Raipur. रायपुर। बलौदाबाजार जिले के सिमगा ब्लॉक स्थित शासकीय आत्मानंद हिंदी माध्यम स्कूल में विद्यार्थियों से कथित रूप से अवैध फीस वसूली के मामले ने अब नया मोड़ ले लिया है। सामाजिक कार्यकर्ताओं और ग्रामीणों की लगातार शिकायतों के बाद मामला हाईकोर्ट तक पहुंचा। अब प्रकरण की जांच के लिए समिति गठित की गई है। जनता से रिश्ता ने वर्ष 2025 में इस मामले को प्रमुखता से समाचार प्रकाशित किया था, जिसके बाद ग्रामीणों ने कलेक्टर और शिक्षा विभाग के अधिकारियों से शिकायत की थी।

जानकारी के अनुसार जांच समिति में सिमगा एसडीएम, विकासखंड शिक्षा अधिकारी और जिला शिक्षा अधिकारी बलौदाबाजार को शामिल किया गया है। समिति स्कूल में शैक्षणिक सत्र 2023-24 और 2024-25 के दौरान विद्यार्थियों से ली गई कथित फीस से संबंधित रिकॉर्ड की जांच कर रही है। ग्रामीणों और अभिभावकों का आरोप है कि शिक्षा विभाग के निर्देशों के बावजूद स्कूल में विद्यार्थियों से लगातार फीस वसूली गई। इस संबंध में पहले भी कलेक्टर, जिला शिक्षा अधिकारी और शिक्षा विभाग के अन्य अधिकारियों को लिखित शिकायत दी गई थी, लेकिन लंबे समय तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाया गया।
पूरा मामला बेमेतरा जिले की सीमा से लगे बलौदाबाजार जिले के सिमगा ब्लॉक स्थित शासकीय आत्मानंद हिंदी माध्यम स्कूल से जुड़ा है। आरोप है कि स्कूल प्रबंधन की ओर से लगातार दो वर्षों तक विद्यार्थियों से फीस ली गई, जबकि शासन की ओर से स्कूल में पढ़ने वाले विद्यार्थियों से इस प्रकार की राशि नहीं लेने के निर्देश बताए गए थे। स्कूल में पढ़ने वाले विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों ने भी कथित फीस वसूली की शिकायत की थी। ग्रामीणों का कहना है कि स्कूल में 400 से अधिक विद्यार्थी अध्ययनरत हैं और यदि सभी से राशि ली गई है तो कुल वसूली लाखों रुपए तक पहुंच सकती है। इसी बिंदु को लेकर जांच समिति अब स्कूल के रिकॉर्ड, रसीदों और अन्य दस्तावेजों की पड़ताल कर रही है।


मामले को लेकर ग्रामीणों का आरोप रहा है कि शिकायतों के बावजूद संबंधित प्राचार्य के खिलाफ समय पर कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने शिक्षा विभाग की भूमिका पर भी सवाल उठाए थे और मांग की थी कि पूरे मामले की स्वतंत्र जांच कर जिम्मेदारी तय की जाए। वर्ष 2025 में जनता से रिश्ता ने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया था। इसके बाद मामला लगातार चर्चा में रहा और ग्रामीणों ने प्रशासनिक स्तर पर शिकायतें आगे बढ़ाईं। बाद में ग्रामीण इस मामले को लेकर हाईकोर्ट पहुंचे। अब जांच समिति गठित होने के बाद ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं को उम्मीद है कि स्कूल में कथित फीस वसूली से जुड़े सभी रिकॉर्ड की निष्पक्ष जांच होगी। समिति यह पता लगाएगी कि किन मदों में राशि ली गई।

क्या इसके लिए सक्षम स्तर से अनुमति थी और विद्यार्थियों से वसूली गई रकम का हिसाब किस प्रकार रखा गया। जांच के दौरान वर्ष 2023-24 और 2024-25 के रिकॉर्ड को विशेष रूप से देखा जा रहा है। फीस से संबंधित दस्तावेज, विद्यार्थियों की संख्या, जमा राशि और स्कूल स्तर पर बनाए गए अभिलेखों की जांच की जा रही है। मामले में जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि विद्यार्थियों से ली गई राशि नियमों के अनुरूप थी या नहीं। यदि जांच में अनियमितता सामने आती है तो संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ आगे की कार्रवाई की जा सकती है। फिलहाल जांच समिति ने दस्तावेजों की पड़ताल शुरू कर दी है। ग्रामीणों और अभिभावकों की नजर अब जांच रिपोर्ट और उसके आधार पर होने वाली कार्रवाई पर टिकी हुई है।
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