धर्मशाला: पूर्व उद्योग मंत्री बिक्रम ठाकुर ने कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि प्रदेश में शासन का स्तर इतना गिर चुका है कि सरकार खुद ही अपने फैसलों की विश्वसनीयता खत्म कर रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार पहले निर्णय, फिर यू-टर्न की नीति पर चल रही है, जिसने प्रशासनिक व्यवस्था को पूरी तरह मजाक बना दिया है।

वीरवार को जारी एक प्रेस बयान में उन्होंने कहा कि पिछले कुछ महीनों में सरकार द्वारा लिए गए अनेक फैसले ऐसे हैं जिन्हें जनता के विरोध के बाद तुरंत वापस लेना पड़ा। चाहे बिजली सब्सिडी खत्म करने का मामला हो, बाहरी राज्यों के वाहनों पर टैक्स बढ़ाने का फैसला हो, कर्मचारियों के वेतन और पदों को लेकर निर्णय हों या सरकारी संपत्तियों के किराए में भारी बढ़ोतरी, हर मुद्दे पर सरकार पहले जनता पर बोझ डालती है और फिर दबाव में आकर पीछे हट जाती है। यह स्थिति दर्शाती है कि सरकार के पास न कोई स्पष्ट नीति है और न ही दूरदर्शिता।

बिक्रम ठाकुर ने कहा कि मुख्यमंत्री का नेतृत्व पूरी तरह कमजोर साबित हुआ है: उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री और उनके मंत्री बिना किसी ठोस योजना या आंकड़ों के फैसले लेते हैं, जिससे प्रदेश में अस्थिरता का माहौल बनता है। प्रशासनिक अधिकारी भी इस भ्रम में हैं कि कौन सा निर्णय स्थायी है और कौन सा कुछ ही दिनों में पलट जाएगा।

बिक्रम ठाकुर ने यह भी कहा कि कांग्रेस सरकार की सबसे बड़ी विफलता यह है कि वह अपनी गलतियों से सीखने को तैयार नहीं है। बार-बार एक ही प्रकार की गलतियां दोहराई जा रही हैं, जिससे साफ है कि सरकार के पास न तो नीति-निर्माण की क्षमता है और न ही प्रशासनिक नियंत्रण।

उन्होंने कहा कि जनता अब कांग्रेस के इस यू-टर्न मॉडल को पूरी तरह समझ चुकी है। प्रदेश की जनता स्थिरता, पारदर्शिता और विकास चाहती है, लेकिन कांग्रेस सरकार इन तीनों मोर्चों पर पूरी तरह विफल रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार के फैसलों ने निवेश के माहौल को भी प्रभावित किया है, जिससे रोजगार के अवसर कम हो रहे हैं और युवा निराश हो रहे हैं। बिक्रम ठाकुर ने कहा कि हिमाचल प्रदेश की जनता इस असफल और दिशाहीन सरकार को आने वाले समय में करारा जवाब देगी।

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