू पहुंचने वाली सेवा का फायदा मनाली जाने वाले पर्यटकों को मिल सकता है। भुंतर से मनाली की दूरी करीब 50 किलोमीटर है। भुंतर पहुंचने के बाद पर्यटक टैक्सी या अन्य सड़क परिवहन के जरिए मनाली जा सकते हैं।

इससे चंडीगढ़ से पूरी यात्रा सड़क मार्ग से करने की जरूरत नहीं रहती। खासकर पर्यटन सीजन में जब चंडीगढ़-मनाली मार्ग पर वाहनों का दबाव बढ़ जाता है, तब हवाई यात्रा समय बचाने वाला विकल्प साबित हो सकती है।

पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा

हिमाचल प्रदेश की अर्थव्यवस्था में पर्यटन की महत्वपूर्ण भूमिका है। शिमला, मनाली, कुल्लू, धर्मशाला और अन्य पर्यटन स्थलों पर हर साल बड़ी संख्या में यात्री पहुंचते हैं।

बेहतर हवाई संपर्क से पर्यटकों के लिए अलग-अलग क्षेत्रों तक पहुंच आसान हो सकती है। इससे कम समय की छुट्टी पर आने वाले यात्रियों को भी एक से अधिक पर्यटन स्थलों की यात्रा करने का मौका मिलता है।

हेली टैक्सी सेवा विशेष रूप से उन यात्रियों के लिए आकर्षक हो सकती है, जो सड़क यात्रा में लगने वाले लंबे समय से बचना चाहते हैं।

यात्रा से पहले शेड्यूल की पुष्टि जरूरी

हेली टैक्सी से यात्रा करने की योजना बना रहे पर्यटकों को टिकट बुक करने से पहले वर्तमान शेड्यूल, किराया, सामान से संबंधित नियम और मौसम की स्थिति की पुष्टि करनी चाहिए। हेलीकॉप्टर सेवाओं का कार्यक्रम परिचालन और मौसम संबंधी कारणों से बदल सकता है।

फिलहाल उपलब्ध कार्यक्रम के अनुसार कुल्लू के भुंतर से शिमला के संजौली तक मंगलवार और शुक्रवार को सुबह 7 बजे उड़ान है, जो करीब 30 मिनट में संजौली पहुंचती है। इस मार्ग का किराया 4,200 रुपये बताया गया है। वहीं भुंतर से चंडीगढ़ की यात्रा का किराया जीएसटी सहित 5,775 रुपये निर्धारित है।

हिमाचल घूमने की योजना बना रहे पर्यटकों के लिए हेली टैक्सी न केवल यात्रा का समय कम कर सकती है, बल्कि पहाड़ों के बीच हवाई सफर का अलग अनुभव भी दे सकती है। हालांकि यात्रा से पहले उड़ान की उपलब्धता और मौजूदा किराये की पुष्टि करना जरूरी होगा।

Tags: