Hisar: हिसार की नई पहल, बीएमआर ज्वार से पशुओं की सेहत और दुग्ध उत्पादन में सुधार
हिसार: भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के अंतर्गत आने वाले ग्लोबल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस ऑन मिलेट्स ने पशु पोषण और दुग्ध उत्पादन बढ़ाने की दिशा में एक अहम पहल की है। संस्थान ने केंद्रीय भैंस अनुसंधान संस्थान (CIRB), हिसार के न्यूट्रिशन डिवीजन को ‘CSV-59 BMR ज्वार (ब्राउन मिडरिब)’ पर शोध के लिए बड़ी अनुसंधान परियोजना सौंपी है।
यह परियोजना वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. अभिजीत डे के मार्गदर्शन में पूरी की जाएगी। इसके तहत CIRB के रिसर्च फार्म में CSV-59 BMR ज्वार की खेती कर तैयार हरे चारे को भैंसों को खिलाया जाएगा। वैज्ञानिक यह अध्ययन करेंगे कि इस चारे से दूध उत्पादन, पाचन क्षमता, पशुओं के स्वास्थ्य और प्रदर्शन पर कितना सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
कम लिग्निन, ज्यादा पोषण से बढ़ेगा दूध
वैज्ञानिकों के अनुसार CSV-59 BMR ज्वार की सबसे बड़ी विशेषता इसमें कम मात्रा में पाया जाने वाला लिग्निन है। लिग्निन चारे को कठोर बनाता है, जिससे पशु उसे आसानी से पचा नहीं पाते। कम लिग्निन होने के कारण यह चारा भैंसों के लिए अधिक पाच्य है और शरीर को बेहतर पोषण उपलब्ध कराता है, जिससे दूध उत्पादन क्षमता बढ़ सकती है।
यह सिंगल-कट ज्वार किस्म है, जिसकी हरे चारे की औसत पैदावार करीब 300 से 350 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक बताई जा रही है। इसमें लगभग 8 से 9 प्रतिशत क्रूड प्रोटीन पाया जाता है, जो पशुओं के विकास और बेहतर गुणवत्ता वाले दूध के लिए महत्वपूर्ण है।
कई राज्यों के किसानों के लिए फायदेमंद
कृषि वैज्ञानिकों ने इस किस्म को हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, उत्तराखंड, गुजरात, महाराष्ट्र, तेलंगाना और तमिलनाडु जैसे राज्यों की जलवायु और मिट्टी के लिए उपयुक्त बताया है।
हाल ही में CIRB में आयोजित राष्ट्रीय किसान प्रशिक्षण कार्यक्रम में देशभर से आए किसानों ने इस तकनीक को देखा। डॉ. अभिजीत डे ने किसानों को संस्थान के खेतों का भ्रमण करवाकर CSV-59 BMR ज्वार की फसल, इसके पोषण मूल्य और डेयरी व्यवसाय में संभावित लाभों की जानकारी दी।
नई चारा किस्म के फायदे देखकर किसानों में उत्साह देखने को मिला और कई किसानों ने भविष्य में इसे अपने खेतों में अपनाने की इच्छा जताई।