गर्वमय: आपने खूब सुने होंगे, हिंदी फिल्मों में भी कोई प्यार में चांद तारे तोड़ लाने का वायदा करता है तो कोई चांद की सैर पर चलने की बात कहता है. यानी चंद्रमा एक उपग्रह होने के अलावा इंसानों के लिए उनकी भावनाओं का इज़हार करने में भी अहम भूमिका निभाता है ज़्यादातर हर किसी ने अपने बचपन में दादा-दादी या मां ब-प से चांद तारों की कहानियां सुनी होंगी, मगर यमुनानगर के एक लाल ने बड़ा होने के बाद बचपन में सुनी हुई कहानियों को सच कर दिखाया. हम बात कर रहे हैं सरोजिनी कॉलोनी में रहने वाले आयुष की.पांच साल पहले कनाडा गए एक बेटे ने अपने माता पिता के लिए भी कुछ इसी अंदाज से अपनी भावनाएं प्रकट की. कनाडा में नौकरी करने वाले बेटे ने अपने मां-पिता के नाम चंद्रमा पर प्लॉट खरीदा है. कोरियर से आए चांद पर खरीदी गई जमीन के दस्तावेज पाकर अपने बेटे से हजारों मील दूर यमुनानगर बैठे मां-पिता फूले नहीं समा रहे हैं. कनाडा में नौकरी करने वाले बेटे ने अपने मां-पिता के नाम चंद्रमा पर प्लॉट खरीदा है. कोरियर से आए चांद पर खरीदी गई जमीन के दस्तावेज पाकर अपने बेटे से हजारों मील दूर यमुनानगर बैठे मां-पिता फूले नहीं समा रहे हैं. पिता का कहना है कि बेटे ने विदेश जाने से पहले कहा था कि वह उनके लिए कुछ ऐसा करेगा जो कल्पनाओं से भी परे होगा.
बेटे ने जो कहा था आखिर वह करके भी दिखा दिया. पिता का कहना है कि बेटे ने विदेश जाने से पहले कहा था कि वह उनके लिए कुछ ऐसा करेगा जो कल्पनाओं से भी परे होगा. बेटे ने जो कहा था आखिर वह करके भी दिखा दिया. कनाडा में जॉब कर रहे आयुष ने पांच सालों के भीतर ही कुछ ऐसा कर दिखाया जिसे देख उसके माता-पिता की आंखें फटी की फटी रह गई. आयुष ने कोरियर के माध्यम से अपने पिता के नाम चंद्रमा पर जमीन खरीद कर उसकी रजिस्ट्री भेज दी. कनाडा में जॉब कर रहे आयुष ने पांच सालों के भीतर ही कुछ ऐसा कर दिखाया जिसे देख उसके माता-पिता की आंखें फटी की फटी रह गई. आयुष ने कोरियर के माध्यम से अपने पिता के नाम चंद्रमा पर जमीन खरीद कर उसकी रजिस्ट्री भेज दी. यमुनानगर में रहने वाले आयुष के पिता सुभाष चंद्र ने बताया कि जब उनके पास चंद्रमा पर खरीदी गई जमीन के दस्तावेज पहुंचे तो उन्हे कुछ समझ ही नहीं आया, लेकिन जैसे ही बेटे ने फोन कर सरप्राईज दिया कि उसने उनके नाम रजिस्ट्री और बोर्डिंग पास भेजा है तो उनका सिर गर्व से ऊंचा हो गया.
यमुनानगर में रहने वाले आयुष के पिता सुभाष चंद्र ने बताया कि जब उनके पास चंद्रमा पर खरीदी गई जमीन के दस्तावेज पहुंचे तो उन्हे कुछ समझ ही नहीं आया, लेकिन जैसे ही बेटे ने फोन कर सरप्राईज दिया कि उसने उनके नाम रजिस्ट्री और बोर्डिंग पास भेजा है तो उनका सिर गर्व से ऊंचा हो गया. सुभाष चंद्र ने बताया कि उन्होंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि उनकी चंद्रमा पर भी जमीन होगी.