Ahmedabad: धार्मिक और पर्यटन स्थलों के विकास के लिए बड़ा फैसला, 10 प्रोजेक्ट मंजूर
गुजरात में पर्यटन विकास की बड़ी पहल, 133 करोड़ की परियोजनाओं को मंजूरी
अहमदाबाद: गुजरात सरकार ने राज्य के पर्यटन और धार्मिक स्थलों के विकास को गति देने के लिए बड़ा फैसला लिया है। राज्य में पर्यटन एवं धार्मिक धामों के कायाकल्प के लिए करीब 133 करोड़ रुपये की लागत वाली 10 विभिन्न परियोजनाओं को सैद्धांतिक मंजूरी दी गई है। इन योजनाओं को राज्य के शहरी विकास एवं शहरी गृह निर्माण विभाग की ओर से मंजूरी दी गई है। यह जानकारी विभाग ने अपने बयान में दी।
मंजूर परियोजनाओं में गिर क्षेत्र के आइकोनिक विकास को प्राथमिकता दी गई है। वहीं, गांधीनगर के रूपाल स्थित प्रसिद्ध वरदायिनी माताजी मंदिर के सर्वांगीण विकास के लिए 35 करोड़ रुपये की राशि मंजूर की गई है। इसके अलावा सौराष्ट्र के गोंडल स्थित ऐतिहासिक अनलगढ़ किले और महाकाली माताजी मंदिर के आसपास के क्षेत्र का विकास किया जाएगा।
दक्षिण गुजरात के नवसारी जिले के वांसदा स्थित उनाई माताजी मंदिर परिसर में भव्य प्रवेश द्वार, प्रदक्षिणा पथ, सांस्कृतिक भवन, भोजनालय और पुस्तकालय सहित विभिन्न सुविधाएं विकसित की जाएंगी। वडोदरा जिले के सावली तहसील के भादरवा गांव में चेहर माताजी मंदिर के पास महीसागर नदी पर आकर्षक घाट का निर्माण किया जाएगा। श्रद्धालुओं और पर्यटकों की सुविधा के लिए यहां वॉकवे, पेवर ब्लॉक, सुरक्षा रेलिंग और लैंडस्केपिंग जैसे कार्य भी किए जाएंगे।
इन परियोजनाओं के लिए मंजूर हुई राशि
गिर क्षेत्र: पर्यटन संबंधी आइकोनिक विकास के लिए 43.91 करोड़ रुपये।
रूपाल, गांधीनगर: वरदायिनी माताजी मंदिर के सर्वांगीण विकास के लिए 35 करोड़ रुपये ।
केसरडी, अहमदाबाद: जोधलपीर मंदिर के नवनिर्माण के लिए 21.75 करोड़ रुपये।
अंजार: गोवर्धन पर्वत के विकास के लिए 12.98 करोड़ रुपये।
गोंडल: अनलगढ़ किला और महाकाली मंदिर के विकास के लिए 5.06 करोड़ रुपये।
वांसदा, नवसारी: उनाई माताजी मंदिर परिसर के विकास के लिए 5.03 करोड़ रुपये।
भादरवा, सावली: महीसागर नदी पर घाट निर्माण के लिए 3.31 करोड़ रुपये।
तरभ, मेहसाणा: वालीनाथ महादेव मंदिर में सोलर परियोजना के लिए 2.68 करोड़ रुपये।
उमरेचा, मेहसाणा: महाकाली माताजी मंदिर के विकास कार्यों के लिए 50 लाख रुपये।
धरमपुर, वलसाड: गोरा रामजी मंदिर के नवनिर्माण के लिए 18.91 लाख रुपये।
इन परियोजनाओं के पूरा होने से धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालुओं के लिए सुविधाओं में विस्तार के साथ पर्यटन गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।