हरियाणा Haryana : हाल ही में आग लगने की घटनाओं ने जिले भर में सैकड़ों एकड़ में गेहूं की फसल को नष्ट कर दिया है, जिससे किसानों को भारी नुकसान हुआ है। आग लगने का मुख्य कारण ढीले और क्षतिग्रस्त बिजली के तारों से निकलने वाली चिंगारी माना जा रहा है। किसान संगठन और राजनीतिक नेता सरकार से तत्काल मुआवजे की मांग कर रहे हैं।भारतीय किसान एकता (बीकेई) ने सीएम और सिरसा की सांसद कुमारी शैलजा को ज्ञापन भेजकर त्वरित वित्तीय राहत की मांग की है। बीकेई के अध्यक्ष लखविंदर सिंह औलाख ने कहा कि खेतों से गुजरने वाली खराब बिजली की लाइनें बहुत बड़ा खतरा पैदा करती हैं। कई जगहों पर तार बहुत नीचे लटके हुए हैं और यहां तक कि जमीन को छू रहे हैं। हाल ही में कंवरपुरा गांव में एक कंबाइन हार्वेस्टर में करंट प्रवाहित तार के कारण आग लग गई, जिससे एक किसान की मौत हो गई।
मोरीवाला, रसूलपुर, भंगू और साहूवाला जैसे गांवों के पास की फैक्ट्रियों में कथित तौर पर 24 घंटे बिजली की आपूर्ति होती है। किसानों का दावा है कि इस निरंतर आपूर्ति के कारण चिंगारी निकलती है और आग लगती है। रूपाना, लुदेसर, भंगू, दरबा, सुचान और सिकंदरपुर गांवों में ऐसी घटनाओं के कारण सैकड़ों एकड़ गेहूं की फसल बर्बाद हो गई। कुछ किसानों ने अपने खेतों में लगे सोलर पैनल भी खो दिए। कई किसानों ने खेती के लिए जमीन लीज पर ली थी और अब उनके पास न तो अनाज बचा है और न ही मवेशियों के लिए चारा। बीकेई ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे प्रभावित किसानों की हरसंभव मदद करें। रूपाना के दौरे के दौरान टीम ने कहा कि नुकसान दिल दहला देने वाला है। शैलजा ने कहा कि सरकार हर साल फसल कटाई से पहले ढीले तारों को ठीक करने का दावा करती है, लेकिन आग लगने की घटनाएं जारी हैं,
क्योंकि अक्सर काम सिर्फ कागजों पर होता है। अकेले शुक्रवार को ही हरियाणा भर में आग लगने से करोड़ों रुपये की फसलें जल गईं। उन्होंने विशेष सर्वेक्षण (गिरदावरी) और तत्काल मुआवजे की मांग की। उन्होंने कारखानों को चालू रखते हुए ग्रामीण क्षेत्रों में दिन के समय बिजली काटने के फैसले की भी आलोचना की। उन्होंने पूछा कि अगर खेतों में बिजली बंद है, तो आग कैसे लग रही है। उन्होंने कहा कि अगर सरकार ने भूमिगत बिजली के तार बिछाए होते, तो ये हादसे टाले जा सकते थे। नाथूसरी चोपता के गांव रूपाना खुर्द और लुदेसर में 350 एकड़ से ज्यादा गेहूं और चारा बर्बाद हो गया। स्थानीय विधायक भरत सिंह बेनीवाल ने प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया और मदद का वादा किया। उन्होंने मुख्यमंत्री से 65,000-70,000 रुपये प्रति एकड़ मुआवजा देने का आग्रह किया। कई किसानों ने 60,000-70,000 रुपये प्रति एकड़ प्रति वर्ष के हिसाब से जमीन पट्टे पर ली थी और अब वे गंभीर वित्तीय संकट का सामना कर रहे हैं।