Himachal Pradesh.हिमाचल प्रदेश: चंबा में प्रतिवर्ष आयोजित होने वाला सूही मेला इस साल भी धूमधाम से मनाया गया। इस मेला का आयोजन रानी सुनयना की विरासत को याद करने और उसकी सांस्कृतिक गाथा को जीवित रखने के लिए किया जाता है। मेला स्थानीय लोगों और पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। इस अवसर पर सांस्कृतिक कार्यक्रम, पारंपरिक नृत्य, लोक गीत और कला प्रदर्शन आयोजित किए गए। रानी सुनयना की वीरता, न्यायप्रियता और सामाजिक योगदान को विशेष रूप से प्रस्तुत किया गया।
स्थानीय अधिकारियों ने बताया कि सूही मेला न केवल रानी सुनयना की स्मृति को संजोने का माध्यम है, बल्कि यह क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान और पर्यटन को भी प्रोत्साहित करता है। इस अवसर पर गांव के लोग पारंपरिक परिधानों में सज-धज कर हिस्सा लेते हैं और मेले की रौनक बढ़ाते हैं। सांस्कृतिक विशेषज्ञों ने कहा कि रानी सुनयना का नाम चंबा के इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। सूही मेला इसके माध्यम से युवाओं को स्थानीय इतिहास और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का अवसर प्रदान करता है। मेला के दौरान विभिन्न प्रकार की हस्तशिल्प वस्तुएं, पारंपरिक व्यंजन और स्थानीय उत्पाद भी प्रदर्शित किए गए। इससे न केवल स्थानीय कलाकारों और कारीगरों को अपने हुनर को प्रस्तुत करने का अवसर मिला, बल्कि पर्यटकों को भी क्षेत्र की संस्कृति और जीवनशैली के करीब जाने का मौका मिला।
स्थानीय लोगों ने बताया कि सूही मेला चंबा की सांस्कृतिक जीवनशैली में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और रानी सुनयना की विरासत को नए पीढ़ी तक पहुँचाने का कार्य करता है। इस मेले का आयोजन प्रशासन और स्थानीय संगठनों के सहयोग से होता है, जिससे यह सुनिश्चित किया जाता है कि कार्यक्रम सफल और सुव्यवस्थित तरीके से संपन्न हो। कुल मिलाकर, चंबा का सूही मेला रानी सुनयना की वीरता और सांस्कृतिक योगदान का जश्न मनाने का महत्वपूर्ण अवसर है। यह मेला न केवल ऐतिहासिक स्मृतियों को जीवित रखता है, बल्कि स्थानीय संस्कृति और परंपराओं को संरक्षित करने में भी मदद करता है।