Hisar: पशुपालकों के लिए राहत, बार-बार गर्भाधान की समस्या पर नया समाधान
पशुओं में बार-बार गर्भ न ठहरने की समस्या का मिलेगा समाधान
हिसार: दुधारू पशुओं में बार-बार गर्भाधान के बावजूद गर्भधारण नहीं होने और समय पर हीट (गर्मी) में न आने जैसी समस्याओं से परेशान पशुपालकों के लिए राहत की खबर है। लाला लाजपत राय पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय (लुवास), हिसार के वैज्ञानिकों द्वारा विकसित ‘पशुओं में सफल गर्भधारण के लिए सहायक पंजिका’ को भारत सरकार ने आधिकारिक कॉपीराइट प्रदान किया है।
लुवास की यह उपलब्धि पशु प्रजनन अनुसंधान और डेयरी विकास के क्षेत्र में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। यह तकनीक पशुपालकों को दुधारू पशुओं में प्रजनन संबंधी समस्याओं का वैज्ञानिक और व्यावहारिक समाधान उपलब्ध कराने में मदद करेगी।
चार वैज्ञानिकों को मिला कॉपीराइट
यह कॉपीराइट हरियाणा पशु विज्ञान केंद्र, महेंद्रगढ़ के वैज्ञानिकों डॉ. दविंदर सिंह, डॉ. ज्योति शुन्थ्वल, डॉ. आनंद कुमार पाण्डेय और डॉ. सुजॉय खन्ना को संयुक्त रूप से प्रदान किया गया है।
कॉपीराइट मिलने के बाद वैज्ञानिकों ने लुवास के कुलपति प्रो. (डॉ.) विनोद कुमार वर्मा से मुलाकात कर इस उपलब्धि की जानकारी दी। इस दौरान अनुसंधान निदेशक डॉ. सुशीला मान और क्षेत्रीय निदेशक डॉ. दिनेश मित्तल भी मौजूद रहे।
निर्णय लेने में मदद करेगी पंजिका
यह सहायक पंजिका स्टेप-बाय-स्टेप डिसीजन ट्री के रूप में तैयार की गई है। इसमें पशु की स्वास्थ्य स्थिति, प्रजनन इतिहास, लक्षणों और स्थानीय परिस्थितियों के आधार पर सही निर्णय लेने की प्रक्रिया बताई गई है।
पंजिका में इन विषयों पर विस्तृत जानकारी दी गई है:
समय पर हीट न आना
बार-बार गर्भाधान के बाद भी गर्भधारण न होना
साइलेंट हीट की पहचान
कृत्रिम गर्भाधान (AI) का सही समय
असामान्य प्रजनन स्राव की पहचान और उपचार
संतुलित पोषण व मिनरल सप्लीमेंटेशन
वैज्ञानिक पशु प्रबंधन
डेयरी किसानों का आर्थिक नुकसान होगा कम
विशेषज्ञों के अनुसार, यह वैज्ञानिक पंजिका गर्भाधान की सफलता दर बढ़ाने, पशुओं की प्रजनन क्षमता सुधारने और बांझपन व असफल गर्भाधान से होने वाले आर्थिक नुकसान को कम करने में सहायक होगी।
लुवास के कुलपति प्रो. विनोद कुमार वर्मा ने कहा कि विश्वविद्यालय का लक्ष्य शोध और तकनीकों को सीधे किसानों तक पहुंचाना है, ताकि पशुपालकों की आय बढ़े और डेयरी व्यवसाय अधिक लाभकारी बन सके। उन्होंने इसे पशुपालन क्षेत्र में वैज्ञानिक प्रबंधन को बढ़ावा देने वाला महत्वपूर्ण नवाचार बताया।