Kawardha. कवर्धा। छत्तीसगढ़ के कवर्धा जिला मुख्यालय से करीब 8 किलोमीटर दूर हरिनछपरा औद्योगिक केंद्र में संचालित सड़क डामर तेल फैक्ट्री से निकल रहे धुएं और तेज बदबू को लेकर ग्रामीणों की चिंता बढ़ती जा रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि फैक्ट्री में पुराने और टूटे-फूटे टायर, ट्यूब तथा रबर को गर्म कर सड़क निर्माण में उपयोग होने वाला तेल तैयार किया जाता है। निर्माण प्रक्रिया के दौरान फैक्ट्री से आसमान में धुएं के बड़े-बड़े गुबार उठते दिखाई देते हैं। ग्रामीणों के मुताबिक, इस धुएं के साथ तेज और बदबूदार गैस आसपास के वातावरण में फैलती है, जिससे पर्यावरण प्रदूषण के साथ लोगों के स्वास्थ्य पर भी संभावित खतरा बना हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि फैक्ट्री में उत्पादन प्रक्रिया शुरू होने के बाद आसपास के क्षेत्र में धुएं और बदबू की समस्या ज्यादा महसूस होती है। हवा चलने पर फैक्ट्री से निकलने वाला धुआं आसपास के खेतों और ग्रामीण इलाकों तक पहुंच जाता है। इससे सड़क से गुजरने वाले राहगीरों के साथ-साथ खेतों में काम करने वाले किसानों को भी परेशानी का सामना करना पड़ता है। ग्रामीणों का आरोप है कि कई बार धुएं का गुबार काफी दूर तक दिखाई देता है और वातावरण में लंबे समय तक बदबू बनी रहती है।
पुराने टायर और रबर गर्म करने का आरोप
स्थानीय ग्रामीणों के मुताबिक फैक्ट्री में पुराने और खराब टायर, ट्यूब तथा रबर जैसी सामग्री को गर्म करके सड़क निर्माण में इस्तेमाल होने वाला तेल तैयार किया जाता है। इस प्रक्रिया के दौरान निकलने वाले धुएं को लेकर ग्रामीणों ने सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यदि इस तरह की औद्योगिक प्रक्रिया से धुआं और गैस निकलती है तो उसे नियंत्रित करने के लिए पर्याप्त तकनीकी व्यवस्था होना जरूरी है। ग्रामीणों का कहना है कि औद्योगिक गतिविधियों से रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिल सकता है, लेकिन इसके साथ पर्यावरणीय मानकों और लोगों की सुरक्षा का भी ध्यान रखा जाना चाहिए। यदि उत्पादन प्रक्रिया के दौरान प्रदूषण नियंत्रण के पर्याप्त इंतजाम नहीं किए जाते हैं तो इसका असर आसपास के वातावरण पर पड़ सकता है।
हवा के साथ खेतों तक पहुंचता है धुआं
हरिनछपरा क्षेत्र के किसानों और ग्रामीणों का कहना है कि फैक्ट्री से निकलने वाला धुआं हवा के साथ आसपास के खेतों और आबादी वाले इलाकों तक पहुंचता है। खेतों में काम करने वाले लोगों को कई बार बदबू के कारण असहज स्थिति का सामना करना पड़ता है। सड़क से गुजरने वाले लोगों को भी धुएं के कारण परेशानी होने की बात ग्रामीणों ने कही है। ग्रामीणों का दावा है कि धुएं के गुबार कई बार गुब्बारे जैसे दिखाई देते हैं और कुछ समय बाद आसपास के वातावरण में फैल जाते हैं। तेज बदबू के कारण लोगों को परेशानी होती है। ग्रामीणों ने आशंका जताई है कि लंबे समय तक प्रदूषित धुएं के संपर्क में रहने से लोगों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। हालांकि इन स्वास्थ्य संबंधी आशंकाओं की वास्तविक स्थिति वैज्ञानिक जांच और विशेषज्ञों के परीक्षण के बाद ही स्पष्ट हो सकती है।
ग्रामीणों ने की जांच की मांग
हरिनछपरा के किसान और ग्रामीण नागरिक जलेश बघेल, राजू चतुर्वेदी, रामेश्वर लहरे, टिकेश्वर सिंहा और गोरेलाल सिंहा ने फैक्ट्री से निकलने वाले धुएं और बदबू को लेकर चिंता जताई है। ग्रामीणों ने संबंधित विभागों से फैक्ट्री की निर्माण प्रक्रिया और प्रदूषण नियंत्रण व्यवस्था की जांच कराने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि जिम्मेदार अधिकारी मौके पर पहुंचकर फैक्ट्री का निरीक्षण करें और यह पता लगाएं कि उत्पादन के दौरान किस प्रकार की प्रक्रिया अपनाई जा रही है। इसके साथ ही प्रदूषण नियंत्रण के लिए निर्धारित मानकों का पालन हो रहा है या नहीं, इसकी भी जांच की जाए। ग्रामीणों ने मांग की है कि फैक्ट्री में प्रदूषण नियंत्रण के लिए लगाए गए उपकरणों और अन्य सुरक्षा उपायों की भी जांच की जाए। यदि किसी तरह की कमी सामने आती है तो उसे दूर कराने के लिए आवश्यक निर्देश जारी किए जाएं। ग्रामीणों का कहना है कि समय रहते समस्या का समाधान होने से पर्यावरण और लोगों के स्वास्थ्य को संभावित नुकसान से बचाया जा सकता है।
नियमित निगरानी की मांग
ग्रामीणों ने औद्योगिक क्षेत्र में संचालित फैक्ट्री से निकलने वाले धुएं की नियमित निगरानी की मांग की है। उनका कहना है कि केवल शिकायत मिलने के बाद निरीक्षण करने के बजाय संबंधित विभाग को समय-समय पर प्रदूषण की स्थिति की जांच करनी चाहिए। जरूरत पड़ने पर हवा की गुणवत्ता और फैक्ट्री से निकलने वाले उत्सर्जन की वैज्ञानिक जांच भी कराई जानी चाहिए। ग्रामीणों का कहना है कि यदि फैक्ट्री निर्धारित नियमों के तहत संचालित हो रही है तो जांच के माध्यम से स्थिति स्पष्ट हो जाएगी। वहीं यदि प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े किसी नियम का उल्लंघन पाया जाता है तो संबंधित विभाग को नियमानुसार कार्रवाई करनी चाहिए।
विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण भी जरूरी
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि औद्योगिक गतिविधियों का विरोध करना उनका उद्देश्य नहीं है। उनका कहना है कि क्षेत्र में उद्योग स्थापित होने से रोजगार और आर्थिक गतिविधियों के अवसर बढ़ सकते हैं, लेकिन विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण भी जरूरी है। ग्रामीण चाहते हैं कि फैक्ट्री का संचालन नियमों के अनुरूप हो और आसपास रहने वाले लोगों को किसी तरह की परेशानी न हो। ग्रामीणों ने प्रशासन से जल्द मौके पर पहुंचकर स्थिति का निरीक्षण करने और आवश्यक कदम उठाने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि धुएं और बदबू की समस्या पर समय रहते ध्यान नहीं दिया गया तो आने वाले दिनों में इसका असर आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों और पर्यावरण पर पड़ सकता है। अब ग्रामीणों की नजर संबंधित विभाग की जांच और कार्रवाई पर है।