हिमाचल में बारिश और भूस्खलन से 145 सड़कें बंद 1000 करोड़ से ज्यादा का नुकसान
शिमला। हिमाचल प्रदेश में लगातार हो रही बारिश और भूस्खलन ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। प्रदेश के कई जिलों में सड़क संपर्क टूट गया है और बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है। भारी बारिश के कारण राष्ट्रीय राजमार्ग समेत कुल 145 प्रमुख सड़कें यातायात के लिए बंद हो गई हैं। प्रशासन और विभागीय टीमें सड़कों को खोलने के लिए लगातार काम कर रही हैं।
जानकारी के अनुसार, प्रदेश में राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-003) भी प्रभावित हुआ है और कई स्थानों पर यातायात बाधित है। इसके अलावा मंडी जिले में सबसे ज्यादा 62 सड़कें बंद हैं। वहीं कुल्लू में 35 और चंबा में 19 प्रमुख सड़कें यातायात के लिए पूरी तरह बंद हैं। अन्य जिलों में भी कई संपर्क मार्गों पर आवाजाही प्रभावित हुई है।
लोक निर्माण विभाग और स्थानीय प्रशासन की टीमें मशीनरी के साथ बंद सड़कों को बहाल करने में जुटी हुई हैं। हालांकि, लगातार बारिश और भूस्खलन के कारण राहत और बहाली कार्यों में भी मुश्किलें आ रही हैं।
मौसम विभाग ने प्रदेश में आने वाले दिनों में भी भारी बारिश को लेकर चेतावनी जारी की है। मौसम केंद्र शिमला के अनुसार, राज्य में 22 अगस्त तक कई स्थानों पर भारी बारिश की संभावना बनी हुई है।
मौसम विभाग ने बताया कि आज शिमला, मंडी, कांगड़ा, बिलासपुर और सिरमौर जिलों के कुछ हिस्सों में मध्यम बारिश हो सकती है। वहीं, कई अन्य क्षेत्रों में भी मौसम खराब रहने का अनुमान है।
बारिश और भूस्खलन के कारण प्रदेश के पहाड़ी क्षेत्रों में लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कई जगहों पर सड़कें टूटने, मलबा आने और पेड़ों के गिरने की घटनाएं सामने आई हैं। इससे यातायात व्यवस्था प्रभावित होने के साथ-साथ स्थानीय लोगों की रोजमर्रा की गतिविधियों पर भी असर पड़ा है।
इस मानसून सीजन में हिमाचल प्रदेश को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। 30 जून से 19 अगस्त के बीच प्रदेश में प्राकृतिक आपदाओं के कारण सार्वजनिक और निजी संपत्तियों को करीब 1,085.32 करोड़ रुपये का नुकसान होने का अनुमान लगाया गया है।
भारी बारिश, बादल फटने, भूस्खलन और बाढ़ जैसी घटनाओं ने कई क्षेत्रों में तबाही मचाई है। कई घरों, सड़कों, पुलों और अन्य सरकारी संपत्तियों को नुकसान पहुंचा है।
प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्य तेज कर दिए हैं। जिला स्तर पर अधिकारियों को स्थिति पर नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं। लोगों से अपील की गई है कि खराब मौसम के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचें और प्रशासन की ओर से जारी सलाह का पालन करें।
पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन का खतरा लगातार बना हुआ है। बारिश के कारण कमजोर हुई पहाड़ियों से अचानक मलबा गिरने की घटनाएं बढ़ जाती हैं, जिससे सड़क मार्ग बंद हो जाते हैं और कई बार दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ जाता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्य में मानसून के दौरान सड़क सुरक्षा और आपदा प्रबंधन सबसे बड़ी चुनौती होती है। भारी बारिश के समय छोटे मार्गों पर भी सावधानी बरतना जरूरी होता है।
राज्य सरकार और संबंधित विभागों का कहना है कि बंद सड़कों को प्राथमिकता के आधार पर खोला जा रहा है। जहां संभव है वहां वैकल्पिक मार्गों की व्यवस्था की जा रही है।
लोक निर्माण विभाग की टीमें लगातार प्रभावित क्षेत्रों में काम कर रही हैं। लेकिन कई स्थानों पर दोबारा बारिश होने से मलबा गिरने और सड़क बंद होने की समस्या बनी हुई है।
बारिश से हुए नुकसान का आकलन भी जारी है। अधिकारियों की टीमें प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर रही हैं और नुकसान की रिपोर्ट तैयार की जा रही है।
हिमाचल प्रदेश में इस मानसून ने एक बार फिर प्राकृतिक आपदाओं से निपटने की तैयारियों की चुनौती सामने रखी है। प्रशासन का कहना है कि लोगों की सुरक्षा और जरूरी सेवाओं की बहाली सर्वोच्च प्राथमिकता है।
फिलहाल प्रदेश में मौसम विभाग की चेतावनी को देखते हुए प्रशासन अलर्ट मोड पर है। लोगों से सतर्क रहने और नदी-नालों व भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों से दूर रहने की अपील की गई है।