चंडीगढ़: खरीफ सीजन में धान खरीद को लेकर हरियाणा सरकार ने केंद्र सरकार पर दबाव बढ़ा दिया है। राज्य सरकार ने किसानों के हितों को देखते हुए केंद्र से धान खरीद का कोटा बढ़ाने की मांग की है। हरियाणा ने केंद्र से 65 लाख टन धान खरीद की मंजूरी देने का आग्रह किया है, ताकि किसानों को अपनी उपज बेचने में परेशानी का सामना न करना पड़े। हरियाणा सरकार का कहना है कि इस बार राज्य में धान की आवक अधिक रहने की संभावना है। ऐसे में मौजूदा खरीद सीमा किसानों की जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं हो सकती। सरकार चाहती है कि केंद्र अतिरिक्त खरीद की अनुमति दे, जिससे मंडियों में आने वाले धान की समय पर खरीद हो सके और किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) का लाभ मिल सके। धान खरीद व्यवस्था को लेकर राज्य सरकार लगातार केंद्र के संपर्क में है। अधिकारियों का कहना है कि अगर खरीद कोटा नहीं बढ़ाया गया तो मंडियों में धान की आवक बढ़ने पर किसानों को लंबा इंतजार करना पड़ सकता है। इससे उन्हें आर्थिक नुकसान उठाने की आशंका भी बनी रहती है।

हरियाणा देश के प्रमुख धान उत्पादक राज्यों में शामिल है। यहां बड़ी संख्या में किसान धान की खेती पर निर्भर हैं। सरकार का तर्क है कि किसानों की मेहनत और उत्पादन को देखते हुए पर्याप्त खरीद व्यवस्था जरूरी है।
किसानों को समय पर भुगतान पर जोर
राज्य सरकार का कहना है कि धान खरीद प्रक्रिया में तेजी लाने के साथ किसानों को समय पर भुगतान सुनिश्चित करना भी प्राथमिकता है। खरीद एजेंसियों को मंडियों में व्यवस्थाएं मजबूत रखने के निर्देश दिए जा रहे हैं, ताकि किसानों को किसी तरह की परेशानी न हो। मंडियों में बढ़ सकती है धान की आवक धान कटाई के मौसम में मंडियों में बड़ी मात्रा में फसल पहुंचती है। ऐसे में खरीद केंद्रों पर पर्याप्त व्यवस्था, भंडारण और उठान की प्रक्रिया सुचारू रखना बड़ी चुनौती होती है। सरकार का मानना है कि अतिरिक्त कोटे की मंजूरी मिलने से खरीद प्रक्रिया आसान हो जाएगी।
केंद्र के फैसले पर टिकी नजर
अब सभी की नजर केंद्र सरकार के फैसले पर है। अगर 65 लाख टन खरीद की मंजूरी मिलती है तो इससे राज्य के लाखों किसानों को फायदा मिलने की उम्मीद है। वहीं, खरीद कोटा बढ़ने से मंडियों में भी दबाव कम होगा और धान खरीद अभियान बेहतर तरीके से चल सकेगा।
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