वर्ष 2026 को लक्ष्य बनाकर ‘जीरो विजन’ के तहत सड़कों को सुरक्षित बनाने पर जोर

छग

Update: 2026-01-03 13:30 GMT
Durg. दुर्ग। दुर्ग संभाग में लगातार बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण के उद्देश्य से आज लोक निर्माण विभाग के सभाकक्ष में सड़क सुरक्षा को लेकर एक अहम समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता माननीय न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) अभय मनोहर सप्रे, अध्यक्ष सुप्रीम कोर्ट कमेटी ऑन रोड सेफ्टी (पूर्व न्यायमूर्ति, सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया) ने की। बैठक में वर्ष 2026 को लक्ष्य बनाकर “जीरो विजन” के तहत सड़क दुर्घटनाओं, मौतों और घायलों की संख्या को न्यूनतम स्तर पर लाने पर विशेष जोर दिया गया। बैठक के दौरान न्यायमूर्ति श्री सप्रे ने दुर्ग संभाग में वर्ष 2024 और 2025 की सड़क दुर्घटनाओं, मृत्यु और घायलों के आंकड़ों की तुलनात्मक समीक्षा की। उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि दोनों वर्षों में आंकड़े लगभग समान हैं, जो प्रशासन और समाज दोनों के लिए गंभीर चेतावनी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि अभी ठोस कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में स्थिति और भयावह हो सकती है। इस पर उन्होंने अधिकारियों को सड़क सुरक्षा के क्षेत्र में अधिक प्रभावी और व्यावहारिक रणनीति अपनाने के निर्देश दिए।
न्यायमूर्ति श्री सप्रे ने सड़क दुर्घटनाओं के प्रमुख कारणों का गहन विश्लेषण करने, संवेदनशील मार्गों और ब्लैक स्पॉट्स की पहचान कर वहां त्वरित सुधारात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सड़क सुरक्षा केवल प्रशासन या पुलिस की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसके लिए जनभागीदारी सबसे आवश्यक है। जब तक आम नागरिक नियमों का पालन नहीं करेंगे, तब तक दुर्घटनाओं में कमी लाना संभव नहीं है। उन्होंने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े दुर्ग संभाग के अन्य जिलों के कलेक्टरों और पुलिस अधीक्षकों को प्रत्येक माह सड़क सुरक्षा की समीक्षा बैठक आयोजित करने के निर्देश दिए। इसके साथ ही स्कूलों, कॉलेजों और सार्वजनिक स्थलों पर व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाने पर विशेष बल दिया।
अभियान के अंतर्गत संतुलित गति से वाहन चलाने, हेलमेट और सीटबेल्ट के अनिवार्य उपयोग, यातायात संकेतों के पालन और शराब पीकर वाहन न चलाने जैसे संदेशों का व्यापक प्रचार-प्रसार करने को कहा गया। न्यायमूर्ति श्री सप्रे ने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों का एक बड़ा कारण हेलमेट और सीटबेल्ट का उपयोग न करना है। उन्होंने निर्देश दिए कि बिना हेलमेट और बिना सीटबेल्ट वाहन चलाने वालों के साथ-साथ शराब के नशे में वाहन चलाने वालों के खिलाफ कड़ी चालानी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। इसके अलावा जिले में सभी वाहनों के बीमा, फिटनेस प्रमाणपत्र और वाहन चालकों के लाइसेंस की नियमित जांच करने के निर्देश भी दिए गए। बैठक के दौरान सड़क सुरक्षा अभियान 2025 के अंतर्गत उत्कृष्ट कार्य करने वाली संस्थाओं को सम्मानित किया गया। इनमें जनआक्रोश नागपुर, दिशा ग्रुप भिलाई, इंद्रधनुष समूह भिलाई (बीएसपी), स्वयं सिद्धा संस्था भिलाई और मेरा युवा भारत दुर्ग शामिल हैं। न्यायमूर्ति श्री सप्रे ने इन संस्थाओं को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर उनके योगदान की सराहना की।
जनजागरूकता को और अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से न्यायमूर्ति श्री सप्रे ने हेलमेट बाइक रैली को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस रैली के माध्यम से आम लोगों को हेलमेट पहनने और सुरक्षित वाहन चलाने का संदेश दिया गया। बैठक में अंतर्विभागीय लीड एजेंसी (सड़क सुरक्षा) के अध्यक्ष संजय शर्मा ने जिले की सड़क सुरक्षा स्थिति, दुर्घटनाओं के कारण, नियंत्रण उपाय, प्रवर्तन, इंजीनियरिंग सुधार, शिक्षा और आकस्मिक उपचार से संबंधित भावी कार्ययोजना की विस्तृत जानकारी दी। वहीं कलेक्टर अभिजीत सिंह ने आश्वासन दिया कि जिला प्रशासन सड़क सुरक्षा को लेकर पूरी तरह सजग है और दुर्घटनाओं में कमी लाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। इस अवसर पर संभागायुक्त सत्यनारायण राठौर, आईजी रामगोपाल गर्ग, पुलिस अधीक्षक विजय अग्रवाल सहित प्रशासन, पुलिस, परिवहन और नगर निगम के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। बैठक में यह स्पष्ट संदेश दिया गया कि सड़क सुरक्षा को लेकर किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और वर्ष 2026 को “जीरो विजन” का लक्ष्य बनाकर ठोस कदम उठाए जाएंगे।
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