रोहतक। राज्य भर के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में डॉक्टरों की भर्ती अब रिजर्वेशन रोस्टर के आधार पर की जाएगी। सरकार ने यह कदम भर्ती प्रक्रिया में विभिन्न वर्गों को नियमानुसार प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया है। इसके तहत सभी सरकारी मेडिकल कॉलेजों के निदेशकों को अपने संस्थानों में स्वीकृत सभी पदों का आरक्षण रोस्टर तैयार कर सामाजिक कल्याण विभाग से मंजूर कराने और उसे निर्धारित समयसीमा के भीतर जमा करने के निर्देश दिए गए हैं।

यह फैसला सोमवार को सरकारी मेडिकल कॉलेजों के निदेशकों के साथ हुई बैठक में लिया गया। बैठक की अध्यक्षता पंडित बीडी शर्मा यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज, रोहतक के वाइस चांसलर एचके अग्रवाल ने की। उन्होंने कॉलेज प्रशासन को भर्ती प्रक्रिया में आरक्षण से संबंधित नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

सभी स्वीकृत पदों का रोस्टर तैयार करने के निर्देश

वाइस चांसलर एचके अग्रवाल ने कहा कि सरकारी मेडिकल कॉलेजों को अपने यहां स्वीकृत सभी पदों के लिए रिजर्वेशन रोस्टर तैयार करना होगा। इस रोस्टर को सामाजिक कल्याण विभाग के स्थानीय कार्यालय से मंजूरी लेना जरूरी होगा।

उन्होंने कॉलेज निदेशकों से कहा कि मंजूर रोस्टर को एक सप्ताह के भीतर पंडित बीडी शर्मा यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज, रोहतक में जमा कराया जाए। इसके बाद भर्ती प्रक्रिया को इसी स्वीकृत रोस्टर के आधार पर आगे बढ़ाया जाएगा।

अग्रवाल ने स्पष्ट किया कि रोस्टर को संबंधित विभाग से मंजूरी मिलने के बाद ही उसे भर्ती के लिए आधार बनाया जाएगा। इससे यह सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी कि नियुक्तियों के दौरान विभिन्न आरक्षित और अनारक्षित वर्गों को उनके निर्धारित प्रावधानों के अनुसार प्रतिनिधित्व मिले।

भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता पर जोर

बैठक में भर्ती प्रक्रिया को व्यवस्थित और पारदर्शी बनाने पर भी जोर दिया गया। सरकारी मेडिकल कॉलेजों में बड़ी संख्या में डॉक्टरों और शिक्षकों के पद होते हैं। ऐसे में विभिन्न पदों पर नियुक्ति के दौरान आरक्षण नियमों का पालन महत्वपूर्ण माना जाता है।

वाइस चांसलर ने कहा कि कॉलेजों की ओर से जमा कराया जाने वाला रोस्टर संबंधित विभाग से विधिवत स्वीकृत होना चाहिए। इससे बाद में भर्ती को लेकर किसी तरह की असमंजस की स्थिति पैदा होने की संभावना कम होगी।

मंजूर रोस्टर के आधार पर भर्ती करने से यह भी स्पष्ट रहेगा कि किस पद पर किस श्रेणी के उम्मीदवारों के लिए प्रावधान लागू होगा। इससे भर्ती प्रक्रिया में एकरूपता लाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

सामाजिक कल्याण विभाग की भूमिका अहम

नई व्यवस्था में सामाजिक कल्याण विभाग की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। सरकारी मेडिकल कॉलेजों द्वारा तैयार किए गए रोस्टर की जांच और मंजूरी विभाग के स्थानीय कार्यालय से कराई जाएगी।

इसके बाद मेडिकल कॉलेजों को स्वीकृत रोस्टर विश्वविद्यालय के पास जमा कराना होगा। विश्वविद्यालय स्तर पर इन दस्तावेजों के आधार पर आगे की प्रक्रिया को व्यवस्थित किया जाएगा।

इस व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि भर्ती से पहले आरक्षण से जुड़े सभी पहलुओं को स्पष्ट कर लिया जाए। इससे नियुक्ति प्रक्रिया के दौरान किसी तरह की तकनीकी या प्रशासनिक समस्या से बचने में भी मदद मिल सकती है।

