IDFC First Bank ‘धोखाधड़ी’ मामला, पांच शहरों में तलाशी के बाद ED ने 90 बैंक खाते फ्रीज़ किए
Chandigarh.चंडीगढ़: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने शुक्रवार को बताया कि IDFC First Bank से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में हाल ही में की गई तलाशी के बाद उसने 90 बैंक खाते फ्रीज़ कर दिए हैं। इस मामले में आरोप है कि हरियाणा सरकार के 590 करोड़ रुपये के फंड का गबन किया गया है।
केंद्रीय जांच एजेंसी ने दावा किया कि इस कथित धोखाधड़ी के तरीके (modus operandi) में कई शेल (डमी) कंपनियों का इस्तेमाल करना और सोने की खरीद के लिए फर्जी बिलिंग करना शामिल है।
ED ने 11 मार्च को चंडीगढ़ ट्राईसिटी (चंडीगढ़, पंजाब का मोहाली और हरियाणा का पंचकूला), गुरुग्राम (हरियाणा) और बेंगलुरु (कर्नाटक) में कुल 19 जगहों पर तलाशी ली।
ED ने एक बयान में कहा कि जांच में पता चला कि आरोपियों ने कई शेल संस्थाओं के ज़रिए फंड को घुमाकर और उसकी लेयरिंग करके जनता के पैसे का गबन किया।
एजेंसी ने बताया कि ज़्यादातर फंड ज्वैलर्स के बैंक खातों के ज़रिए भेजा गया, ताकि फर्जी बिलिंग के ज़रिए सोने की खरीद का भ्रम पैदा किया जा सके।
एजेंसी ने इस मामले में शामिल एक शेल कंपनी की पहचान 'स्वस्तिक देश प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड' के तौर पर की है, जिसके पार्टनर स्वाति सिंगला और अभिषेक सिंगला हैं।
एजेंसी ने बताया कि यह घोटाला पिछले एक साल से चल रहा था और इसमें बैंक के पूर्व कर्मचारियों की मदद ली गई थी, जिनमें ऋभव ऋषि भी शामिल हैं। एजेंसी के मुताबिक, "अपराध से मिली रकम" को ऋषि और उनकी पत्नी दिव्या अरोड़ा के खातों में "बांट दिया गया" था।
ED ने कहा, "तलाशी के दौरान 90 से ज़्यादा बैंक खाते फ्रीज़ किए गए हैं, और डिजिटल तथा दस्तावेज़ी सबूतों के रूप में कई अहम चीज़ें ज़ब्त की गई हैं।"
ये छापे तब मारे गए जब एजेंसी ने हरियाणा राज्य सतर्कता और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की FIR का संज्ञान लेते हुए 'मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम' (PMLA) के तहत एक मामला दर्ज किया।
ब्यूरो के मुताबिक, इस जांच के तहत अब तक 11 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जिनमें बैंक के छह कर्मचारी, चार आम नागरिक और एक सरकारी अधिकारी शामिल हैं।