रायपुर। छत्तीसगढ़ में युवा कांग्रेस के संगठनात्मक चुनाव के बीच सियासी घमासान तेज होते जा रहा है। चुनाव प्रक्रिया को लेकर भी अब कई सवाल खड़े हो रहे हैं। खुद कांग्रेसी नेता ही इस पर प्रश्नचिन्ह लगा रहे हैं। सबसे बड़ा सवाल है-क्या युवा कांग्रेस का चुनाव वास्तव में युवाओं की आवाज के आधार पर हो रहा है, या फिर इसमें धनबल और गुटबाजी का प्रभाव बढ़ रहा है? पूर्व मंत्री शिव डहरिया ने आरोप लगाया है कि युवा कांग्रेस चुनाव में रेत उत्खनन के पैसे के इस्तेमाल की चर्चा है। वहीं मुंगेली में कथित फर्जी मतदान को लेकर भी शिकायत सामने आई है, जिसमें मध्य प्रदेश से युवाओं को लाकर मतदान कराने का आरोप लगाया गया है। अंबिकापुर में भी चुनाव प्रक्रिया के दौरान प्रत्याशी की उम्मीदवारी को लेकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं के दो पक्ष आमने-सामने आ गए थे। इससे संगठन के भीतर चल रही खींचतान को लेकर चर्चा और तेज हो गई। ऐसे में सवाल सिर्फ चुनाव जीतने का नहीं है। सवाल है कि युवा कांग्रेस में युवाओं की आवाज कितनी मजबूत है? क्या चुनाव पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से हो रहा है? और अगर आरोप गलत हैं, तो संगठन इन आरोपों पर सार्वजनिक रूप से सफाई क्यों नहीं देता?
युवा कांग्रेस को युवाओं के भविष्य और लोकतांत्रिक राजनीति की नई उम्मीद के रूप में देखा जाता है। ऐसे में चुनाव प्रक्रिया पर उठने वाले हर सवाल का निष्पक्ष जांच और स्पष्ट जवाब के जरिए समाधान होना जरूरी है। जनता और युवा कार्यकर्ताओं की मांग साफ है, कि चुनाव निष्पक्ष हो। प्रतिस्पर्धा में पारदर्शिता हो, धनबल-बाहूबल के बगैर हो और फैसला हो, तो युवाओं की पसंद से हो। ऐसे में देखना होगा कि युवा कांग्रेस नेतृत्व इन गंभीर आरोपों पर क्या जवाब देता है।
धनबल-बाहुबल को तवज्जो, आम कार्यकर्ता उपेक्षित
आज कार्यकर्ताओं के बीच यह सवाल भी चर्चा में है कि क्या यह युवा कांग्रेस का चुनाव है या फिर धनबल, बाहुबल और दबंगई का चुनाव बनता जा रहा है? कुछ लोग तो इसे “गुंडों और कथित माफिया के प्रभाव वाला चुनाव” तक बता रहे हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है। सवाल यह है कि युवा कांग्रेस जैसे संगठन में, जहां युवाओं को लोकतांत्रिक राजनीति का मंच मिलना चाहिए, वहां अगर धनबल, बाहुबल, दबंगई या कथित माफिया प्रभाव की शिकायतें सामने आती हैं, तो संगठन को इसकी निष्पक्ष जांच क्यों नहीं करनी चाहिए? क्या वास्तविक युवा कार्यकर्ताओं को बिना किसी दबाव के अपना प्रतिनिधि चुनने का अधिकार नहीं मिलना चाहिए। युवा कांग्रेस चुनाव पर उठ रहे इन सवालों का जवाब अब संगठन और चुनाव अधिकारियों को देना होगा।
गौरतलब है कि चुनाव प्रक्रिया को लेकर सामने आई गड़बड़ियों, शिकायतों और समस्याओं पर प्रभावित कार्यकर्ताओं का पक्ष सुनने विगत 17, 18 अगस्त को राष्ट्रीय पदाधिकारी भी रायपुर आए थे बावजूद चुनाव प्रक्रिया को लेकर सवाल खड़े होना संगठन और पदाधिकारियों की कमजोरी को उजागर करता है।
फर्जी मतदान का आरोप MP से आए 11 युवाओं को लेकर थाने में शिकायत
छत्तीसगढ़ में चल रहे युवा कांग्रेस के संगठनात्मक चुनाव के बीच मुंगेली जिले में कथित फर्जी मतदान को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। स्थानीय युवा कांग्रेस प्रत्याशियों ने आरोप लगाया है कि पड़ोसी राज्य मध्य प्रदेश से कुछ युवाओं को मुंगेली लाकर संगठनात्मक चुनाव में मतदान कराया गया। मामले को लेकर मुंगेली सिटी कोतवाली थाने में लिखित शिकायत दी गई है। शिकायत के बाद पुलिस ने आरोपों की जांच शुरू कर दी है। शिकायतकर्ताओं ने मध्य प्रदेश से मुंगेली पहुंचे बताए जा रहे 11 युवाओं की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। इनमें नौ युवक और दो युवतियां शामिल होने की बात कही गई है। स्थानीय प्रत्याशियों का आरोप है कि इन लोगों ने युवा कांग्रेस की चुनाव प्रक्रिया में कथित रूप से हिस्सा लिया और मतदान किया। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी जांच के बाद ही हो सकेगी।
