शिमला : 28 अक्टूबर 2026। हिमाचल प्रदेश में नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार के खिलाफ पुलिस ने कार्रवाई तेज कर दी है। शिमला पुलिस अब नशा तस्करों की गिरफ्तारी और मादक पदार्थों की बरामदगी के साथ-साथ उनके आर्थिक नेटवर्क और कथित अवैध संपत्तियों की भी जांच कर रही है। इसी अभियान के तहत पुलिस ने पिछले आठ महीनों में 940 संपत्तियों का सत्यापन किया है, जिनमें से 58 संपत्तियों को संभावित रूप से अवैध पाया गया है। इन संपत्तियों की वैधता और नशा तस्करी से उनके संभावित संबंधों की जांच की जा रही है। पुलिस का उद्देश्य नशीले पदार्थों के कारोबार से जुड़े वित्तीय नेटवर्क की पहचान कर उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करना है।
940 संपत्तियों की जांच में 58 पर संदेह
शिमला पुलिस ने फरवरी 2026 से नशा तस्करी से जुड़ी संपत्तियों की पहचान के लिए विशेष सत्यापन अभियान शुरू किया था। इस अभियान में पुलिस संदिग्ध व्यक्तियों की चल-अचल संपत्तियों, निर्माण कार्यों और वित्तीय गतिविधियों की जांच कर रही है।अब तक 940 संपत्तियों का सत्यापन पूरा किया जा चुका है। इनमें से 58 संपत्तियों को संभावित रूप से अवैध चिह्नित किया गया है।पुलिस अधिकारियों के अनुसार, इन संपत्तियों से जुड़े दस्तावेजों और स्वामित्व संबंधी रिकॉर्ड की जांच की जा रही है। यह भी पता लगाया जा रहा है कि संबंधित संपत्तियों के निर्माण या खरीद में नशा तस्करी से अर्जित धन का इस्तेमाल तो नहीं हुआ।हालांकि, किसी संपत्ति को संदिग्ध चिह्नित किए जाने का अर्थ यह नहीं है कि उसे कानूनी रूप से अवैध घोषित कर दिया गया है। जांच और संबंधित कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद आगे की कार्रवाई होगी।
चिड़गांव-रोहड़ू मार्ग पर पांच दुकानें ध्वस्त
नशा तस्करी से जुड़े मामलों में अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई करते हुए शिमला पुलिस और लोक निर्माण विभाग ने चिड़गांव-रोहड़ू मार्ग पर लंबाखाटल के पास संयुक्त अभियान चलाया।इस कार्रवाई के दौरान सरकारी जमीन पर बनाए गए पांच दुकानों के निर्माण को ध्वस्त कर दिया गया। इसके अलावा एक स्टोर को विभाग ने अपने कब्जे में ले लिया।पुलिस के अनुसार, संबंधित निर्माणों की जानकारी कोटखाई पुलिस थाने में एनडीपीएस अधिनियम के तहत दर्ज एक मामले की समीक्षा के दौरान सामने आई थी।जांच में पता चला कि लोक निर्माण विभाग की सरकारी जमीन पर संबंधित निर्माण किए गए थे। इसके बाद नियमानुसार कार्रवाई करते हुए उन्हें हटाया गया।यह कार्रवाई अवैध निर्माण के खिलाफ की गई थी। संबंधित व्यक्तियों की आपराधिक जिम्मेदारी का निर्धारण अलग कानूनी प्रक्रिया के अनुसार होगा।
आठ अक्टूबर को अवैध रेस्टोरेंट पर भी चला बुलडोजर
शिमला पुलिस इससे पहले भी नशा तस्करी से जुड़े एक मामले में अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई कर चुकी है।आठ अक्टूबर 2026 को रोहड़ू क्षेत्र में नशा तस्करी से जुड़े एक आरोपी के अवैध रेस्टोरेंट को बुलडोजर से ध्वस्त किया गया था।पुलिस के अनुसार, पिछले आठ महीनों में नशा तस्करी से संबंधित दो मामलों में संपत्तियों या निर्माणों के खिलाफ इस प्रकार की कार्रवाई की गई है।इन कार्रवाइयों के जरिए पुलिस यह संदेश देना चाहती है कि नशीले पदार्थों के कारोबार के साथ-साथ उससे जुड़ी कथित अवैध संपत्तियों की भी जांच की जाएगी।
इस साल 549 आरोपी गिरफ्तार
शिमला पुलिस ने वर्ष 2026 में नशीले पदार्थों के खिलाफ व्यापक अभियान चलाया है।पुलिस की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष नौ अक्टूबर तक एनडीपीएस अधिनियम के तहत 271 मामले दर्ज किए गए थे।इन मामलों में कुल 549 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। इनमें 80 मुख्य सप्लायर भी शामिल बताए गए हैं।पुलिस ने इस अवधि में नशीले पदार्थों की आपूर्ति करने वाले 61 नेटवर्क ध्वस्त करने का दावा किया है।इसके अलावा लगभग 5.04 किलोग्राम चिट्टा या हेरोइन बरामद करने की जानकारी भी सामने आई है।
12.61 करोड़ रुपये की संपत्तियों पर कार्रवाई
नशीले पदार्थों की तस्करी से जुड़ी वित्तीय गतिविधियों की जांच के दौरान पुलिस ने करोड़ों रुपये की संपत्तियों पर भी कार्रवाई की है।शिमला पुलिस के मुताबिक, नौ अक्टूबर तक करीब 12.61 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की संपत्तियां जब्त या फ्रीज की गई थीं।इस कार्रवाई में बैंक खातों, चल-अचल संपत्तियों और अन्य वित्तीय संसाधनों को शामिल किया गया है।पुलिस वित्तीय जांच के जरिए यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि नशीले पदार्थों की बिक्री से प्राप्त धन का इस्तेमाल किन गतिविधियों में किया गया।जांच एजेंसियों के लिए बैंक लेनदेन और संपत्ति खरीद के रिकॉर्ड महत्वपूर्ण साक्ष्य साबित हो सकते हैं।
तीन मामलों में 40.5 लाख की संपत्ति सीज
एक अक्टूबर को सामने आई रिपोर्टों के अनुसार, शिमला पुलिस ने तीन अलग-अलग एनडीपीएस मामलों में लगभग 40.5 लाख रुपये मूल्य की संपत्तियों और वित्तीय राशि को सीज किया था।इन मामलों में आरोपियों के बैंक खातों, वित्तीय लेनदेन और संपत्तियों से संबंधित दस्तावेजों की जांच की गई।पुलिस अधिकारियों का कहना है कि नशीले पदार्थों के कारोबार को रोकने के लिए केवल छोटे स्तर के विक्रेताओं को पकड़ना पर्याप्त नहीं है।इसके पीछे सक्रिय मुख्य सप्लायरों और वित्तीय सहयोगियों की पहचान करना भी आवश्यक है।इसी उद्देश्य से पुलिस ने वित्तीय जांच को अपनी रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया है।
मुख्य सप्लायरों और नेटवर्क पर विशेष नजर
शिमला पुलिस की रणनीति में नशीले पदार्थों की आपूर्ति श्रृंखला को तोड़ना प्रमुख उद्देश्य है।इसके लिए पुलिस बैकवर्ड लिंकेज यानी गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ और अन्य साक्ष्यों के आधार पर मुख्य सप्लायरों तक पहुंचने का प्रयास कर रही है।इसके साथ ही वित्तीय लेनदेन की जांच से उन व्यक्तियों और संस्थाओं की पहचान करने की कोशिश की जा रही है, जो कथित रूप से नशे के कारोबार में आर्थिक सहयोग करते हैं।इस प्रक्रिया में अलग-अलग पुलिस थानों के बीच सूचनाओं का आदान-प्रदान और तकनीकी जांच भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
नशा प्रभावित युवाओं के पुनर्वास पर भी जोर
हिमाचल प्रदेश में नशा तस्करी पर अंकुश लगाने के लिए पुलिस कार्रवाई के साथ-साथ पुनर्वास को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।सितंबर 2026 में शिमला के उपायुक्त अनुपम कश्यप ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए थे कि नशे से प्रभावित युवाओं के पुनर्वास और उन्हें समाज की मुख्यधारा में वापस लाने पर भी ध्यान दिया जाए।जिला स्तरीय नारकोटिक्स समन्वय समिति की बैठक में नशा प्रभावित क्षेत्रों की पहचान, निगरानी और जागरूकता कार्यक्रमों को मजबूत बनाने पर चर्चा की गई थी।अधिकारियों ने जिले की 15 पंचायतों को नशे की दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्रों के रूप में चिह्नित किया था।
आने वाले दिनों में और कार्रवाई की संभावना
शिमला पुलिस द्वारा चिह्नित 58 संदिग्ध संपत्तियों की जांच जारी है। संबंधित दस्तावेजों, स्वामित्व और वित्तीय स्रोतों की जांच पूरी होने के बाद ही तय होगा कि किन संपत्तियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।पुलिस ने संकेत दिया है कि नशीले पदार्थों की तस्करी से जुड़े मुख्य सप्लायरों, वित्तीय नेटवर्क और संभावित अवैध ठिकानों के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा।इस अभियान का उद्देश्य नशा तस्करी रोकने के साथ-साथ अपराध से अर्जित कथित अवैध धन के उपयोग पर भी अंकुश लगाना है।
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