हरियाणा : ग्रामीण इलाकों में महिलाएं, जो हमेशा कृषि क्षेत्रों में पुरुषों की मदद करती रही हैं, अब ड्रोन का उपयोग करके कीटनाशकों का छिड़काव करके खेतों में एक नई भूमिका निभा रही हैं। जिले की चार महिलाओं ने ड्रोन चलाने का प्रशिक्षण प्राप्त किया है। वे अब 'ड्रोन दीदी' (ड्रोन बहनें) के रूप में पहचानी जाती हैं।

माधोसिंघाना गांव की शकीला (38) और नाथोर गांव की प्रियंका नेहरा (30) सहित महिलाओं ने फरवरी में भारतीय किसान उर्वरक सहकारी (इफको) द्वारा प्रायोजित एक योजना के तहत ड्रोन प्रशिक्षण प्राप्त किया। वे पहले ही ड्रोन की मदद से 500 एकड़ से अधिक क्षेत्र में कीट नियंत्रण अभियान चला चुके हैं।
शकीला और प्रियंका ने इस बात पर जोर दिया कि कीटनाशक छिड़काव के पारंपरिक तरीकों में अधिक शारीरिक प्रयास की आवश्यकता होती है और लागत भी अधिक आती है। उन्होंने कहा कि ड्रोन ने काम आसान कर दिया है।
दसवीं कक्षा उत्तीर्ण कर चुकी शकीला ने इफको और जिला प्रबंधक साहिल कुमार से प्रेरित होकर अपने पति राधे श्याम की मदद से अपने गांव में एक किसान उत्पादक संगठन बनाकर ड्रोन चलाने का प्रशिक्षण लेने का फैसला किया।
उन्होंने नवंबर 2023 में गुरुग्राम में प्रशिक्षण प्राप्त किया। उन्होंने इस पहल के लिए इफको के साथ-साथ केंद्र और राज्य सरकार के प्रति आभार व्यक्त किया।
योजना के तहत महिलाओं को करीब 15 लाख रुपये का एक ड्रोन, ड्रोन और कीटनाशकों के परिवहन के लिए एक इलेक्ट्रिक वाहन दिया जाता है। ड्रोन की बैटरी चार्ज करने के लिए उन्हें एक छोटा जनरेटर भी मिला है। एक ड्रोन आठ बैटरियों के सेट के साथ आता है, जो उन्हें एक दिन में लगभग 25 एकड़ जमीन को कवर करने की अनुमति देता है।
वर्तमान में, महिला पायलट कीटनाशक छिड़काव के लिए प्रति एकड़ 250 रुपये कमाती हैं, जिसमें लगभग पांच से सात मिनट लगते हैं और 10 लीटर पानी का उपयोग होता है। जबकि पारंपरिक विधि का प्रयोग करने पर प्रति एकड़ 125 से 150 लीटर पानी लगता है।
इफको के जिला प्रबंधक साहिल कुमार ने कहा कि जिले की दो महिलाओं को सहकारी पहल के एक हिस्से के रूप में कीटनाशकों के छिड़काव के लिए ड्रोन चलाने का प्रशिक्षण दिया गया था।
इस बीच, माधोसिंघाना गांव के किसान संदीप बेनीवाल और वीरेंद्र कुमार ने कहा कि ड्रोन की मदद से यूरिया का हवाई छिड़काव बेहद सुविधाजनक है, लेकिन यह शारीरिक श्रम की तुलना में महंगा साबित हो रहा है।
उन्होंने बताया कि इफको ड्रोन एक एकड़ में छिड़काव के लिए 400 रुपये लेता है, जबकि मैन्युअल छिड़काव में 150 रुपये प्रति एकड़ का खर्च आता है।
किसानों ने कहा कि इफको को उन पर अतिरिक्त बोझ डालने से बचने के लिए प्रति एकड़ 200 से 250 रुपये के बीच शुल्क लेने पर विचार करना चाहिए।


Tags: