कुरुक्षेत्र। हरियाणा सिख गुरुद्वारा मैनेजमेंट कमेटी (HSGMC) और शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) के बीच लंबे समय से चल रहे विवाद के बीच सोमवार को बड़ा घटनाक्रम सामने आया। HSGMC ने कुरुक्षेत्र स्थित मीरी-पीरी संस्थान का कार्यभार संभाल लिया है। 72 घंटे का अल्टीमेटम पूरा होने के बाद HSGMC के पदाधिकारी संस्थान पहुंचे और उन्होंने सेवा संभालने की घोषणा की।
HSGMC प्रधान जगदीश सिंह जिंदा कार्यकारिणी के अन्य सदस्यों और पदाधिकारियों के साथ सोमवार सुबह मीरी-पीरी संस्थान पहुंचे। यहां पहुंचकर उन्होंने विधिवत रूप से संस्थान की जिम्मेदारी संभालने की जानकारी दी। इस दौरान बड़ी संख्या में कमेटी के सदस्य और समर्थक भी मौजूद रहे।
HSGMC की ओर से बताया गया कि पिछले कई महीनों से संस्थान की सेवा संभालने को लेकर SGPC के साथ बातचीत चल रही थी। इसके लिए HSGMC कार्यकारिणी की बैठक बुलाकर सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया गया था। इसके बाद SGPC को पत्र भेजकर संस्थान की सेवा सौंपने के लिए 72 घंटे का समय दिया गया था।
HSGMC प्रधान जगदीश सिंह जिंदा ने कहा कि तय समय सीमा पूरी होने के बावजूद SGPC की ओर से कोई कदम नहीं उठाया गया। इसके बाद कमेटी ने निर्णय लेते हुए सोमवार को मीरी-पीरी संस्थान पहुंचकर कार्यभार संभाल लिया। उन्होंने कहा कि यह कदम संस्थान की व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के उद्देश्य से उठाया गया है।
गौरतलब है कि मीरी-पीरी संस्थान की सेवा संभालने को लेकर पिछले कई महीनों से दोनों सिख संस्थाओं के बीच विवाद चल रहा था। इस मामले को लेकर कई बार तनाव की स्थिति भी बनी। कुछ समय पहले विवाद इतना बढ़ गया था कि मौके पर हाथापाई की नौबत तक आ गई थी। पुलिस को हस्तक्षेप कर स्थिति को शांत कराना पड़ा था।
इसके बाद से ही HSGMC और SGPC की ओर से लगातार अपने-अपने पक्ष रखे जा रहे थे। दोनों संस्थाएं संस्थान के प्रबंधन और सेवा अधिकार को लेकर दावे कर रही थीं। विवाद के कारण क्षेत्र में भी इस मामले को लेकर चर्चा बनी हुई थी।
इस पूरे मामले में 12 मई को अदालत की ओर से हरियाणा कमेटी के पक्ष में फैसला आने के बाद भी कार्यभार संभालने को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं थी। इसके चलते कई तरह की अटकलें लगाई जा रही थीं। अब HSGMC द्वारा कार्यभार संभालने के बाद इन चर्चाओं पर विराम लग गया है।
हालांकि SGPC की ओर से इस मामले में अदालत में रिव्यू पिटीशन दायर की गई है। इस याचिका पर सुनवाई की प्रक्रिया भी जारी है। HSGMC मुख्यालय के अतिरिक्त सचिव सहित अन्य अधिकारी अदालत में होने वाली सुनवाई में शामिल होने पहुंचे हैं।
HSGMC का कहना है कि अदालत के फैसले और निर्धारित प्रक्रिया के तहत ही संस्थान की सेवा संभाली गई है। वहीं SGPC की ओर से कानूनी रास्ते के जरिए अपने पक्ष को आगे बढ़ाया जा रहा है। अब इस मामले में अदालत की आगे की कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
मीरी-पीरी संस्थान सिख समुदाय के लिए महत्वपूर्ण धार्मिक और शैक्षणिक केंद्रों में से एक माना जाता है। ऐसे में इसके प्रबंधन को लेकर दोनों संस्थाओं के बीच चल रहा विवाद काफी समय से चर्चा का विषय बना हुआ था। सोमवार की कार्रवाई के बाद एक बार फिर यह मामला सुर्खियों में आ गया है।
फिलहाल HSGMC ने संस्थान की जिम्मेदारी संभाल ली है, लेकिन SGPC की रिव्यू पिटीशन और अदालत की आगामी सुनवाई के बाद ही इस मामले की अंतिम स्थिति स्पष्ट हो पाएगी। दोनों पक्षों के बीच चल रही कानूनी प्रक्रिया के कारण आने वाले दिनों में इस विवाद पर सभी की नजर बनी रहेगी।