बेंगलुरु: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) को हासिल करने और दुनिया की बड़ी चुनौतियों से निपटने के लिए एक प्रभावी माध्यम बनाने पर जोर दिया गया है। कर्नाटक के IT/BT और गृह मंत्री प्रियांक खड़गे ने कहा कि AI का इस्तेमाल केवल तकनीकी विकास तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसे समाज और मानवता के सामने मौजूद जटिल समस्याओं के समाधान में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभानी चाहिए।
प्रियांक खड़गे यह बात ‘सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स को हासिल करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल’ विषय पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के उद्घाटन समारोह में बोल रहे थे। इस सम्मेलन का आयोजन वॉल्वरहैम्प्टन-बेंगलुरु सेंटर फॉर रिसर्च एंड इनोवेशन (WBCR&I) की ओर से किया गया था।
उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आने वाले समय में शासन व्यवस्था, स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यावरण और आर्थिक विकास जैसे क्षेत्रों में बड़ा बदलाव ला सकता है। जरूरत इस बात की है कि AI का उपयोग जिम्मेदारी और पारदर्शिता के साथ किया जाए, ताकि इसका लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुंच सके।
सम्मेलन के दौरान AI से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई। इनमें AI यूनिवर्सिटी की स्थापना, सरकारी कामकाज और प्रशासन में AI का उपयोग, राज्यभर में कौशल विकास को बढ़ावा देना और डेटा संप्रभुता जैसे मुद्दे प्रमुख रहे।
बैठक में इस बात पर भी विचार-विमर्श किया गया कि AI का इस्तेमाल टैक्स प्रशासन को अधिक प्रभावी बनाने, धोखाधड़ी की पहचान करने, स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने और परीक्षाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने में कैसे किया जा सकता है।
प्रियांक खड़गे ने कहा कि AI के माध्यम से सरकारी सेवाओं को अधिक तेज, पारदर्शी और नागरिकों के अनुकूल बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि तकनीक का उद्देश्य लोगों के जीवन को आसान बनाना होना चाहिए और AI इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
उन्होंने सतत विकास लक्ष्यों का जिक्र करते हुए कहा कि दुनिया जलवायु परिवर्तन, स्वास्थ्य संकट, संसाधनों की कमी और सामाजिक असमानता जैसी कई चुनौतियों का सामना कर रही है। इन समस्याओं के समाधान के लिए आधुनिक तकनीकों का सही इस्तेमाल जरूरी है।
हालांकि, गृह मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि बैठक के बाद किसी आधिकारिक समझौते या नई नीति की घोषणा नहीं की गई है। उन्होंने कहा कि चर्चा का उद्देश्य AI से जुड़े संभावित क्षेत्रों की पहचान करना और भविष्य की रणनीति तैयार करने के लिए विचार साझा करना था।
सम्मेलन में विशेषज्ञों, शोधकर्ताओं, शिक्षाविदों और तकनीकी क्षेत्र से जुड़े लोगों ने हिस्सा लिया। उन्होंने AI के अवसरों के साथ-साथ इससे जुड़े जोखिमों और चुनौतियों पर भी चर्चा की।
विशेषज्ञों का कहना है कि AI के विस्तार के साथ डेटा सुरक्षा, गोपनीयता और नैतिक उपयोग जैसे मुद्दे भी महत्वपूर्ण हो जाते हैं। सरकारों और संस्थानों को ऐसी नीतियां तैयार करनी होंगी, जिनसे तकनीक का लाभ अधिकतम लोगों तक पहुंचे और इसके दुरुपयोग को रोका जा सके।
डेटा सॉवरेनिटी पर हुई चर्चा में इस बात पर जोर दिया गया कि डिजिटल युग में डेटा की सुरक्षा और नियंत्रण बेहद महत्वपूर्ण है। सरकारी सेवाओं और नागरिकों से जुड़े डेटा का सुरक्षित प्रबंधन भविष्य की डिजिटल व्यवस्था के लिए आवश्यक होगा।
स्वास्थ्य क्षेत्र में AI के इस्तेमाल को लेकर भी चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने बताया कि AI आधारित तकनीक बीमारी की पहचान, उपचार योजना और स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच को बेहतर बनाने में मदद कर सकती है।
इसी तरह, शिक्षा और परीक्षा प्रणाली में AI के उपयोग पर भी विचार किया गया। परीक्षा में धोखाधड़ी रोकने, निगरानी व्यवस्था मजबूत करने और विद्यार्थियों के लिए बेहतर सीखने के अवसर तैयार करने में AI की भूमिका पर चर्चा हुई।
कर्नाटक सरकार लंबे समय से तकनीकी क्षेत्र में अपनी भूमिका को मजबूत करने की दिशा में काम कर रही है। बेंगलुरु को देश के प्रमुख टेक्नोलॉजी केंद्रों में से एक माना जाता है और ऐसे में AI आधारित नवाचारों को बढ़ावा देने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
प्रियांक खड़गे ने कहा कि कर्नाटक तकनीकी विकास और नवाचार के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि AI को केवल उद्योगों तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए, बल्कि इसका इस्तेमाल आम लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए किया जाना चाहिए।
कुल मिलाकर, अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में AI के उपयोग को लेकर व्यापक चर्चा हुई। सरकार, विशेषज्ञों और शोधकर्ताओं ने इस बात पर सहमति जताई कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस भविष्य की महत्वपूर्ण तकनीक है, जिसका जिम्मेदार और समावेशी इस्तेमाल सतत विकास के लक्ष्यों को हासिल करने में मददगार साबित हो सकता है।