Raipur. रायपुर। खरीफ सीजन में खाद और बीज की कथित कमी को लेकर मंगलवार को छत्तीसगढ़ विधानसभा में जमकर हंगामा हुआ। विपक्षी कांग्रेस सदस्यों ने किसानों की समस्याओं को लेकर काम रोको प्रस्ताव पेश करते हुए तत्काल चर्चा की मांग की। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि प्रदेश में किसान खाद, बीज और सिंचाई जैसी मूलभूत जरूरतों के लिए परेशान हैं। हालांकि कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि राज्य में खाद और उन्नत बीज की पर्याप्त उपलब्धता है। सरकार ने दावा किया कि खरीफ 2026 की तैयारियों के लिए पहले से ही पर्याप्त मात्रा में उर्वरक और प्रमाणित बीज का भंडारण किया गया है। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कांग्रेस के काम रोको प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया। इसके विरोध में विपक्षी सदस्य नाराज हो गए और नारेबाजी करते हुए गर्भगृह में पहुंच गए। सदन में लगातार शोर-शराबा और हंगामे की स्थिति बनी रहने के बाद 35 कांग्रेस विधायकों को सदन की कार्रवाई से निलंबित कर दिया गया।
कांग्रेस ने किसानों की परेशानी का उठाया मुद्दा
कांग्रेस की ओर से लाए गए प्रस्ताव में कहा गया कि प्रदेश में खरीफ फसल की बुआई का समय चल रहा है, लेकिन किसान कई समस्याओं से जूझ रहे हैं। विपक्ष ने आरोप लगाया कि कई क्षेत्रों में खाद और बीज की उपलब्धता को लेकर किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कांग्रेस सदस्यों ने कहा कि बारिश की कमी के कारण कई किसान सिंचाई पंपों के सहारे खेती करने को मजबूर हैं। लेकिन बिजली आपूर्ति बाधित होने से फसल प्रभावित हो रही है। विपक्ष ने यह भी आरोप लगाया कि धान की प्रमुख किस्मों के बीजों की कमी के कारण किसानों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। कांग्रेस ने मांग की कि किसानों से जुड़े इस गंभीर विषय पर सदन में तुरंत चर्चा कराई जाए और सरकार स्थिति स्पष्ट करे।
कृषि मंत्री ने आरोपों को बताया गलत, बोले पर्याप्त है खाद-बीज का स्टॉक
कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने विभागीय जवाब पेश करते हुए विपक्ष के आरोपों को गलत बताया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में खाद और बीज की कोई कमी नहीं है और सरकार ने खरीफ सीजन को ध्यान में रखते हुए पहले से ही पर्याप्त व्यवस्था की है। सरकार के अनुसार खरीफ 2026 के लिए कुल 15.55 लाख मीट्रिक टन उर्वरक का लक्ष्य तय किया गया था। इसके मुकाबले 14.06 लाख मीट्रिक टन यानी लगभग 90 प्रतिशत उर्वरक का भंडारण किया जा चुका है। कृषि विभाग ने बताया कि किसानों की मांग के अनुसार प्रमाणित बीज भी उपलब्ध कराए गए हैं। धान सहित अन्य फसलों के बीजों की पर्याप्त व्यवस्था की गई है, ताकि किसानों को समय पर बीज मिल सके।
4.54 लाख क्विंटल बीज का हुआ भंडारण
सरकार ने विधानसभा में जानकारी दी कि सहकारी समितियों में लगभग 4.54 लाख क्विंटल प्रमाणित बीज का भंडारण किया गया था। इसमें से 3.73 लाख क्विंटल बीज किसानों को वितरित किया जा चुका है, जबकि करीब एक लाख क्विंटल बीज अभी भी उपलब्ध है। सरकार ने कहा कि धान की लोकप्रिय किस्मों के साथ-साथ अन्य फसलों के बीज भी मांग के अनुसार उपलब्ध कराए जा रहे हैं। किसानों को किसी भी तरह की परेशानी न हो, इसके लिए विभाग लगातार निगरानी कर रहा है।
डीएपी, पोटाश और अन्य उर्वरकों का भी पर्याप्त भंडारण
कृषि विभाग ने बताया कि केवल डीएपी और पोटाश ही नहीं, बल्कि एनपीके और सिंगल सुपर फॉस्फेट जैसे वैकल्पिक उर्वरकों का भी पर्याप्त स्टॉक रखा गया है। सरकार ने कहा कि किसानों को उनकी जरूरत के अनुसार उर्वरक उपलब्ध कराने के लिए सहकारी समितियों और वितरण केंद्रों पर लगातार व्यवस्था की जा रही है। इसके अलावा सरकार ने एग्रीस्टैक पंजीयन को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की। विभाग ने कहा कि एग्रीस्टैक में पंजीयन कृषि ऋण लेने के लिए अनिवार्य शर्त नहीं है। इसका उद्देश्य केवल फसलवार वास्तविक क्षेत्र की जानकारी जुटाना है, जिससे योजनाओं का बेहतर संचालन किया जा सके।
94 अमानक उर्वरक मामलों में बिक्री पर रोक
सरकार ने विधानसभा में बताया कि उर्वरकों की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए लगातार जांच अभियान चलाया जा रहा है। इस वर्ष उर्वरकों के कई नमूने लिए गए, जिनमें 94 मामले अमानक पाए गए। इन मामलों में संबंधित उर्वरक स्टॉक की बिक्री पर प्रतिबंध लगाया गया है। विभाग ने कहा कि किसानों को गुणवत्तापूर्ण खाद उपलब्ध कराने के लिए लगातार कार्रवाई की जा रही है।
स्थगन प्रस्ताव खारिज होने के बाद बढ़ा विवाद
सरकार के जवाब के बाद विधानसभा अध्यक्ष ने कांग्रेस के स्थगन प्रस्ताव को ग्राह्य नहीं माना और तत्काल चर्चा की मांग को स्वीकार नहीं किया। इसके बाद विपक्षी सदस्यों ने विरोध शुरू कर दिया। नारेबाजी और हंगामे के बीच कई कांग्रेस विधायक गर्भगृह में पहुंच गए। सदन की व्यवस्था बिगड़ने पर विधानसभा अध्यक्ष ने 35 कांग्रेस सदस्यों को निलंबित कर दिया। खाद-बीज और किसानों के मुद्दे को लेकर विधानसभा में हुआ यह हंगामा अब राजनीतिक बहस का मुद्दा बन गया है। जहां कांग्रेस सरकार पर किसानों की समस्याओं को नजरअंदाज करने का आरोप लगा रही है, वहीं सरकार का कहना है कि प्रदेश में खाद, बीज और सिंचाई व्यवस्था पूरी तरह नियंत्रण में है।
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