कुर्सी के लिए नेताओं का होगा टेस्ट हरियाणा कांग्रेस ने तैयार किया नया प्लान
कांग्रेस जिलाध्यक्ष की कुर्सी
चंडीगढ़: हरियाणा कांग्रेस ने संगठन में बदलाव और जिलाध्यक्षों के चयन को लेकर नया फॉर्मूला अपनाने की तैयारी की है। अब पार्टी में जिलाध्यक्ष की कुर्सी केवल बड़े नेताओं की सिफारिश या गुटबाजी के आधार पर नहीं मिलेगी, बल्कि दावेदारों की योग्यता, संगठन के प्रति निष्ठा और जमीनी पकड़ को परखने के लिए परीक्षा जैसी प्रक्रिया से गुजरना होगा।
कांग्रेस ने जिला अध्यक्षों के चयन में पारदर्शिता लाने के लिए आवेदन प्रक्रिया में कई तरह की जानकारियां मांगी हैं। दावेदारों से उनके राजनीतिक अनुभव, पार्टी में सक्रियता, पुराने पदों और संगठन के लिए किए गए काम का विवरण लिया जा रहा है। इसके अलावा सोशल मीडिया सक्रियता और स्थानीय स्तर पर पकड़ से जुड़े सवाल भी पूछे जा रहे हैं।
पार्टी का उद्देश्य लंबे समय से चली आ रही सिफारिशी संस्कृति और गुटबाजी को कम करना है। कांग्रेस नेतृत्व चाहता है कि जिला अध्यक्ष ऐसे कार्यकर्ताओं में से चुने जाएं जो बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत कर सकें और चुनावी मैदान में पार्टी के लिए प्रभावी भूमिका निभा सकें।
बताया जा रहा है कि दावेदारों से यह भी पूछा जा रहा है कि वे कांग्रेस से कब जुड़े, पार्टी में उन्हें कौन-कौन सी जिम्मेदारियां मिलीं और उन्होंने संगठन के लिए क्या काम किया। इसके अलावा यदि कोई नेता पहले किसी अन्य राजनीतिक दल से जुड़ा रहा है तो उसकी जानकारी भी मांगी जा रही है।
इस नई प्रक्रिया के तहत पर्यवेक्षक जिलों में जाकर नेताओं और कार्यकर्ताओं से बातचीत करेंगे। इसके बाद योग्य उम्मीदवारों का पैनल तैयार कर हाईकमान को भेजा जाएगा। अंतिम फैसला पार्टी नेतृत्व की ओर से लिया जाएगा।
हरियाणा कांग्रेस लंबे समय से अपने संगठन को मजबूत करने की कोशिश में जुटी है। पार्टी ने हाल ही में ब्लॉक स्तर पर भी नियुक्तियां की हैं, जिसका उद्देश्य बूथ स्तर तक संगठन को सक्रिय करना बताया गया है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि जिलाध्यक्ष का पद किसी भी पार्टी के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि जिला संगठन ही चुनावी रणनीति को जमीन पर लागू करता है। ऐसे में कांग्रेस का यह नया प्रयोग आगामी चुनावों को ध्यान में रखते हुए संगठन को मजबूत करने की कवायद के रूप में देखा जा रहा है।
हालांकि इस प्रक्रिया से उन नेताओं के लिए चुनौती बढ़ सकती है जो केवल राजनीतिक संपर्कों के दम पर पद हासिल करने की कोशिश करते रहे हैं। अब उन्हें अपनी संगठन क्षमता, कार्यकर्ताओं के बीच पकड़ और पार्टी के प्रति सक्रियता साबित करनी होगी।
कांग्रेस के इस कदम से साफ संकेत मिल रहे हैं कि पार्टी जमीनी स्तर पर मजबूत संगठन तैयार करने पर जोर दे रही है। अब देखना होगा कि परीक्षा और मूल्यांकन की यह प्रक्रिया कितनी सफल साबित होती है और इससे चुने गए जिलाध्यक्ष चुनावी मैदान में पार्टी को कितना फायदा पहुंचा पाते हैं।