Haryana हरियाणा में स्कूल छोड़ रहे बच्चे, शिक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

हरियाणा में स्कूली शिक्षा व्यवस्था को लेकर एक बार फिर चिंता बढ़ गई है। राज्य में स्कूल छोड़ने वाले बच्चों यानी ड्रॉपआउट छात्रों की संख्या शिक्षा विभाग के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही है। बच्चों का बीच में ही पढ़ाई छोड़ देना न केवल उनके भविष्य पर असर डाल रहा है, बल्कि सरकार की शिक्षा नीतियों और स्कूलों में उपलब्ध सुविधाओं पर भी सवाल खड़े कर रहा है।

ड्रॉपआउट के पीछे कई कारण सामने आते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण कई परिवार बच्चों को पढ़ाई के बजाय काम में लगाने को मजबूर हो जाते हैं। वहीं, कुछ जगहों पर स्कूलों की दूरी, शिक्षकों की कमी, आधारभूत सुविधाओं का अभाव और परिवहन की समस्या भी बच्चों के स्कूल छोड़ने की वजह बनती है। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल स्कूलों में दाखिला बढ़ाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि बच्चों को लगातार शिक्षा से जोड़कर रखना भी जरूरी है। इसके लिए स्कूलों में बेहतर माहौल, नियमित काउंसलिंग, अभिभावकों की भागीदारी और कमजोर छात्रों के लिए विशेष सहायता की जरूरत है।

हरियाणा सरकार की ओर से समय-समय पर बच्चों को शिक्षा से जोड़ने के लिए कई योजनाएं चलाई जाती रही हैं। इनमें मुफ्त किताबें, यूनिफॉर्म, छात्रवृत्ति और डिजिटल शिक्षा जैसी सुविधाएं शामिल हैं। इसके बावजूद कुछ क्षेत्रों में ड्रॉपआउट की समस्या बनी हुई है। शिक्षा विभाग के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि स्कूल छोड़ चुके बच्चों को दोबारा शिक्षा की मुख्यधारा में कैसे लाया जाए। इसके लिए विशेष अभियान चलाने, घर-घर सर्वे करने और अभिभावकों को जागरूक करने की जरूरत महसूस की जा रही है।

जानकारों का कहना है कि अगर समय रहते इस समस्या पर ध्यान नहीं दिया गया तो इसका असर राज्य की साक्षरता दर और युवाओं के भविष्य पर पड़ सकता है। शिक्षा किसी भी राज्य के विकास की नींव होती है, इसलिए बच्चों का स्कूल से दूर होना एक गंभीर सामाजिक और आर्थिक चिंता का विषय है। हरियाणा जैसे तेजी से विकसित हो रहे राज्य में शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए जरूरी है कि ड्रॉपआउट के वास्तविक कारणों की पहचान कर प्रभावी कदम उठाए जाएं। बच्चों को स्कूल तक लाना ही नहीं, बल्कि उन्हें पढ़ाई पूरी करने तक बनाए रखना सरकार और समाज दोनों की जिम्मेदारी है।


Tags: