साइबर फ्रॉड का खुलासा: 38 लाख का धोखाधड़ी, 6 गिरफ्तार मास्टरमाइंड चीन में

Update: 2026-01-15 15:03 GMT
Chandigarh चंडीगढ़: पुलिस ने साइबर क्राइम के एक बड़े मामले में 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिसमें शहर के एक दंपति को 38 लाख रुपये के फ्रॉड का शिकार बनाया गया। पुलिस ने यह जानकारी एसपी (साइबर क्राइम) गीतांजलि खंडेलवाल के हवाले से दी। एसपी खंडेलवाल ने बताया कि यह मामला डिजिटल अरेस्ट (ऑनलाइन धोखाधड़ी) का है। आरोपियों ने पीड़ित दंपति को वीडियो कॉल करके डराया और बताया कि वे मुंबई पुलिस से बात कर रहे हैं। कॉल में आरोपियों ने यह दावा किया कि पीड़ित का बैंक खाता मनी लॉन्ड्रिंग के लिए इस्तेमाल किया गया है। इस डर का फायदा उठाकर उन्होंने दंपति से उनके बैंक खाते और अन्य संवेदनशील जानकारी हासिल की।
जांच में सामने आया कि इस मामले का मास्टरमाइंड चीन में स्थित है और अन्य आरोपी इसके माध्यम से भारत में ठगी कर रहे थे। पुलिस ने बताया कि इस तरह के फ्रॉड में विदेश में बैठे अपराधी स्थानीय एजेंटों के जरिए धन उगाहते हैं। यह मामला साइबर फ्रॉड के बढ़ते स्वरूप का उदाहरण है, जहां अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क के जरिए आसानी से लोगों को निशाना बनाया जाता है। घटना के बारे में एसपी ने कहा, "आरोपियों ने आधुनिक तकनीक और सोशल इंजीनियरिंग के माध्यम से पीड़ितों को फंसाया। उन्हें विश्वास दिलाया गया कि उनका बैंक खाता अपराध में शामिल है और यदि सहयोग नहीं किया गया तो उन्हें कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।" इस प्रकार की धोखाधड़ी को रोकने और पीड़ितों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पुलिस ने विशेष जांच शुरू की।
पुलिस ने बताया कि शुरुआती जांच में यह पता चला कि 6 गिरफ्तार आरोपियों में से चार स्थानीय हैं और दो दूसरे राज्यों से जुड़े हैं। सभी आरोपियों ने बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और डिजिटल भुगतान ऐप्स का इस्तेमाल कर फ्रॉड को अंजाम दिया। पुलिस ने उनके पास से कई डिजिटल साक्ष्य भी जब्त किए हैं, जिनमें लेन-देन के रिकॉर्ड और ऑनलाइन चैट्स शामिल हैं। एसपी खंडेलवाल ने नागरिकों को चेतावनी दी कि वे किसी भी अनजान व्यक्ति या कॉलर द्वारा मिली जानकारी पर विश्वास न करें, खासकर जब कोई यह दावा करे कि आपका बैंक खाता या व्यक्तिगत जानकारी किसी अपराध में शामिल है। उन्होंने कहा, "अगर किसी को ऐसा संदेश या कॉल मिलता है, तो तुरंत स्थानीय पुलिस या साइबर क्राइम सेल से संपर्क करें।
पुलिस ने यह भी बताया कि फ्रॉड के मामलों में अक्सर पीड़ितों में डर पैदा किया जाता है और उन्हें तत्काल धन जमा करने के लिए मजबूर किया जाता है। यह केस साइबर क्राइम के आधुनिक रूपों को उजागर करता है, जिसमें तकनीक के जरिए डर और भ्रम फैलाकर लोगों को निशाना बनाया जाता है। इसके साथ ही चंडीगढ़ पुलिस ने पूरे मामले की जाँच को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैलाए जाने वाले साइबर फ्रॉड नेटवर्क से जोड़कर देखा। मास्टरमाइंड की पहचान चीन में हुई है और इसके खिलाफ अंतरराष्ट्रीय सहयोग के जरिए कार्यवाही की जाएगी। पुलिस ने आश्वस्त किया कि सभी आरोपी अदालत के सामने पेश किए जाएंगे और अपराध के पूर्ण निवारण के लिए कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
इस घटना ने शहर में साइबर सुरक्षा की गंभीर आवश्यकता को उजागर किया है। एसपी खंडेलवाल ने कहा कि पुलिस लगातार साइबर जागरूकता अभियान चला रही है और नागरिकों को सुरक्षित ऑनलाइन व्यवहार के प्रति प्रशिक्षित किया जा रहा है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे अपने बैंक खाते, पासवर्ड और व्यक्तिगत जानकारी को सुरक्षित रखें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को दें।
यह मामला इस बात का प्रमाण है कि डिजिटल दुनिया में सावधानी बरतना आवश्यक है। सरकार और पुलिस साइबर क्राइम रोकने के लिए नए उपायों और तकनीकी निगरानी का सहारा ले रहे हैं।
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