Himachal Pradesh हिमाचल प्रदेश: हिमाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग (HPPSC) की परीक्षा के कथित पेपर लीक मामले को लेकर जांच के बीच नए सवाल खड़े हो गए हैं। शिमला में अधिवक्ता विनय शर्मा ने मामले की जांच पर सवाल उठाते हुए कहा कि अब तक जिन लोगों को गिरफ्तार किया गया है, वे केवल प्रश्नपत्र खरीदने या बेचने वाले हैं, जबकि असली पेपर लीक करने वाले अभी तक कानून की गिरफ्त से बाहर हैं।
विनय शर्मा ने कहा कि परीक्षा में शामिल होने वाले छात्रों को पुलिस हिरासत में लिया गया। इसके अलावा जिन लोगों पर प्रश्नपत्र खरीदने और बेचने का आरोप है, उन्हें भी गिरफ्तार किया गया है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर प्रश्नपत्र लीक किसने किया। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति पेपर बेच रहा था, वह अपने स्तर पर प्रश्नपत्र हासिल नहीं कर सकता था।
उन्होंने दावा किया कि परीक्षा का प्रश्नपत्र केवल दो संस्थाओं की अभिरक्षा में हो सकता है—लोक सेवा आयोग (Public Service Commission) और पुलिस विभाग। ऐसे में जांच एजेंसियों को यह पता लगाना चाहिए कि प्रश्नपत्र सबसे पहले किस स्तर से बाहर आया और इसके लिए जिम्मेदार कौन है।
अधिवक्ता ने कहा कि यदि जांच केवल बिचौलियों या खरीदारों तक सीमित रही तो मामले की सच्चाई सामने नहीं आ पाएगी। उन्होंने मांग की कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और गहन जांच कर वास्तविक दोषियों की पहचान की जाए, ताकि भवि ष्य में ऐसी घटनाओं पर रोक लग सके और परीक्षाओं की विश्वसनीयता बनी रहे।
गौरतलब है कि पेपर लीक के आरोपों के बाद इस मामले की जांच जारी है और पुलिस कई लोगों से पूछताछ कर रही है। हालांकि, अब तक जांच एजेंसियों की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है कि प्रश्नपत्र सबसे पहले कहां से लीक हुआ। मामले को लेकर अभ्यर्थियों और विभिन्न संगठनों में भी पारदर्शी जांच की मांग लगातार उठ रही है।
Tags: