चंडीगढ़: पंजाब में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस संगठनात्मक तैयारियों को मजबूत करने में जुट गई है। इसी क्रम में पार्टी ने हरियाणा कांग्रेस के दो पूर्व प्रदेश अध्यक्षों, उदय भान और अशोक तंवर को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी है। दोनों नेताओं को ‘वोट बचाओ-देश बचाओ’ अभियान के तहत पर्यवेक्षक नियुक्त किया गया है। वे निर्धारित क्षेत्रों में अभियान की गतिविधियों की निगरानी करेंगे और अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के पर्यवेक्षकों के साथ मिलकर काम करेंगे। पंजाब कांग्रेस की इस नियुक्ति से पड़ोसी राज्य के अनुभवी नेताओं की संगठनात्मक भूमिका बढ़ी है। 
पार्टी की ओर से तय व्यवस्था के अनुसार उदय भान को मानसा, संगरूर, पटियाला और बरनाला की जिम्मेदारी दी गई है। अशोक तंवर रूपनगर, फतेहगढ़ साहिब, खन्ना, मोहाली और मलेरकोटला में अभियान से संबंधित काम देखेंगे। दोनों नेता अपने निर्धारित क्षेत्रों में केंद्रीय पर्यवेक्षकों के दौरों के दौरान सहयोग करेंगे। पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष परगट सिंह ने जिला कांग्रेस समितियों और संबंधित संगठनों को पर्यवेक्षकों के साथ सहयोग करने के निर्देश दिए हैं। इससे अभियान के संचालन में स्थानीय इकाइयों की भागीदारी भी रहेगी। 
इस अभियान के लिए हरदीप सिंह किंगरा को मुख्य समन्वयक बनाया गया है। इसके अलावा पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के छह पर्यवेक्षक नियुक्त किए गए हैं, जिन्हें केंद्रीय पर्यवेक्षकों की सहायता करनी है। उदय भान और अशोक तंवर इसी व्यवस्था का हिस्सा होंगे। जिम्मेदारियों का यह बंटवारा प्रदेश स्तर पर अभियान के समन्वय और अलग-अलग क्षेत्रों में उसके संचालन के लिए किया गया है। केंद्रीय पर्यवेक्षकों के पंजाब दौरे के दौरान संबंधित प्रदेश पर्यवेक्षक उनके साथ रहकर काम करेंगे। 
पर्यवेक्षक के तौर पर दोनों नेताओं का काम स्थानीय संगठन और केंद्रीय स्तर से आए पदाधिकारियों के बीच तालमेल बनाना होगा। संबंधित क्षेत्रों में अभियान की गतिविधियों पर नजर रखने के साथ वे स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं से संवाद करेंगे। संगठनात्मक कार्यक्रमों को आगे बढ़ाने में सहयोग भी उनकी जिम्मेदारी का हिस्सा रहेगा। इस व्यवस्था से कांग्रेस अलग-अलग जिलों में अभियान के संचालन को व्यवस्थित करना चाहती है। नियुक्तियों के बाद अब दोनों नेताओं की भूमिका उनके निर्धारित क्षेत्रों में होने वाली गतिविधियों और स्थानीय इकाइयों के साथ समन्वय के रूप में सामने आएगी। 
उदय भान हरियाणा में लंबे समय से सक्रिय रहे हैं और चार बार विधायक रह चुके हैं। अप्रैल 2022 में उन्हें हरियाणा प्रदेश कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष बनाया गया था। प्रदेश संगठन का नेतृत्व करने के दौरान उनका काम जिला इकाइयों, पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं से जुड़ा रहा है। पंजाब में मिली जिम्मेदारी में भी संगठन के अलग-अलग स्तरों के बीच संपर्क अहम रहेगा। उनके अनुभव का उपयोग अभियान की निगरानी और स्थानीय पदाधिकारियों के साथ काम करने में हो सकता है। हालांकि नई भूमिका का वास्तविक असर अभियान के आगे बढ़ने के साथ स्पष्ट होगा। 
अशोक तंवर भी हरियाणा कांग्रेस के अध्यक्ष और सिरसा से लोकसभा सांसद रह चुके हैं। छात्र राजनीति से आगे बढ़े तंवर भारतीय युवा कांग्रेस का नेतृत्व भी कर चुके हैं। वर्ष 2019 में कांग्रेस छोड़ने के बाद वह अन्य राजनीतिक दलों में रहे और बाद में कांग्रेस में लौटे। अब पंजाब में पर्यवेक्षक बनाए जाने से उन्हें संगठनात्मक अभियान में नई भूमिका मिली है। उनके सामने अपने निर्धारित क्षेत्रों में स्थानीय नेतृत्व के साथ मिलकर काम करने की जिम्मेदारी होगी। संसदीय और संगठनात्मक अनुभव के आधार पर वह अभियान में भागीदारी करेंगे। 
इन नियुक्तियों को पंजाब में कांग्रेस की व्यापक चुनावी तैयारियों के संदर्भ में देखा जा सकता है। पार्टी के पंजाब प्रभारी और महासचिव सचिन पायलट ने हाल में कहा था कि कांग्रेस आगामी विधानसभा चुनाव एक मजबूत टीम के रूप में लड़ेगी। उन्होंने चुनाव से पहले मुख्यमंत्री पद का चेहरा घोषित करने की संभावना से इनकार करते हुए कहा था कि जीत के बाद जिम्मेदारियां तय की जाएंगी। पायलट ने पार्टी की जीत का भरोसा भी जताया था। हालांकि कितनी सीटें मिलने की उम्मीद है, इस पर उन्होंने कोई संख्या नहीं बताई थी। 
पायलट के बयान में सामूहिक नेतृत्व पर जोर और अब पर्यवेक्षकों की नियुक्ति, दोनों से संगठन के स्तर पर तैयारी बढ़ाने की दिशा दिखाई देती है। यह एक राजनीतिक आकलन है; चुनावी नतीजों पर इन फैसलों का प्रभाव अभी तय नहीं किया जा सकता। पार्टी ने अनुभवी नेताओं को अभियान में लगाया है, लेकिन जमीन पर काम स्थानीय इकाइयों के सहयोग से ही आगे बढ़ेगा। ऐसे में केंद्रीय पर्यवेक्षकों, प्रदेश पदाधिकारियों और जिला संगठन के बीच नियमित संपर्क इस व्यवस्था की उपयोगिता तय करेगा। 
पंजाब कांग्रेस में हाल में नेतृत्व परिवर्तन भी हुआ है। परगट सिंह को प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने के बाद उनके सामने विभिन्न नेताओं और कार्यकर्ताओं को साथ लेकर चुनावी तैयारियों को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी है। हरियाणा के दोनों पूर्व अध्यक्षों की नियुक्ति इसी दौरान हुई है। अब कांग्रेस की कोशिश अपने अभियान को संबंधित क्षेत्रों तक पहुंचाने और संगठन की सक्रियता बढ़ाने की होगी। उदय भान और अशोक तंवर के लिए स्थानीय कार्यकर्ताओं का सहयोग हासिल करना तथा केंद्रीय पर्यवेक्षकों के साथ प्रभावी तालमेल बनाना नई जिम्मेदारी का प्रमुख हिस्सा रहेगा।
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