मेडिकल कॉलेजों में मानव संसाधन मजबूत करने की कोशिश

सरकारी मेडिकल कॉलेजों में डॉक्टरों और अन्य चिकित्सा शिक्षकों की उपलब्धता स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। मेडिकल कॉलेजों में मरीजों के इलाज के साथ-साथ मेडिकल छात्रों की पढ़ाई और प्रशिक्षण की जिम्मेदारी भी होती है।

ऐसे में स्वीकृत पदों पर समय पर भर्ती होना जरूरी है। नई व्यवस्था के तहत भर्ती प्रक्रिया को आरक्षण नियमों के अनुरूप आगे बढ़ाने के साथ-साथ कॉलेजों में मानव संसाधन की जरूरतों को पूरा करने पर भी ध्यान दिया जा रहा है।

डॉक्टरों के पदों को भरने से मेडिकल कॉलेजों में मरीजों की सेवा और शैक्षणिक गतिविधियों दोनों को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

एक सप्ताह की समयसीमा

बैठक में सबसे महत्वपूर्ण निर्देश सभी स्वीकृत पदों का रोस्टर तैयार कर उसे निर्धारित समय में जमा कराने को लेकर रहा। कॉलेज निदेशकों को एक सप्ताह की समयसीमा दी गई है।

उन्हें अपने संस्थान के सभी मंजूर पदों का विवरण तैयार कर सामाजिक कल्याण विभाग के स्थानीय कार्यालय से रोस्टर की मंजूरी लेनी होगी। इसके बाद मंजूर दस्तावेज विश्वविद्यालय में जमा कराने होंगे।

प्रशासन की ओर से समयसीमा तय किए जाने से यह संकेत मिलता है कि भर्ती प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में देरी नहीं करने की कोशिश की जा रही है।

सभी वर्गों को प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने का लक्ष्य

वाइस चांसलर एचके अग्रवाल ने कहा कि स्वीकृत रोस्टर के आधार पर भर्ती किए जाने से सभी कैटेगरी को उनका उचित प्रतिनिधित्व मिलना सुनिश्चित होगा। उन्होंने कॉलेजों को इस प्रक्रिया में किसी भी तरह की लापरवाही से बचने और निर्धारित नियमों का पालन करने के निर्देश दिए।

आरक्षण रोस्टर सरकारी नियुक्तियों में विभिन्न वर्गों के लिए निर्धारित पदों का क्रम और विवरण तय करने का महत्वपूर्ण माध्यम है। ऐसे में इसे पहले से स्वीकृत कराना भर्ती प्रक्रिया को अधिक स्पष्ट बनाने में मदद कर सकता है।

कॉलेजों को अब करना होगा अनुपालन

सोमवार की बैठक के बाद अब राज्य के सभी सरकारी मेडिकल कॉलेजों के निदेशकों के सामने रोस्टर तैयार करने और उसे मंजूर कराने की जिम्मेदारी है। एक सप्ताह के भीतर विश्वविद्यालय में दस्तावेज जमा कराने के निर्देश के बाद कॉलेज प्रशासन को प्रक्रिया तेजी से पूरी करनी होगी।

आने वाले समय में इन्हीं स्वीकृत रोस्टर के आधार पर डॉक्टरों की नियुक्ति की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। इससे एक ओर सरकारी मेडिकल कॉलेजों में खाली पदों को भरने का रास्ता साफ होगा, वहीं दूसरी ओर भर्ती प्रक्रिया में आरक्षण संबंधी नियमों का पालन सुनिश्चित करने की व्यवस्था भी मजबूत होगी।

कुल मिलाकर, राज्य सरकार और स्वास्थ्य शिक्षा प्रशासन का यह कदम सरकारी मेडिकल कॉलेजों में डॉक्टरों की भर्ती को निर्धारित आरक्षण व्यवस्था के अनुरूप संचालित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब सभी की नजर इस बात पर होगी कि मेडिकल कॉलेज निर्धारित समय में रोस्टर तैयार कर विश्वविद्यालय में जमा करते हैं और इसके बाद भर्ती प्रक्रिया कितनी तेजी से आगे बढ़ती है।

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