Himachal Pradesh.हिमाचल प्रदेश: पांवटा साहिब में स्ट्रॉबेरी की खेती ने किसानों की जिंदगी में नया बदलाव और कृषि क्षेत्र में कायाकल्प कर दिया है। स्थानीय किसानों ने पारंपरिक फसलों की जगह स्ट्रॉबेरी की खेती अपनाकर अपनी आय बढ़ाई है और खेती के तौर-तरीकों में आधुनिक तकनीकों को शामिल किया है।
स्ट्रॉबेरी की खेती ने न केवल किसानों की आमदनी में वृद्धि की है, बल्कि कृषि परंपराओं और आधुनिक कृषि तकनीक के मेल का भी उदाहरण पेश किया है। किसानों ने बताया कि पहले पारंपरिक फसलें जैसे आलू और गेहूं पर्याप्त लाभ नहीं देती थीं, लेकिन स्ट्रॉबेरी ने उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार किया है।
पांवटा साहिब के एक वरिष्ठ किसान ने कहा, "स्ट्रॉबेरी की खेती ने हमारे गांव में कृषि और रोजगार दोनों में नई उम्मीदें जगाईं हैं। पहले हमें फसल का पर्याप्त मुनाफा नहीं मिलता था, लेकिन अब हम सीधे बाजार में स्ट्रॉबेरी बेचकर अच्छी कमाई कर पा रहे हैं।"
स्थानीय कृषि विभाग ने भी किसानों को स्ट्रॉबेरी की उन्नत किस्में और प्रशिक्षण उपलब्ध करवाया। विभाग के अधिकारी ने बताया कि किसानों को हाइड्रोपोनिक्स और ड्रिप इरिगेशन जैसी तकनीकें सिखाई गईं, जिससे फसल की पैदावार और गुणवत्ता दोनों में सुधार हुआ।
स्ट्रॉबेरी की खेती से स्थानीय महिलाओं और युवाओं को रोजगार के नए अवसर भी मिले हैं। कई घरों में महिलाएं और युवा खेती और पैकेजिंग में काम करके परिवार की आमदनी में योगदान दे रहे हैं। इससे पांवटा साहिब के ग्रामीण क्षेत्रों में सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण को भी बल मिला है।
एक स्थानीय व्यापारी ने कहा कि स्ट्रॉबेरी की उच्च गुणवत्ता वाले फल को नजदीकी और राष्ट्रीय बाजारों में भेजा जा रहा है, जिससे किसानों को बेहतर मूल्य मिल रहा है। इससे कृषि व्यवसाय में निवेश और उत्साह भी बढ़ा है।
इस परियोजना ने पांवटा साहिब में कृषि का चेहरा बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। अब अन्य किसान भी स्ट्रॉबेरी की खेती अपनाने के लिए प्रेरित हो रहे हैं। विभाग ने बताया कि आने वाले वर्षों में इसे और बढ़ाने के लिए प्रशिक्षण और वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी।