जिला परिषद में भाजपा ने रचा इतिहास, भूपेंद्र सिसोदिया अध्यक्ष और भरत कलांटा उपाध्यक्ष निर्वाचित
शिमला। शिमला जिला परिषद के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने इतिहास रचते हुए दोनों पदों पर कब्जा कर लिया। भाजपा समर्थित भूपेंद्र सिंह सिसोदिया अध्यक्ष और भरत सिंह कलांटा उपाध्यक्ष निर्वाचित हुए। अध्यक्ष पद के चुनाव में भूपेंद्र सिंह सिसोदिया को 13 मत मिले, जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी उम्मीदवार को 12 मत मिले। इस तरह भाजपा ने अध्यक्ष पद पर महज एक वोट के अंतर से जीत दर्ज की। वहीं उपाध्यक्ष पद पर भरत सिंह कलांटा को 14 मत प्राप्त हुए।
जिला परिषद के गठन के करीब तीन महीने 10 दिन बाद अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चुनाव संपन्न हुआ। लंबे समय से दोनों प्रमुख राजनीतिक दल जिला परिषद सदस्यों को अपने-अपने पक्ष में करने के लिए रणनीति बनाने में जुटे थे। अंततः चुनाव में भाजपा दोनों महत्वपूर्ण पदों पर कब्जा करने में सफल रही।
हाई कोर्ट के आदेश के बाद आगे बढ़ी चुनाव प्रक्रिया
शिमला जिला परिषद के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनाव में देरी का मामला हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट तक पहुंच गया था। चुनाव प्रक्रिया में लंबे समय तक विलंब होने के बाद अदालत के आदेश के पश्चात चुनाव की प्रक्रिया आगे बढ़ी और निर्धारित प्रक्रिया के तहत दोनों पदों के लिए मतदान कराया गया।
चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां पिछले कई दिनों से तेज थीं। भाजपा और कांग्रेस दोनों ही अपने पक्ष में बहुमत जुटाने के लिए लगातार प्रयास कर रहे थे। जिला परिषद में किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलने के कारण निर्दलीय सदस्यों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो गई थी।
ऐसा था जिला परिषद का गणित
शिमला जिला परिषद में कुल 25 सदस्य हैं। चुनाव में भाजपा समर्थित 11 सदस्य, कांग्रेस के 10 सदस्य और चार निर्दलीय सदस्य निर्वाचित हुए थे। अध्यक्ष पद पर जीत हासिल करने के लिए कम से कम 13 सदस्यों का समर्थन जरूरी था।
ऐसे में भाजपा के 11 और कांग्रेस के 10 सदस्यों के अलावा चार निर्दलीय सदस्य सत्ता की चाबी माने जा रहे थे। दोनों दलों के लिए इन चार सदस्यों का समर्थन हासिल करना बेहद महत्वपूर्ण था। यही वजह रही कि चुनाव से पहले राजनीतिक गतिविधियां काफी तेज हो गई थीं।
अध्यक्ष पद के लिए भाजपा को बहुमत का आंकड़ा पार करने के लिए अपने 11 सदस्यों के अलावा कम से कम दो अन्य सदस्यों के समर्थन की जरूरत थी। मतदान के परिणाम ने संकेत दिया कि भाजपा इस संख्या को जुटाने में सफल रही।
अध्यक्ष पद पर एक वोट से जीत
अध्यक्ष पद का चुनाव बेहद रोमांचक रहा। भाजपा समर्थित उम्मीदवार भूपेंद्र सिंह सिसोदिया को 13 वोट मिले। बहुमत का आंकड़ा भी 13 ही था। इस तरह उन्होंने आवश्यक समर्थन जुटाकर अध्यक्ष पद पर कब्जा किया।
भूपेंद्र सिंह की जीत का अंतर केवल एक वोट रहा, जिससे साफ है कि चुनाव में प्रत्येक सदस्य का वोट निर्णायक था। भाजपा के लिए यह जीत इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि जिला परिषद के चुनावी गणित में पार्टी के पास कांग्रेस की तुलना में केवल एक सदस्य अधिक था।
अध्यक्ष पद पर जीत के बाद भाजपा समर्थित सदस्यों में उत्साह देखने को मिला। पार्टी नेताओं और समर्थकों ने इसे संगठन की रणनीति और सदस्यों के बीच बेहतर तालमेल की सफलता बताया।
उपाध्यक्ष पद पर भी भाजपा का कब्जा
अध्यक्ष पद के बाद उपाध्यक्ष पद पर भी भाजपा समर्थित उम्मीदवार भरत सिंह कलांटा निर्वाचित हुए। उन्हें 14 मत प्राप्त हुए। उपाध्यक्ष पद पर उन्हें अध्यक्ष पद के मुकाबले एक मत अधिक मिला।
दोनों प्रमुख पदों पर भाजपा समर्थित उम्मीदवारों की जीत से जिला परिषद में भाजपा का प्रभाव मजबूत हुआ है। अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद पर पार्टी के उम्मीदवारों के चुने जाने के बाद जिला परिषद की कार्यप्रणाली में भाजपा की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है।
निर्दलीय सदस्यों की भूमिका रही अहम
चुनाव से पहले चार निर्दलीय सदस्यों को किंगमेकर माना जा रहा था। भाजपा और कांग्रेस दोनों की नजर इन सदस्यों पर थी। क्योंकि बहुमत के लिए 13 वोट जरूरी थे, ऐसे में निर्दलीयों का समर्थन किसी भी दल के लिए निर्णायक साबित हो सकता था।
अध्यक्ष पद के परिणाम में भाजपा समर्थित उम्मीदवार को 13 वोट मिलना बताता है कि पार्टी बहुमत के आंकड़े तक पहुंचने में सफल रही। उपाध्यक्ष पद पर 14 वोट मिलने से भाजपा को अपेक्षाकृत मजबूत समर्थन हासिल होने का संकेत मिला।
तीन महीने से अधिक समय बाद हुआ चुनाव
जिला परिषद के गठन के करीब तीन महीने 10 दिन बाद अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चुनाव हुआ। इस दौरान दोनों प्रमुख दलों के बीच राजनीतिक खींचतान जारी रही। सदस्यों को अपने पक्ष में करने और बहुमत जुटाने के लिए दोनों दलों की ओर से लगातार रणनीति बनाई जाती रही।
चुनाव में देरी को लेकर मामला अदालत तक पहुंचने के बाद हाई कोर्ट के आदेश ने प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ किया। इसके बाद प्रशासन की ओर से चुनाव की प्रक्रिया पूरी की गई।
भाजपा के लिए राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण जीत
शिमला जिला परिषद के दोनों प्रमुख पदों पर भाजपा की जीत को पार्टी के लिए राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जिला परिषद ग्रामीण क्षेत्रों के विकास और स्थानीय स्तर पर योजनाओं के क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। ऐसे में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद पर भाजपा समर्थित प्रतिनिधियों का चुना जाना पार्टी को स्थानीय निकाय के स्तर पर महत्वपूर्ण राजनीतिक बढ़त देता है।
वहीं कांग्रेस के लिए यह परिणाम झटका माना जा सकता है। पार्टी के पास जिला परिषद में 10 सदस्य थे और बहुमत से उसे तीन सदस्यों का समर्थन जुटाना था। इसके बावजूद वह अध्यक्ष पद पर आवश्यक संख्या हासिल नहीं कर सकी।
अब विकास कार्यों पर होगी नजर
चुनाव प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब जिला परिषद के सामने क्षेत्र के विकास से जुड़े मुद्दों को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी होगी। अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के सामने सदस्यों के बीच समन्वय कायम करने के साथ-साथ जिला परिषद के कामकाज को प्रभावी ढंग से संचालित करने की चुनौती होगी।
शिमला जिला परिषद में भाजपा समर्थित भूपेंद्र सिंह सिसोदिया और भरत सिंह कलांटा के निर्वाचित होने के साथ लंबे समय से जारी अध्यक्ष-उपाध्यक्ष पद की अनिश्चितता खत्म हो गई है। एक वोट के अंतर से मिली अध्यक्ष पद की जीत ने जहां चुनाव को बेहद रोचक बना दिया, वहीं उपाध्यक्ष पद पर 14 मत हासिल कर भाजपा ने अपनी स्थिति और मजबूत की।
अब देखना होगा कि नई टीम जिला परिषद के विकास कार्यों और सदस्यों के बीच समन्वय को किस तरह आगे बढ़ाती है। फिलहाल दोनों पदों पर भाजपा समर्थित उम्मीदवारों की जीत ने शिमला जिला परिषद की राजनीति में पार्टी का प्रभाव बढ़ा दिया है।