सर्किट हाउस में ठहरने का दावा
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि मध्य प्रदेश से आए ये युवक-युवतियां मुंगेली के सर्किट हाउस में ठहरे थे। इसी को आधार बनाकर शिकायतकर्ताओं ने कई सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि बाहरी राज्य से आए इन लोगों को मुंगेली कौन लेकर आया, उनके ठहरने की व्यवस्था किसने की और संगठनात्मक चुनाव में उनकी क्या भूमिका थी, इसकी जांच होनी चाहिए। स्थानीय प्रत्याशियों ने आशंका जताई है कि बाहरी लोगों के जरिए संगठनात्मक चुनाव को प्रभावित करने का प्रयास किया गया। शिकायत में पूरे घटनाक्रम की जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने और किसी तरह की अनियमितता मिलने पर कार्रवाई करने की मांग की गई है।
मतदाता पंजीकरण की भी हो सकती है जांच
मामले की शिकायत सिटी कोतवाली पहुंचने के बाद पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। अब पुलिस के सामने सबसे अहम सवाल यह है कि जिन 11 लोगों को बाहरी बताया जा रहा है, उनकी वास्तविक पहचान क्या है और वे किस उद्देश्य से मुंगेली आए थे। जांच में उनके मुंगेली पहुंचने, सर्किट हाउस में ठहरने की अवधि और कथित मतदान से जुड़े साक्ष्यों की पड़ताल की जा रही है। यह भी महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित युवक-युवतियों का युवा कांग्रेस के संगठनात्मक चुनाव में मतदाता के रूप में पंजीकरण था या नहीं। यदि उनका पंजीकरण था तो यह देखा जाएगा कि किस प्रक्रिया के तहत उनका नाम मतदाता के रूप में दर्ज हुआ और उन्होंने मतदान किया या नहीं। इन सभी बिंदुओं की पुष्टि जांच और उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर होगी।
संगठनात्मक चुनाव के बीच बढ़ा विवाद
छत्तीसगढ़ राज्य युवा कांग्रेस की संगठनात्मक चुनाव प्रक्रिया 30 अगस्त से शुरू हुई है और 29 सितंबर तक चलनी है। इसी बीच मुंगेली में सामने आए आरोपों ने स्थानीय स्तर पर राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है। युवा कांग्रेस के संगठनात्मक चुनाव में विभिन्न पदों के लिए प्रत्याशी मैदान में हैं। ऐसे में कथित बाहरी मतदाताओं के इस्तेमाल का आरोप चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता से जुड़ा गंभीर सवाल बन गया है। फिलहाल यह पूरा मामला शिकायत और आरोपों के स्तर पर है। पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा कि मध्य प्रदेश से आए बताए जा रहे 11 युवाओं की चुनाव प्रक्रिया में वास्तव में कोई भूमिका थी या नहीं।
पुलिस जांच पर टिकी निगाहें
मामले में अब पुलिस की जांच महत्वपूर्ण मानी जा रही है। शिकायत में लगाए गए आरोपों की पुष्टि के लिए दस्तावेज, मतदाता संबंधी रिकॉर्ड, ठहरने की जानकारी और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों की जांच की जा सकती है। स्थानीय युवा कांग्रेस प्रत्याशियों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही कथित फर्जी मतदान और बाहरी मतदाताओं से जुड़े आरोपों की वास्तविकता सामने आ सकेगी।
बाहरी संदिग्धों पर रोक की मांग
बलरामपुर में भी प्रदेश युवा कांग्रेस के संगठन चुनाव के दौरान बाहरी व्यक्तियों की कथित गतिविधियों पर रोक लगाने की मांग की गई है। युवा कांग्रेस जिलाध्यक्ष प्रत्याशी ने बताया कि सरगुजा संभाग प्रभारी के निर्देशों के बावजूद प्रदेश से बाहर के कुछ संदिग्ध व्यक्तियों द्वारा युवाओं से संपर्क कर मतदान के नाम पर ओटीपी मांगे जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं। जिससे चुनाव की पारदर्शिता एवं निष्पक्षता पर सवाल उठ रहें हैं।
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