सैनी के गुजरात दौरे में निवेश पर बनी बात, हरियाणा में नई औद्योगिक परियोजनाओं की तैयारी
चंडीगढ़: हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के दो दिवसीय गुजरात दौरे के दौरान राज्य को 50 हजार करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव मिले हैं। आधिकारिक बयान के हवाले से सामने आई जानकारी के अनुसार, विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों में निवेश की संभावनाओं और नई परियोजनाओं पर चर्चा हुई। इन प्रस्तावों के धरातल पर उतरने से प्रदेश में औद्योगिक गतिविधियां बढ़ने और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बनने की उम्मीद है। हालांकि यह राशि फिलहाल निवेश प्रस्तावों की है, राज्य में पूरी रकम निवेश हो जाने का आंकड़ा नहीं है।
मुख्यमंत्री के नेतृत्व में हरियाणा के प्रतिनिधिमंडल ने 27 और 28 अक्टूबर को सूरत तथा गांधीनगर में निवेशकों से संवाद किया। दौरे में उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री राव नरबीर सिंह भी शामिल रहे। कार्यक्रम का उद्देश्य उद्योगपतियों को हरियाणा में उपलब्ध कारोबारी अवसरों से अवगत कराना और नई साझेदारियों को आगे बढ़ाना था।
रक्षा, रियल एस्टेट और ऊर्जा क्षेत्रों में रुचि
समाचार एजेंसी भाषा की रिपोर्ट के अनुसार, हरियाणा को रक्षा, रियल एस्टेट तथा तेल एवं गैस क्षेत्रों में करीब 25 हजार करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव मिले हैं। यह जानकारी गुजरात यात्रा के दौरान प्राप्त कुल प्रस्तावों के संदर्भ में दी गई है। अलग-अलग क्षेत्रों में निवेशकों की दिलचस्पी राज्य में औद्योगिक विस्तार की संभावनाएं सामने लाती है।
प्रस्तावित परियोजनाओं का वास्तविक आर्थिक असर उनके आकार, स्थान और क्रियान्वयन की गति पर निर्भर करेगा। किसी उद्योग की घोषणा के बाद भूमि, वित्तीय व्यवस्था, जरूरी मंजूरियों और निर्माण जैसे चरण पूरे होने होते हैं। उसके बाद उत्पादन या सेवाएं शुरू होने पर रोजगार तथा स्थानीय कारोबार पर प्रभाव स्पष्ट होता है।
पहले दिन मिले लगभग ₹12 हजार करोड़ के प्रस्ताव
गुजरात दौरे के पहले दिन करीब 12 हजार करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव सामने आए थे। विभिन्न कंपनियों के साथ समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर हुए। मुख्यमंत्री ने कंपनियों के संस्थापकों, प्रबंध निदेशकों और मुख्य कार्यकारी अधिकारियों से अलग-अलग मुलाकात कर हरियाणा में कारोबार के विस्तार तथा नई इकाइयों की स्थापना पर बातचीत की।
इनमें डिफेंस टेक्सटाइल के लिए 5,000 करोड़ रुपये, तकनीकी वस्त्र उद्योग में 2,000 करोड़ रुपये और औद्योगिक मशीनरी क्षेत्र में 500 करोड़ रुपये के प्रस्ताव शामिल रहे। वेस्ट-टू-एनर्जी क्षेत्र में 4,000 करोड़ रुपये तथा सौर ऊर्जा और कॉस्मेटिक निर्माण से संबंधित 400 करोड़ रुपये के निवेश पर भी सहमति की जानकारी दी गई।
पहले दिन का लगभग 12 हजार करोड़ रुपये का आंकड़ा पूरे दौरे के कुल प्रस्तावों से अलग जोड़ना उचित नहीं होगा। दोनों दिन की बैठकों के बाद कुल निवेश प्रस्ताव 50 हजार करोड़ रुपये से अधिक बताए गए हैं।
युवाओं के रोजगार पर सरकार का जोर
मुख्यमंत्री ने निवेशकों से बातचीत में प्रदेश में रोजगार के नए अवसर पैदा करने को सरकार की प्राथमिकता बताया। उन्होंने उद्योगों की स्थापना और विस्तार के लिए अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराने की बात कही। प्रस्तावित निवेश से सहायक उद्योगों तथा नई कारोबारी साझेदारियों को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद जताई गई है।
उद्योग स्थापित होने पर केवल कारखाने के भीतर ही काम नहीं बनता। परिवहन, रखरखाव, पैकेजिंग, आपूर्ति और अन्य सेवाओं में भी मांग बढ़ सकती है। लेकिन गुजरात दौरे के इन प्रस्तावों से कितनी नौकरियां बनेंगी, इसका पुष्ट परियोजनावार आंकड़ा उपलब्ध विवरण में नहीं दिया गया है। इसलिए रोजगार की संभावना को तत्काल भर्ती की घोषणा नहीं समझना चाहिए।
निवेशकों को समयबद्ध प्रक्रियाओं का भरोसा
सैनी ने उद्योगपतियों को निवेश से जुड़ी प्रक्रियाएं सरल, पारदर्शी और समयबद्ध बनाने का भरोसा दिया। उन्होंने गुजरात के निवेशकों को अप्रैल 2027 में प्रस्तावित ‘हैपनिंग हरियाणा’ वैश्विक सम्मेलन में शामिल होने का निमंत्रण भी दिया। यह आयोजन निवेश संबंधी संवाद को आगे बढ़ाने का अवसर होगा।
निवेश प्रस्तावों के लिए आगे की बातचीत महत्वपूर्ण रहेगी। कंपनियों की आवश्यकताओं और उपलब्ध सुविधाओं के बीच तालमेल बनने से परियोजनाओं की व्यावहारिक रूपरेखा तैयार होती है। प्रस्ताव, समझौता ज्ञापन और वास्तविक निवेश अलग-अलग चरण हैं। प्रगति का आकलन करते समय इनका स्पष्ट विवरण होना जरूरी है।
2030-31 तक बड़े औद्योगिक लक्ष्य
राज्य सरकार के अनुसार, ‘मेक इन हरियाणा इंडस्ट्रियल पॉलिसी-2026’ के तहत वर्ष 2030-31 तक करीब पांच लाख करोड़ रुपये का नया निवेश आकर्षित करने और दस लाख से अधिक रोजगार के अवसर पैदा करने का लक्ष्य रखा गया है। गुजरात दौरा इसी व्यापक निवेश अभियान का हिस्सा है। यह रोजगार लक्ष्य पूरी नीति अवधि का है, केवल इस यात्रा से मिले प्रस्तावों का नहीं। hindi.theprint.in
सूरत में निवेशकों के साथ बैठकों और गांधीनगर में रोडशो के जरिए प्रतिनिधिमंडल ने राज्य की औद्योगिक संभावनाएं प्रस्तुत कीं। अब इन संवादों को परियोजनाओं में बदलने की प्रक्रिया पर ध्यान रहेगा। निवेशकों के साथ आगे होने वाली बैठकों, मंजूरियों और परियोजना स्थलों से संबंधित निर्णयों से स्थिति अधिक स्पष्ट होगी।
हरियाणा के लिए प्रस्तावों की बड़ी राशि एक अवसर है। इसका स्थायी लाभ तब दिखाई देगा, जब नई इकाइयां काम शुरू करेंगी और स्थानीय युवाओं की जरूरत के अनुरूप रोजगार उपलब्ध होंगे। फिलहाल दौरे की प्रमुख उपलब्धि उद्योगपतियों की निवेश रुचि और विभिन्न क्षेत्रों से मिले प्रस्ताव हैं।